दो भविष्यवाणियों ने हिलाई कर्नाटक की राजनीति! जाएंगे कुमारस्वामी या होगी येदुरप्पा की वापसी?
नई दिल्ली। कर्नाटक में राजनीति लगातार रंग बदल रही है। एक ओर जहां बजट को लेकर सीएम कुमारस्वामी और कांग्रेस के बीच टकराव चल रहा है तो वहीं दूसरी ओर अचानक ज्योतिषियों की भविष्यवाणियों के चर्चे होने लगे हैं। कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों दो भविष्यवाणियों की चर्चा सबसे ज्यादा है। सवाल भी दो ही हैं? पहला- क्या कुमारस्वामी पूरे साल सरकार चला पाएंगे? दूसरा- क्या बीएस येदुरप्पा की सत्ता में वापसी होगी? इन दोनों सवालों के जवाब भी दो ही हैं।

येदुरप्पा की सत्ता में वापसी करने वाली भविष्यवाणियां
कर्नाटक के वीरशैव मठ के संत और एक आदिवासी जनजाति के गुरु के दो अलग-अलग दावे हैं। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, चिकमंगलुर के पास बालेहोन्नुर के संत रामभपूरी ने दावा किया है कि येदियुरप्पा फिर एक बार कर्नाटक के सीएम पद पर विराजमान होंगे। उनकी इस भविष्यवाणी के सामने आते ही कर्नाटक में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। संत का दावा है कि राज्य में चल रही कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है।

कुमारस्वामी को कोई नहीं हिला सकता, पूरे पांच साल रहेंगे सीएम
जेडीएस के नेता, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा के बेटे और कर्नाटक के सीएम कुमारस्वामी के पक्ष में तंत्र-मंत्र और जादू-टोना करने वाले आदिवासी जनजाति 'सुदुगादू सिद्धारू' ने दावा किया है। उन्होंने वीरशैव मठ के संत के दावे के उलट कहा है कि कुमारस्वामी पांच साल पूरे करेंगे और दुनिया की कोई भी शक्ति उन्हें नहीं हटा सकती है। 'सुदुगादू सिद्धारू' ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव से तीन महीने पहले ही कहा था कि कुमारस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे और उनकी यह भविष्यवाणी सच भी हो गई। उन्होंने चुनौती भी दी थी कि अगर उनकी भविष्यवाणी सच नहीं हुई तो पूरी जनजाति इस पेशे से निकल जाएगी।

मुश्किलों से गुजर रहा कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन
कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कांग्रेस की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि कुमारस्वामी किसी भी बड़े फैसले में उन्हें शामिल नहीं कर रहे हैं। हाल में कुमारस्वामी ने पेट्रोल-डीजल पर दो प्रतिशत स्टेट टैक्स बढ़ाने का फैसला बिना कांग्रेस से सलाह किए ले लिया। इतना ही नहीं, कांग्रेस को कुमारस्वामी के बजट में उत्तर कर्नाटक की अनदेखी किए जाने पर भी ऐतराज है। इन सब समस्याओं को लेकर कांग्रेस अपनी बात कहने का प्रयास कर रही है, लेकिन कुमारस्वामी गठबंधन के साथी उस तरह से सम्मान नहीं दे रहे हैं, जैसा कि उन्हें देना चाहिए। ऐसे में बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन कार्यकाल पूरा कर सकेगा?












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