ED की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई को तैयार SC
नई दिल्ली, 22 अगस्त। पिछले कुछ समय समय से प्रवर्तन निदेशालय चर्चा में है। जिस तरह से कई शीर्ष नेताओं और अन्य के ठिकानों पर ईडी का छापा पड़ रहा है उसके खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है और इसे सरकारी मशीन करार दिया है। ईडी की बेजा ताकतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसपर फैसला सुनाते हुए ईडी की ताकतों को बरकरार रखा था। लेकिन अब एक बार फिर से इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर की गई है और सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि वह इसपर फिर से विचार करे। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना ने इस मामले में कोर्ट के फैसले को लेकर दायर की गई याचिका को लिस्ट करने पर हम विचार करेंगे।

बता दें कि पिछले महीने जुलाई माह में जस्टिस एएम खानविलकर ने ईडी की ताकतों को बरकरार रखा था और उन्होंने ईडी की ताकतों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। याचिका में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की सख्त धाराओं को चुनौती दी गई थी। इसमे कहा गया था कि इन्ही सख्त धाराओं का हवाला देकर ईडी अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल करती है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसी को गिरफ्तार करने की, छापा मारने की, जब्त करने की जो ताकत दी गई है वह संविधान के तहत वैद्य है। जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और सीटी रवि कुमार भी इस बेंच में शामिल थे।
पश्चिम बंगाल में स्कूल भर्ती घोटाले में प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को भी ईडी ने गिरफ्तार किया था। जिसपर टीएमसी के महासचिव कुणाल घोष ने आरोप लगाया था कि केंद्र की भाजपा सरकार सीबीआई और ईडी का अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए इस्तेमाल कर रही है। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस शिवसेना समेत कई दल ईडी को लेकर केंद्र पर हमला बोल चुके हैं। पश्चिम बंगाल में नवाब मलिक, संजय राउत के खिलाफ ईडी ने कार्रवाई की जिसके चलते दोनों जेल में बंद हैं।












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