माता-पिता, वरिष्ठ नागरिकों को समाज में सम्मानित जीवन सुनिश्चित करने वाला विधेयक लोकसभा में पेश
नई दिल्ली। लोकसभा में एक नया विधेयक पेश किया गया है। इसके तहत परिवार एवं समाज में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सम्मानित जीवन को सुनिश्चित करने के प्रावधान शामिल हैं। यह निजी विधेयक भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 में संशोाधन करने करने के लिए पेश किया गया है। जलवा हो तो MP पूनम महाजन जैसा, फ्लाइट ना छूटे इसलिए रेलवे ने दौड़ा दी स्पेशल ट्रेन

पूनम महाजन ने पेश किया बिल
निचले सदन में इस विधेयक को पेश किया है बीजेपी की सदस्य पूनम महाजन ने। पूनम ने कहा कि मौजूदा माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण और कल्याण अधिनियम 2007 ही ऐसा एकलौता कानून है जो कि वरिष्ठ नागरिकों के हितों और अधिकारों का आश्वासन देता है।
उन्होंने कहा कि, 'इस संबंध में वरिष्ठजनों के केवल भरण-पोषण मात्र पर ही नहीं बल्कि उनके निजी और सार्वजनिक जीवन को गुणवत्ताप्रद, उत्पादक और सम्मानजनक बनाए जाने की भी सुनिश्चितता पर जोर दिया जाए। इसी मकसद से उन्होंने इस निजी विधेयक को पेश किया है।'

ये हैं इस विधेयक के प्रमुख पॉइंट्स :
- इस विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में सीनियर सिटीजन्स के लिए विशेष प्रावधानों का जिक्र है। इसमें यात्रा, गैस, टेलीफोन कनेक्शन व विश्राम और मनोरंज आदि फैसिलिटीज में प्रवेश शुल्क में रियायत करना भी शामिल है।
- इसमें केंद्रीय एवं राज्य सरकार की विभिन्न सहायता योजनाओं का लाभ उठा पाने के लिए वरिष्ठ नागरिकों को आइडेंटिटी कार्ड जारी करना और सरकारी भवनों, सार्वजनिक परिवहन में उनके सुगम संचालन को आसान बनाने के लिए किसी भी तरह की भौतिक बाधा को दूर करना शामिल है।
- वरिष्ठ नागरिकों के भरण पोषण और उनके कल्याण के लिए धोखाधड़ी के मामलों, छल और अन्य दावों से संबंधित शिकायतों के शीघ्र निपटारे करने के लिए भरण पोषण अधिकरण का दायरा बढ़ाना।
- इसमें मेंशन है कि वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए वरिष्ठ नागरिक कल्याण निधि का गठन किया जाए।
- सीनियर सिटीजन्स के लिए कम दर पर स्वास्थ्य बीमा, विशेष प्रशिक्षित नर्स, परामर्श सेवाएं और राज्य के प्रयासों में पूरक सहायता देने के लिए एंबुलेंस सुविधाएं, दैनिक देखरेख और स्वास्थ्य देखरेख प्रदान करने के लिए गैर सरकारी संगठनों को प्रशिक्षण, अनुदान और रियायत दी जाए।
अगर यह लागू हुआ तो...
इसके लागू होने पर जो खर्च आएगा उसे संचित निधि से खर्च किया जाएगा। इसपर हर साल तकरीबन 100 करोड़ का आवर्ती खर्च और 50 करोड का अनवर्ती खर्च होने का अनुमान है।












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