राष्ट्रगान पर आदेश में SC ने कहा- फिल्म में राष्ट्रगान बजने पर खड़े होने के लिए नहीं कर सकते बाध्य
राष्ट्रगान पर अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन तो किया लेकिन इस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। बीते साल 30 नवंबर को जारी एक आदेश के बाद तमाम याचिकाएं कोर्ट में दाखिल की गई हैं।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी फिल्म या डॉक्यूमेंट्री के दौरान राष्ट्रगान बजता है तो उसके सम्मान में खड़े होने के लिए जनता बाध्य नहीं है। मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने अपने पूर्व आदेश पर रोक लगाने और उसे वापस लेने से मना कर दिया है।

बीते साल 30 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि कोर्ट ने थिएटर मालिकों से कहा था कि जब राष्ट्रगान बज रहा हो तो उस समय स्क्रीन पर तिरंगा झंडा दिखाया जाए। सिनेमा हॉल में बैठे हर आदमी को राष्ट्रगान के समय खड़ा होकर इसका सम्मान करना पड़ेगा। सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि राष्ट्रगान पूरा बजाया जाए।
भले ना गाएं राष्ट्रगान
मंगलवार को कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिनेमाघरों में जनता को राष्ट्रगान बजने के वक्त खड़ा होना पड़ेगा भले वो राष्ट्रगान ना गाएं। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहचगी ने कहा कि प्रश्न देश के नागरिकों की देशभक्ति की भावना दिखाने का है। जब इस विषय में कोई कानून नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश महत्वपूर्ण है।
रोहतगी ने कहा है कि सिनेमाघरों के साथ-साथ यह आदेश स्कूलों में भी की लागू किया जाए ताकि राष्ट्रभक्ति की भावना की शुरूआत बचपन से हो सके। अब इस मामले की सुनवाई 18 अप्रैल को होगी। दरअसल, राष्ट्रगान से संबंधित सुप्रीम कोर्ट में आदेश के संबंध में तमाम याचिकाएं दाखिल की गई है।
इनमें कहा गया है कि इस आदेश को वापस लिया जाए क्योंकि इस आदेश से अधिकारों का हनन हो रहा है। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट को सिनेमा जैसे जगहों पर इसे नहीं लागू करना चाहिए।
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