SBI ने रघुराम राजन के 'हिंदू विकास दर' के पूर्वानुमान को किया खारिज, बताया 'पक्षपाती और दुर्भावनापूर्ण'
एसबीआई ने अपनी इकोरैप रिपोर्ट में बताया गया कि, यह तर्क पूरी तरह से गलत है कि भारत 'हिंदू विकास दर' की ओर बढ़ रहा है। साथ ही इस बयान को रिपोर्ट में दुर्भावनापूर्ण, पक्षपाती और गलत बताया है।

Delhi: एसबीआई ने अपनी इकोरैप रिपोर्ट (Ecowrap report) में कहा कि यह तर्क पूरी तरह से गलत है कि भारत 'हिंदू विकास दर' (Hindu rate of growth) की ओर बढ़ रहा है। साथ ही इसके दुर्भावनापूर्ण, पक्षपाती और बताया है। रिपोर्ट में कह गया कि, बचत और निवेश पर संबंधित डेटा के खिलाफ तुलना करना पूरी तरह से गलत है।
अर्थशास्त्री राज कृष्ण द्वारा गढ़ा गया 'हिंदू विकास दर' शब्द
दरअसल, 'हिंदू विकास दर' शब्द को साल 1078 में अर्थशास्त्री राज कृष्ण द्वारा गढ़ा गया था, जिसके जरिए 1947-1980 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद के संदर्भ में लगभग 3.5-4.0 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि को दर्शाया था। भारत की तिमाही अनुक्रमिक Y-o-Y GDP वृद्धि FY23 में गिरावट की प्रवृत्ति में रही है। चुनिंदा तिमाहियों में यह तर्क दिया गया है कि भारत, राज कृष्ण की विकास दर (3.5-4 प्रतिशत) की ओर जा रहा है, जो 1947- 1980 की अवधि में वृद्धि को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया कि, 'हम बचत और निवेश के आंकड़ों के खिलाफ संख्याओं की तुलना करते समय तर्क को गलत, पक्षपाती पाते हैं।'
पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के बयान पर आई एसबीआई की रिपोर्ट
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट (SBI Research) भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के बयान पर आई है, जिन्होंने मीडिया को बताया था कि भारत की आर्थिक वृद्धि राज कृष्ण की 'विकास की हिंदू दर' शब्द के करीब है। इसके अलावा, एसबीआई रिसर्च ने तर्क दिया कि ग्रॉस कैपिटल फॉर्मेशन (GCF) में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की संस्थागत हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2012 से जीडीपी के क्रमशः लगभग 10 प्रतिशत और 34 प्रतिशत पर स्थिर रही है।
11.8 प्रतिशत पर पहुंचा ग्रॉस कैपिटल फॉर्मेशन
विश्व बैंक के अनुसार, ग्रॉस कैपिटल फॉर्मेशन में अर्थव्यवस्था की अचल संपत्तियों के अतिरिक्त निवेश और मालसूची के स्तर में शुद्ध परिवर्तन शामिल हैं। सरकार द्वारा ग्रॉस कैपिटल फॉर्मेशन 2021-22 में 11.8 प्रतिशत के उच्च स्तर को छू गया, जो 2020-21 में 10.7 प्रतिशत था। एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी क्षेत्र के निवेश पर भी इसका प्रभाव पड़ा है, जो इसी अवधि में 10 प्रतिशत से बढ़कर 10.8 प्रतिशत हो गया।
घरेलू बचत में महामारी के दौरान तेजी से वृद्धि हुई- रिपोर्ट
इसके अलावा, यह तर्क दिया गया कि जमा जैसी वित्तीय बचत में तेज अभिवृद्धि के कारण भारत में घरेलू बचत में महामारी के दौरान तेजी से वृद्धि हुई। जबकि तब से घरेलू वित्तीय बचत 2020-21 में 15.4 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 11.1 प्रतिशत हो गई है, भौतिक संपत्ति में बचत 2021-22 में तेजी से बढ़कर 11.8 प्रतिशत हो गई है, जो 2020-21 में 10.7 प्रतिशत थी।
एसबीआई रिसर्च द्वारा प्रथम दृष्टया एक विश्लेषण से पता चला है कि वृद्धिशील पूंजी उत्पादन अनुपात (ICOR), जो उत्पादन की एक अतिरिक्त इकाई का उत्पादन करने के लिए आवश्यक पूंजी निवेश की अतिरिक्त इकाइयों को मापता है, उसमें सुधार हो रहा है। साथ ही बताया गया कि ICOR जो FY12 में 7.5 था वो अब अब FY22 में केवल 3.5 है, जिसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि उत्पादन की अगली इकाई के लिए अब केवल आधी पूंजी की आवश्यकता है।












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