सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ का बैंक खाता फ्रीज करने पर गुजरात सरकार को दिया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ का बैंक खाता फ्रीज करने पर गुजरात सरकार को नोटिस दिया है। तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस गुजरात सरकार को दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को 21 अगस्त तक अपना जवाब देने के लिए कहा है। तीस्ता सीतलवाड़ अपने दो एनजीओ सबरंग और सिटीजन आॅफ जस्टिस एंड पीस के बैंक खाते फ्रीज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट को इस मामले को लेकर पहुंची थी। गुजरात पुलिस ने उनके एनजीओ के बैंक खातों को वर्ष 2014 में फ्रीज कर दिया था।
इस मामले में जब वो स्थानीय अदालत में गई तो अदालत ने पाया कि आरोपी इस मामले में जांच टीम का सहयोग नहीं कर रही हैं। इससे जांच प्रभावित हो रही है। तीस्ता सीतलवाड़ पर आरोप था कि उन्होंने देश और विदेश से गुलबर्ग सोसायटी को एक म्यूजिम में बदलने के लिए 1.51 रूपए का चंदा लिया था। पर उन पैसों का उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर प्रयोग किया।
इससे पहले केंद्र सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ सबरंग का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया था।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी करते हुए कहा था कि तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ में विदेश से मिलने वाले फंड में कई अनियमितताएं हैं। साथ ही तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ का बैंक खाता भी सील कर दिया गया था।
आदेश में कहा गया है कि सबरंग ट्रस्ट ने एससीपीपीएल के लिए 50 लाख रूपए खर्च किए जो स्पष्टतौर पर विदेश सहायता नियामक कानून (एफसीआरए) का उल्लंघन है।
एनजीओ ने एक गैर पंजीकृत कंपनी के लिए न केवल अवैध रूप से विदेशी सहायता राशि का इस्तेमाल किया, बल्कि वह कंपनी उनकी खुद की मीडिया और पब्लिशिंग कंपनी है। इस उद्देश्य के लिए धन का इस्तेमाल एफसीआरए के तहत पूरी तरह से वर्जित है।












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