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शशिकला: जयललिता की वफ़ादार साथी से लेकर एआईएडीएमके से निकाले जाने तक

शशिकला
Getty Images
शशिकला

शशिकला ने अपनी ज़िंदगी में अब तक कई मोड़ देखे हैं. उनकी ज़िंदगी उतार-चढ़ाव से भरपूर रही है. उन्होंने एक औसत गृहिणी से शुरुआत की थी और फिर वक्त के साथ तमिलनाडु की सबसे ताकतवर महिलाओं में से एक की सहायिका बन गईं.

1984 में शशिकला विनोद वीडियो विजन नाम से एक वीडियो पार्लर चलाया करती थीं. यह दुकान चेन्नई के अलवरपेट में थी. उनके पति नटराजन सरकार में जनसंपर्क अधिकारी थे और उस वक्त कड्डलुर ज़िले में उनकी तैनाती थी. उस समय आईएएस अफसर चंद्रलेखा कड्डलुर ज़िले की कलक्टर हुआ करती थीं.

चंद्रलेखा के कहने पर ही विनोद वीडियो को उस मीटिंग को फिल्माने का मौका मिला था, जिसमें जयललिता बोल रही थीं. इसी असाइनमेंट के दौरान वीके शशिकला जयललिता से पहली बार मिली थीं. यह एक सामान्य मुलाकात लग सकती है लेकिन इसके बाद की घटनाएं सामान्य नहीं रहने वाली थीं.

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एमजीआर के निधन के बाद नज़दीकी बढ़ी

शशिकला का जन्म 1956 में हुआ था. जगह थी संयुक्त तंजौर ज़िले की तिरुतुरईपुंडी. पिता का नाम था विवेकानंदन और मां का नाम कृष्णावेणी. पांच साल की उम्र तक शशिकला वहीं रहीं. बाद में उनका परिवार मन्नरकुडी शिफ़्ट हो गया. उन्होंने सिर्फ़ दसवीं तक पढ़ाई की.

16 अक्टूबर 1973 को शशिकला की शादी एम नटराजन से हुई. यह शादी मन्नई नारायणस्वामी की मौजूदगी में हुई, जो तंजौर ज़िले के बेहद प्रभावशाली नेता थे. इस शादी में दोनों को आशीर्वाद देने तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि भी आए थे.

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जयललिता से मुलाकात के बाद शशिकला ने उनका विश्वास हासिल कर लिया और दिल्ली के दौरे में उनके साथ जाने लगीं. जयललिता उन दिनों राज्यसभा की सांसद थीं. मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन के निधन के बाद दोनों बेहद करीब आ गईं.

राजाजी हॉल में एम जी रामचंद्रन का शव रखा गया था और जयललिता अलग-थलग खड़ी थीं. नटराजन ने बाद में मीडिया को बताया कि जयललिता को एमजी का अंतिम दर्शन नहीं करने दिया गया. एमजी रामचंद्रन के परिवार के लोगों ने जयललिता को घेर रखा था ताकि उन्हें अन्नाद्रमुक नाराज़ गुट के लोगों से बचाया जा सके.

शशिकला का जयललिता के घर पोएस गार्डन में एंट्री

1988 से शशिकला जयललिता के आवास पोएस गार्ड में स्थायी रूप से रहने लगीं. पोएस गार्डन में रहने के दौरान जयललिता की निर्भरता लगातार शशिकला पर बढ़ती चली गई.

एमजीआर के निधन के बाद अन्नाद्रमुक दो हिस्सों में बंट चुकी थी. फरवरी, 1988 में जयललिता के गुट ने जनरल बॉडी मीटिंग बुलाई.

इस मीटिंग के दौरान सिर्फ़ वही लोग पदाधिकारी बनाए गए, जिन्हें शशिकला और उनके पति का वरदस्त प्राप्त था. यहां तक कि जिन लोगों ने जयललिता का शुरू से साथ दिया था उन्हें भी दरकिनार कर दिया गया. तो यह था शशिकला का जयललिता पर प्रभाव.

जयललिता अम्मा और शशिकला चिनम्मा

1991 में जब जयललिता पहली बार मुख्यमंत्री बनीं तो हर काम के लिए वह शशिकला से सलाह लिया करती थीं. इसी समय से जयललिता को लोग अम्मा और शशिकला को चिन्नमा कहने लगे थे. शशिकला जयललिता के साथ साये की तरह लगी रहती थीं. इसके साथ ही एआईएडीएमके में शशिकला के भाइयों और पति नटराजन का दबदबा बढ़ना शुरू हो गया था.

