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समलैंगिकता के खिलाफ मुस्लिम धर्मगुरु, 'पुरुष महिलाओं का काम करेंगे तो महिलाएं क्या करेंगी?'

नई दिल्ली। समलैंगिक संबंधों को लेक जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, उसके बाद देशभर में समलैंगिक कोर्ट के फैसले का जश्न मना रहे हैं। लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम धर्मुगुरुओं ने इसका विरोध किया है। तमाम धर्मगुरुओं ने समलैंगिक संबंध को धर्म और मानवता के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि समलैंगिक संबंधों की इजाजत नहीं दी जा सकती है क्योंकि यह धर्म के खिलाफ है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ जजों ने इस मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की संभावना से इनकार नहीं किया है।

मुस्लिम संगठन विरोध में

मुस्लिम संगठन विरोध में

जमियत उलमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि कोर्ट का यह फैसला देश में यौन अपराध को और बढ़ाएगा। कोर्ट ने अगर 2013 में दिए गए फैसले का समर्थन किया होता और समलैंगिक संबंधों को अपराध ठहराया होता तो बेहतर होता। आपको बता दें कि 2013 में दिल्ली हाई कोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को अपराध करार दिया था। गौरतलब है कि जमियत उलमा ए हिंद देश में मुस्लिम धर्म का तीसरा सबसे बड़ा संगठन है, ऐसे में जिस तरह से इसके महासचिव मदनी ने समलैंगिक संबंध को गैरकानूनी बताया है उससे साफ है कि यह मामला यहीं खत्म होने वाला नहीं है।

यौन अपराध बढ़ेगा

यौन अपराध बढ़ेगा

मदनी ने कहा कि समलैंगिक संबंध प्रकृति के नियम के खिलाफ है, इससे लोगों का नैतिक पतन होगा और समाज में यौन अपराध बढ़ेगा, साथ ही हर रोज हिंसा की वारदात में भी इजाफा होगा। यह शर्मनाक कानून परिवार और समाज को पीछे ले जाएगा। आप पूरे समाज को मौलिक अधिकार का हवाला देकर यौन संबंधों के नाम पर अराजकता की ओर नहीं ढकेल सकते हैं। उन्होंने कहा कि हर दैवीय किताब में समलैंगिक संबंधों को अप्राकृतिक करार दिया गया है।

देश की संस्कृति को नुकसान पहुंचाता है

देश की संस्कृति को नुकसान पहुंचाता है

वहीं दूसरी तरफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड क वकील कमाल फारुकी ने कहा कि समलैंगिक संबंधों को दंडनीय अपराध करार दिया जाना गलत था, लेकिन कोई अपने बंद कमरे में क्या कर रहा है इसमे पुलिस का हस्तक्षेप नहीं हो सकता है। लेकिन अगर यह समाज को नुकसान पहुंचाता है और देश की संस्कृति को नुकसान पहुंचाता है, तो पर्सनल लॉ बोर्ड की निश्चित भूमिका है, यह ना सिर्फ मुसलमानों के लिए बल्कि पूरे देश के नागरिकों के लिए जरूरी है।

महिलाओं के अधिकार के खिलाफ

महिलाओं के अधिकार के खिलाफ

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे राशिद ने कहा कि अगर आदमी किसी आदत का शिकार हो जाता है और वह उसकी जरूरत बन जाती है तो यह जरूरी नहीं है कि इसे पूरी मानवता के लिए जरूरी कर दिया जाए। मैं इस मसले को मजहबी रंग नहीं देना चाहता हूं, लेकिन मुझे लगता है कि समलैंगिक संबंध महिलाओं के अधिकार के खिलाफ है, अगर पुरुष महिलाओं का काम करेंगे तो महिलाएं क्या करेंगी। जबतक भारतीय संस्कृति जिंदा है समलैंगिकता ना सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि जघन्य अपराध है।

इसे भी पढ़ें- समलैंगिकता पर फैसले के बाद पुलिस के सामने चुनौती, पुरुषों को कैसे मानेंगे बलात्कार पीड़ित

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