राष्ट्रगान पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में 5 अहम सवाल, पढ़िए जवाब

राष्ट्रगान पर संविधान और कानून में क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब क्या बदला है? जानिए पांच अहम सवालों के जवाब।

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में देश के हर सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजाने और इसके सम्मान में लोगों के खड़े होने को अनिवार्य कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले की काफी आलोचना हो रही है। आइए जानते हैं कि इस मुद्दे से जुड़े पांच अहम सवाल और उसके जवाब।

पहला सवाल - राष्ट्रगान पर संविधान में क्या कानूनी प्रावधान हैं?

पहला सवाल - राष्ट्रगान पर संविधान में क्या कानूनी प्रावधान हैं?

संविधान की धारा 51-A (a) के अनुसार, संविधान, इसके आदर्शों और संस्थाओं, तिरंगा व राष्ट्रगान का सम्मान करना देश के हर नागरिक का कर्तव्य है। 1971 के प्रीवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट के सेक्शन 3 के अनुसार, जानबूझकर अगर कोई, राष्ट्रगान को गाने से किसी को रोकता है या फिर राष्ट्रगान के समय किसी सभा में बाधा उत्पन्न करता है तो ऐसा करना अपराध माना जाएगा और इसके लिए दंडित किया जाएगा। इसके लिए तीन साल तक की सजा के साथ जुर्माना लगाया जा सकता है।

दूसरा सवाल - क्या राष्ट्रगान के समय लोगों का खड़ा होना अनिवार्य है?

दूसरा सवाल - क्या राष्ट्रगान के समय लोगों का खड़ा होना अनिवार्य है?

संविधान की धारा 51-A (a), जिसमें राष्ट्रगान के बारे में प्रावधान है, उसे राज्य के नीति निर्देश तत्व के अंतर्गत संविधान के चौथे अध्याय में रखा गया है जिसका कानूनी तौर पर पालन के लिए नागरिकों को बाध्य नहीं किया जा सकता। ये सिर्फ गाइडेंस के तौर पर संविधान में दिए गए हैं।

वहीं 1971 का कानून उनके विरुद्ध बना है जो राष्ट्रगान गाने के समय बाधा उत्पन्न करते हैं। राष्ट्रगान के समय कोई खड़ा नहीं हुआ तो क्या होगा, इस बारे में सेक्शन 3 में कुछ भी नहीं कहा गया है।

तीसरा सवाल - राष्ट्रगान पर सरकार का क्या स्टैंड रहा है?

तीसरा सवाल - राष्ट्रगान पर सरकार का क्या स्टैंड रहा है?

5 जनवरी 2015 को सरकार ने राष्ट्रगान के बारे में एक आदेश जारी किया। इसके अनुसार, जब भी राष्ट्रगान बजाया जाए तो लोगों को सावधान की स्थिति में खड़ा होना चाहिए। अगर राष्ट्रगान किसी फिल्म या डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा हो तो लोगों का खड़ा होना अनिवार्य नहीं है क्योंकि इससे सिनेमा हॉल में दूसरों को देखने में बाधा होगी। इस बाधा की वजह से राष्ट्रगान के सम्मान से ज्यादा अवव्यस्था फैलेगी।

इस सरकारी आदेश के पहले हिस्से से ऐसा लग रहा है कि राष्ट्रगान के समय खड़े होने को अनिवार्य किया गया है जबकि दूसरे हिस्से में एक अपवाद की स्थिति रखी गई है। हलांकि, खड़े न होने की स्थिति में किसी भी प्रकार के दंड का प्रावधान इस आदेश में नहीं है।

चौथा सवाल - राष्ट्रगान पर सुप्रीम कोर्ट का क्या स्टैंड रहा है?

चौथा सवाल - राष्ट्रगान पर सुप्रीम कोर्ट का क्या स्टैंड रहा है?

1986 में केरल के एक स्कूल से तीन स्टूडेंट्स को निकाल दिया गया था क्योंकि राष्ट्रगान के समय वे खड़े तो हुए थे लेकिन उन्होंने गाने से इनकार कर दिया था। स्टूडेंट्स का कहना था कि उनका धर्म इस बात की इजाजत नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्कूल से तीनों बच्चों को वापस लेने को कहा था।

कोर्ट ने फैसले में कहा था कि अगर कोई राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा होता है लेकिन उसे नहीं गाता है तो यह राष्ट्रगान का अपमान नहीं समझा जाना चाहिए। कोर्ट ने इस बारे में कुछ भी नहीं कहा कि अगर कोई राष्ट्रगान के समय खड़ा नहीं होता है तो यह उसका अपमान होगा या नहीं?

पांचवा सवाल - बुधवार के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या बदला है?

पांचवा सवाल - बुधवार के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या बदला है?

बुधवार से पहले राष्ट्रगान के समय खड़े होने की अनिवार्यता के बारे में कोर्ट ने कोई फैसला नहीं दिया था, न ही इसके लिए कोई कानूनी प्रावधान था और न ही किसी प्रकार के सरकारी आदेश दिए गए थे।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अब राष्ट्रगान के समय सिनेमा हॉल में खड़े होने को अनिवार्य कर दिया है और इसका पालन करवाने के लिए प्रशासन को आदेश दिया है।

दूसरे देशों में कहां और कैसे होता है राष्ट्रगान का सम्मान?

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