शशिकला पर जयललिता का विश्वास इतना बढ़ गया था कि उन्होंने उनके रिश्तेदार वीएन सुधाकरन को अपना दत्तक पुत्र बना लिया. जयललिता ने बेहद धूमधाम से सुधाकरन की शादी करवाई. यह दुनिया की सबसे खर्चीली शादियों में से एक मानी गई और इस वजह से गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इसकी एंट्री हुई.

इस दौरान शशिकला के रिश्तेदारों के रंग बदलने शुरू हुए और उनके दुर्व्यवहार की खबरें मीडिया में आने लगीं. लोगों की उनसे नाराज़गी बढ़ी. कई सीनियर मंत्रियों ने पार्टी से दूरी बनानी शुरू कर दी. कहा जाता है कि इन सबके पीछे शशिकला का हाथ था.

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शशिकला
AFP
शशिकला

1996 में जयलिलता चुनाव हार गईं. उन्हें अपनी सहेली शशिकला के साथ जेल जाना पड़ा. इस दौरान कुछ समय तक जयललिता शशिकला को नज़रअंदाज़ करने लगीं. लेकिन यह दूरी ज़्यादा देर नहीं टिकी.

एक बार फिर शशिकला का पोएस गार्डन हाउस में आना-जाना शुरू हो गया. इसके बाद का शशिकला का जादू जयललिता के सिर ऐसा चढ़ा कि पोएस गार्डन हाउस और पार्ट दोनों जगह उनके इशारे के बगैर पत्ता भी नहीं खड़कता था. जयललिता पर शशिकला का यह असर 2011 तक रहा.

जब अम्मा ने शशिकला को रिश्तेदारों समेत पार्टी से निकाला

जयललिता
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जयललिता

2011 में जयललिता एक बार फिर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं. इस दौरान उन्हें लगा कि शशिकला उनके ख़िलाफ़ साज़िश रच रही हैं. लिहाज़ा उन्होंने 19 दिसंबर 2011 को शशिकला और उनके परिवार के सभी सदस्यों को पार्टी से निकाल दिया.

शशिकला पोएस गार्डन से भी बाहर निकाल दी गईं. पति नटराजन समेत शशिकला के सभी रिश्तेदार- दिवाकरन, दिनाकरण, भास्करण, सुधाकरन, डॉ. वेंकटेशन, रामचंद्रन, रावनन और मोहन को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा गया.

लेकिन यह सब भी लंबा नहीं चला. तीन महीने बाद 28 मार्च, 2012 को शशिकला ने एक प्रेस रिलीज़ जारी किया. इसमें कहा गया कि उन्हें पार्टी में बनने रहने या सांसद, विधाक बनने में कोई दिलचस्पी नहीं हैं. वह सिर्फ जयललिता की सच्ची बहन बनी रहना चाहती हैं.

इस प्रेस रिलीज़ के जारी होने के बाद 31 मार्च को जयललिता ने सिर्फ़ शशिकला को पार्टी में एंट्री दी. और इसके बाद उनकी दोस्ती जयललिता की आख़िरी सांस तक चली.

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पार्टी को परदे के पीछे से चलाती थीं शशिकला

शशिकला और जयललिता दोनों को 2014 में आय से अधिक संपत्ति जमा करने के मामले में जेल हुई थी. शशिकला जयललिता की सहायिका और सबसे करीबी थीं. लेकिन वह जयललिता के रहते कभी भी पार्टी में आगे नहीं आईं. हालांकि पार्टी में कई बार अहम वक्त में फैसले लेती रहीं.

एआईएडीएमके में हर कोई यह जानता था कि उनका कद क्या है. चुनावों में जब पार्टी के उम्मीदवार उतारे जाते थे तब नेताओं को पार्टी में उनके कद का पता चलता था.

जब 2002 में जयललिता मुख्यमंत्री नहीं बन सकीं तब ओ. पन्नीरसेल्वम का नाम शशिकला की सलाह पर ही आगे लाया गया. इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद जितने भी चुनाव हुए उनमें उम्मीदवार चयन के मामले में शशिकला की ही चली. पार्टी में हर स्तर पर उनका दबदबा था.

2016 में जब जयललिता अस्पताल में भर्ती हुईं तब यह आरोप लगाया गया कि सिर्फ शशिकला और उनके परिवार वाले ही उनसे मिल सकते थे. इसके अलावा किसी को जयललिता से मिलने की इजाज़त नहीं थी. दिसंबर में जयललिता के निधन के बाद आधी रात को पन्रीरसेल्वम के नेतृत्व में सरकार को शपथ दिलाई गई. पन्रीरसेल्वम को शशिकला के कहने पर ही सीएम बनाया गया था.

