सबसे बड़े कोरपोरेट घोटाले का गुनहगार कौन? फैसला कल
दिल्ली(विवेक शुक्ला) स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े और चर्चित सत्यम घोटाले पर गुरुवार 9 अप्रैल को कोर्ट का फैसला सुना दिया जाएगा। इसके साथ ही पता चल जाएगा कि कभी देश की प्रमुख आई टी कंपनी सत्यम कम्प्यूटर सर्विसेज लिमिटेड (एससीएसएल) में हुए घोटाले के लिए कौन जिम्मेदार थे।

हिल गया था देश
इस केस ने सारे देश को हिला कर रखा दिया था। घोटाले के बाद सत्यम को महिन्द्रा समूह ने अधिग्रहित किया था। कोरपोरेट मामलों के जानकार मानते हैं कि भारत में सत्यम जैसा बड़ा कारपोरेट घोटाला कोई नहीं हुआ।
सत्यम केस से जुड़ी अहम बातें।
- सत्यम के संस्थापक बी. रामलिंगा राजू ने सात जनवरी 2009 को अकाउंट में गड़बड़ी करके करोड़ों रूपए का मुनाफा कमाने की बात मानी।
- सत्यम केस के मुख्य आरोपी बी. रामलिंग राजू उनके छोटे भाई और कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक बी. राम राजू हैं।
- सत्यम में घोटाला 10 करोड़ रुपये के एडजेस्टमेंट के साथ शुरू हुआ लगातार चलता रहा। सत्यम ने अपने ग्राहकों से बिक्री रसीद को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।
- सत्यम के मालिक रामलिंग राजू ने अचल संपत्ति में मोटा पैसा लगाना शुरू कर दिया था। इससे भी कुछ लोगों को शक हुआ कि वे आईटी बिजनेस में ध्यान क्यों नहीं दे रहे।
- राजू को 7 जनवरी 2009 को उस समय गिरफ्तार किया गया था जब उनकी कंपनी में लगभग 8,000 करोड़ रूपए का घपला सामने आया था।
- राजू ने सत्यम के अध्यक्ष के पद से ये कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि उन्होंने कंपनी को डूबने से बचाने के लिए खातों में हेराफेरी की।
- राजू को नवंबर 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर छोड़ दिया था।
- सत्यम घोटाले का सामने आने पर प्रवर्तन निदेशालय ने राजू और उनके परिवार की 34 जायदादों को ज़ब्त किया।












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