सुप्रीम कोर्ट से केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को झटका, बंगले के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश बरकरार
नई दिल्ली, 26 सितंबर। बीजेपी नेता व राज्यसभा सांसद नारायण राणे को सर्वोच्च अदलत से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट से उनके बंगले के अवैध निर्माण मामले में राहत नहीं मिली है। उन्होंने पिछले हफ्ते हाईकोर्ट एक आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। मामले से जुड़ी उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। वहीं सर्वोच्च अदालत ने कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए राणे की याचिका खारिज कर दी।
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सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने राणे की याचिका को रद्द करने के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सही माना। हालांकि अदालत ने अपने बंगले के निर्माण को वैध साबित करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर इस अवधि में राणे बंगले के अपने अनधिकृत निर्माण को कानून के दायरे में नहीं ला सकते तो बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला लागू होगा।
बता दें कि पिछले बॉम्बे हाईकोर्ट ने हफ्ते बीएमसी को सांसद राणे के बंगले में चल रहे अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश जारी कर दिया था। ही बीएमसी को आदेश दिया था कि राणे के बंगले में चल रहे अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाए। बंगले में चल रहा निर्माण अवैध साबित होने पर राणे पर हाईकोर्ट ने 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसी आदेश को बाद में राणे ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सर्वोच्च अदालत में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राणे ने एक याचिका दायर की थी। जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने का मांग की गई थी।
ये है मामला
राणे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने बीएमसी के नोटिस को रद्द करने की मांग की थी। राणे ने याचिका में बीएमसी की तरफ से दिए गए नोटिस को अवैध और मूल अधिकारों का उल्लंघन बताया था। नोटिस में बंगले के भूतल और सातवीं मंजिल पर बिना अनुमति अनधिकृत तौर पर बदलाव किए जाने का उल्लेख किया गया। राणे के वकील अमोघ सिंह ने जस्टिस ए सैयद की पीठ के समक्ष याचिका पर शीघ्र सुनवाई की अपील की। जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण को लेकर बीएमसी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।












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