जब तक जयललिता जीवित थीं तब तक शशिकला के रिश्तेदारों को तवज्जो नहीं मिली. लेकिन उनके निधन के बाद वे सभी राजाजी हॉल में आकर उनके शव के पास खड़े रहे. इस वजह से उनकी भारी निंदा हुई.

जल्दी ही शशिकला का असली मकसद ज़ाहिर हो गया. जब ओ. पन्नीरसेल्वम सीएम थे तो भी एआईएडीएमके के मंत्रियों का पोएस गार्डन में शशिकला के यहां आना-जाना लगा रहता था. वे मंत्री शशिकला को पार्टी की बागडोर थामने के लिए उकसाते रहते थे. इस बारे में कई वीडियो और तस्वीरें मीडिया में छाई रही थीं.

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जयललिता के बाद सत्ता हथियाने की कोशिश

जयललिता के निधन के कुछ दिनों बाद 10 दिसंबर को एक तमिल अखबार में एक पूरे पेज का विज्ञापन छपा.

इसमें लिखा था कि "अगर पुरुचि थलाइवी अम्मा को मालूम होता कि ज़िंदगी और मौत की लड़ाई में मौत जीत जाएगी तो वह इस दुनिया से विदा होने से पहले चिनम्मा को गद्दी पर बिठा जातीं."

इस विज्ञापन में किसी का नाम नहीं लिखा था. इसमें लिखा था- एक वफादार पार्टी कार्यकर्ता के अंत:करण की आवाज़.

लेकिन उसी दिन ओ. पन्नीरसेल्वम ने प्रेस रिलीज़ जारी कर कहा कि शशिकला पार्टी की जनरल सेक्रेट्री होंगी. पार्टी में सेना की तरह अनुशासन लाने के लिए यह ज़रूरी है. 29 जनवरी को पार्टी की जनरल बॉडी मीटिंग हुई और शशिकला अन्नाद्रमुक की सेक्रेट्री जनरल चुन ली गईं.

5 फ़रवरी, 2017 को ओ. पन्नीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. शशिकला ने तत्कालीन गवर्नर विद्यासागर राव से मुलाकात कर कहा कि पार्टी में बहुमत उनके पास है और उन्हें सरकार बनाने का लिए बुलाया जाए. लेकिन गवर्नर ने कोई फैसला नहीं लिया. और इस बीच, कोर्ट ने फरवरी में आय से अधिक संपत्ति इकट्ठा करने के मामले में उनके खिलाफ फैसला सुना दिया.

इस फैसले के मुताबिक शशिकला, इलावरासी और सुधाकरन जेल भेज दिए गए. इस तरह मुख्यमंत्री बनने की अपनी तैयारी से पहले ही शशिकला के राजनीतिक जीवन का अध्याय बंद हो गया.

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अब शशिकला क्या करेंगी?

शशिकला ने ऐलान किया कि ई.के पलानीस्वामी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री होंगे. उन्होंने जयललिता के स्मारक का दौरा किया, वहां कसम खाई और जेल चली गईं. उन्हें बेंगलुरू के प्रपन्न अग्रहार जेल में रखा गया.

शशिकला के जेल में रहने के दौरान उनके सभी रिश्तेदारों से पार्टी के बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. इस दौरान टीटीवी दिनाकरन ने एएमएमके नाम की पार्टी शुरू की. जबकि ई के पलानीस्वामी ने ऐलान किया कि जेल से बाहर आने के बाद शशिकला का पार्टी में स्वागत नहीं किया जाएगा. सरकार ने पोएस गार्डन को भी अपने कब्ज़े में ले लिया और इसे स्मारक स्थल में तब्दील कर दिया गया.

शशिकला बुधवार ( 27 जनवरी, 2021) को जेल से रिहा हो गईं. कोरोना संक्रमण की वजह से उन्हें बेंगलुरू के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वहां वह कुछ दिनों तक रहेंगी. रिहा होने के दिन ही जयललिता के स्मारक का उद्घाटन हुआ. अब देखना यह है कि चेन्नई आने के बाद वह अन्नाद्रमुक पर फिर से अपना प्रभाव कायम कर पाती हैं या नहीं.

यह मुद्दा बहस का विषय बना हुआ है. राज्य में विधानसभा चुनावों में कुछ ही महीने बाकी हैं. वो जो भी फैसला लेंगी इस पर न सिर्फ़ उनका बल्कि उनसे जुड़े तमाम लोगों का भविष्य टिका होगा.

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