किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, दिल्ली-नोएडा सीमा पर यातायात अब भी बाधित
किसानों का सोमवार को शुरू हुआ विरोध मार्च मंगलवार को भी जारी रहा। जिससे दिल्ली-नोएडा सीमा पर यातायात बाधित हो गया और यात्रियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किसान एकता संघ और अखिल भारतीय किसान सभा ने किया। जिसमें दिल्ली चलो के बैनर तले भूमि आवंटन और अधिग्रहित जमीन के मुआवजे जैसी मांगों को लेकर किसानों ने अपनी आवाज बुलंद की।
महामाया फ्लाईओवर पर भारी जाम
यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, आगरा और 20 अन्य जिलों के किसानों द्वारा आयोजित किया गया था। विरोध मार्च सुबह करीब 11:30 बजे महामाया फ्लाईओवर से शुरू हुआ। जिसके बाद दादरी-नोएडा लिंक रोड पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। भारतीय किसान परिषद द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन ने दिल्ली-नोएडा मार्ग पर यात्री वाहनों की लंबी कतारें लगा दी। इससे प्रभावित होने वाले प्रमुख मार्ग चिल्ला बॉर्डर, डीएनडी फ्लाईवे, कालिंदी कुंज, दिल्ली गेट हैं।

पुलिस और किसानों के बीच टकराव
जैसे-जैसे प्रदर्शनकारी आगे बढ़े उन्होंने नोएडा पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों को नोएडा लिंक रोड पर दलित प्रेरणा स्थल के पास रोका गया। जो चिल्ला बॉर्डर से लगभग 1 किमी दूर है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की।
हालांकि ट्रैफिक बाधाओं के कारण यात्रियों को भारी परेशानी हुई। नोएडा निवासी अपराजिता सिंह ने कहा कि उन्हें चिल्ला बॉर्डर पर एक घंटे की देरी का सामना करना पड़ा। वहीं अमित ठाकुर नामक यात्री ने ट्रैफिक जाम से बचने के लिए मेट्रो सेवा का सहारा लिया। जो अन्यथा उनकी यात्रा में एक अतिरिक्त घंटा जोड़ देता।
आने वाले दिनों में और विरोध की तैयारी
गैर-राजनीतिक संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में पंजाब के किसानों ने 6 दिसंबर को दिल्ली मार्च की योजना की घोषणा की है। ये समूह पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी सीमा पर पिछले कुछ महीनों से डेरा डाले हुए हैं।
सामाजिक आंदोलनों और शहरी गतिशीलता पर प्रभाव
यह विरोध शहरी क्षेत्रों में चलने वाले सामाजिक आंदोलनों और उनके परिवहन व्यवस्था पर प्रभाव को उजागर करता है। यात्रियों को असुविधा से बचाने और प्रदर्शनकारियों की मांगों का समाधान निकालने के लिए प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद बेहद महत्वपूर्ण है।
किसानों का यह प्रदर्शन न केवल ग्रामीण संकट की गंभीरता को रेखांकित करता है। बल्कि सरकार और समाज के बीच जवाबदेही और संवाद की आवश्यकता पर भी जोर देता है। आने वाले दिनों में स्थिति का समाधान निकालने और नागरिक व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी।












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