बिलकिस बानो केस में दोषियों की समय से पहले रिहाई को लेकर SC का बड़ा फैसला, सुनवाई के लिए बनेगी नई बेंच

बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए नई बेंच का गठन करने के लिए तैयार हो गया है।

Supreme Court

Bilkis Bano Case: बिलकिस बानो मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 11 दोषियों को समय से पहले रिहा करने के मामले में बड़ी खबर सामने आई है। दोषियों की रिहाई को लेकर गुजरात सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर स्पेशल बेंच गठित करने पर सहमत हो गया है। पिछले महीने भी चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि वह इस मामले को उठाने के लिए एक विशेष बेंच का गठन करेंगे। इस बीच अब कोर्ट याचिकाओं पर सुनवाई के लिए नई बेंच बनाने के लिए तैयार हो गया है।

बिलकिस बानो की वकील ने किया ये बड़ा दावा
बिलकिस बानो की वकील शोभा गुप्ता का दावा है कि इस मामले का पहले भी 4 बार उल्लेख किया जा चुका है, लेकिन प्रारंभिक सुनवाई और नोटिस के लिए इसे अभी तक नहीं लिया गया है। इस मामले का पहली बार 30 नवंबर, 2022 को उल्लेख किया गया था, जिसके बाद इसे जस्टिस अजय रस्तोगी और बेला एन त्रिवेदी की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। हालांकि, न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

इसके बाद इस मामले का उल्लेख 14 दिसंबर, 2022 को किया गया था और इसे इस साल 2 जनवरी को अस्थायी रूप से सूचीबद्ध किया जाना था। 20 जनवरी को गुप्ता ने फिर से मामले का जिक्र किया लेकिन निर्धारित तारीखों यानी 24 जनवरी और 31 जनवरी को संविधान पीठ के बैठने के कारण इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। आखिर में 7 फरवरी को CJI याचिकाओं पर सुनवाई के लिए एक विशेष पीठ गठित करने पर सहमत हुए।

राज्य सरकार ने बताया क्यों रिहा किया गया दोषियों को
दरअसल, राज्य सरकार ने सभी ग्यारह दोषियों को 15 अगस्त, 2022 को रिहा कर दिया था। रिहा किए गए दोषियों के भव्य स्वागत के दृश्य सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गए, जिससे कई वर्गों में आक्रोश फैल गया। इस पृष्ठभूमि में दोषियों को दी गई राहत पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर की गईं। बिल्किस ने दोषियों की समय से पहले रिहाई को भी चुनौती दी। गुजरात सरकार ने हलफनामे में कोर्ट को बताया कि दोषियों के अच्छे व्यवहार और उनके द्वारा 14 साल की सजा पूरी होने को देखते हुए केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया।

दोषियों को समय से पहले किया गया था रिहा
दरअसल, 2002 के गोधरा कांड के दौरान बिलकिस बानो से दुष्कर्म और उसके परिवार के लोगों की हत्या के दोषियों को पिछले साल 15 अगस्त को समय से पहले जेल से रिहा कर दिया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया था। बिलकिस ने 2002 में उसके साथ हुए गैंगरेप के 11 दोषियों की रिहाई पर फिर से विचार करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दी थी, लेकिन सुप्रीन कोर्ट ने इस याचिका पर फिर से सुनवाई के लिए मना कर दिया था। इस बीच नई बेंच का गठन करने का ये फैसला न्याय की एक नई उम्मीद बन सकता है, साथ ही दोषियों की मु्श्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।

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