बुजुर्गों की बढ़ती आबादी और दूसरों पर निर्भरता देश की अगली बड़ी चुनौती
लखनऊ। भारत दुनिया में सबसे युवा देश कहलाता है, इसके पीछे की अहम वजह है यहां की कुल आबादी की लगभग 65 फीसदी आबादी 35 वर्ष की आयु की है। देश के युवा देश को विकास की नयी रफ्तार देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन इससे इतर देश के बुजुर्गों से जुड़ा बेहद खास आंकड़ा सामने आया है। इस आंकड़े में यह बात सामने आयी है कि देश के 50 फीसदी बुजुर्ग दूसरों पर नहीं बल्कि खुद पर निर्भर हैं।
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बिहार में सबसे अधिक 38 फीसदी शहरी बुजुर्ग पुरुष पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हैं। वहीं जम्मू कश्मीर में 83 फीसदी शहरी बुजुर्ग महिलायें दूसरों पर निर्भर हैं। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट की मानें तो देश के बुजुर्गों की कुल आबादी का 71 फीसदी यानि 7.3 करोड़ लोग गांवों में रहते हैं। वहीं देश की कुल बुजुर्ग आबादी का 29 फीसदी लोग शहरी इलाकों में रहते हैं। 50 फीसदी शहरी बुजुर्ग महिलायें दूसरों पर निर्भर हैं।

35 फीसदी हुई है बढ़ोत्तरी
भारत में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या पर नजर डालें तो इसमें 35 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले दस वर्षों में यह आबादी 7.60 करोड़ से बढ़कर 10.30 करोड़ हो गयी है।

इन पांच राज्यों में सबसे अधिक निर्भरता
केरल, गोवा, तमिलनाडु, पंजाब, हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक बुजुर्ग। केरल में 12.6 फीसदी, गोवा में 11.2 फीसदी, तमिलनाडु में 10.4 फीसदी, पंजाब में 10.3 फीसदी और हिमाचल में 10.2 फीसदी लोग 60 वर्ष से अधिक हैं।

इन पांच राज्यों में सबसे कम निर्भरता
अरुणाचल, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम, सिक्किम में सबसे कम बुजुर्ग हैं। अरूणाचल में 4.6 फीसदी, मेघालय में 4.7 फीसदी, नागालैंड में 5.2 फीसदी, मिजोरम में 6.3 फीसदी और सिक्किम में 6.7 फिसदी ऐसे लोग हैं जिनकी उम्र 60 वर्ष से कम है।

जापान और बेल्जियम सबसे आगे
जापान में सबसे अधिक 42 फीसदी और बेल्जियम में 28 फीसदी बुजुर्ग दूसरों पर निर्भर हैं।

बढ़ने वाला है आर्थिक बोझ
भारतीय रेल में 13 लाख 35 हजार पेंशनभोगी हैं। इसके लिए 39417 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। जबकि यह आंकड़ा 2017-18 में बढ़कर 46315 करोड़ हो जाएगा।












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