संयुक्त किसान मोर्चा फिर आंदोलन की राह पर, MSP की कानूनी गारंटी के लिए बनाई ये रणनीति

नई दिल्ली/सोनीपत। एक साल से ज्यादा समय तक चला किसान आंदोलन इस मार्च के अंत से फिर उसी राह पर है। 30 से ज्यादा किसान संगठनों की अगुवाई वाले संयुक्त किसान मोर्चे ने आंदोलन की रणनीति को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में बैठक की है, जिसमें किसान आंदोलन दोबारा से शुरू करने का फैसला लिया गया है। किसान नेता डॉ. दर्शनपाल ने इस बारे में जानकारी दी।

ट्रैक्टर मार्च और भारत बंद की तैयारी

ट्रैक्टर मार्च और भारत बंद की तैयारी

किसान नेता डॉ. दर्शनपाल के मुताबिक, 2022 में इसी मार्च महीने से किसान देशभर में फिर से अपनी आवाज उठाएंगे। इसके लिए पहले 21 मार्च को रोष जताया जाएगा। उसके बाद बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ देश भर में प्रदर्शन करेंगे। इस क्रम में 25 मार्च को चंडीगढ़ से ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा। जिसमें मुख्य मांग एमएसपी की कानूनी गारंटी होगी। वहीं, देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में भी लखीमपुर कांड मामले पर सरकार के वादा पूरा ना करने के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा 21 मार्च को प्रदर्शन करेगा। किसान नेताओं ने इस बारे में ऐलान कर दिया है। साथ ही कहा है कि, किसान MSP को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू करने जा रहे हैं।

संगठनों की पंजाब में भी हुई बैठक

संगठनों की पंजाब में भी हुई बैठक

संयुक्त किसान मोर्चे के पदाधिकारियों ने विभिन्न किसान संगठनों को दिल्ली में हुई अपनी अहम बैठक में आमंत्रित किया। उससे पहले पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद मुल्लांपुर दाखा में किसान संगठनों की बैठक हुई। बताया जा रहा है कि, वहां कुछ संगठन आंदोलन जारी रखने के मूड में नहीं थे। वहां 11 संगठनों ने किनारा कर लिया। जबकि, बैठक में सभी 32 संगठनों को पहुंचने का संदेश भेजा गया था। उसमें से 18 संगठनों के नेता बैठक मे मौजूद रहे। 3 संगठनों ने फोन पर अपनी सहमति दे दी। 3 से 4 घंटे बैठक चली और कई मुद्दों पर किसान नेता जुबानी तौर पर भिड़ते रहे। माना जा रहा है कि, ऐसा पंजाब में सत्ता परिवर्तन और उसके बाद होने वाले नई सरकार के शपथ ग्रहण के चलते हुआ। कई किसान संगठनों को उम्मीद है कि, आम आदमी पार्टी की सरकार उनकी मांगें मान लेगी, इसलिए आंदोलन करने की जरूरत नहीं रह जाएगी।

टिकैत बोले- चलता रहेगा आंदोलन

टिकैत बोले- चलता रहेगा आंदोलन

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का बयान आया है। उन्होंने कहा कि, जो भी दल सत्ता में है, उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वो मांगें माने। लिहाजा, हमारी मांगें पूरी होने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।' उन्होंने कहा कि, अभी मैं यूपी चुनाव के बारे में बात नहीं करना चाहता। वो सब खत्म हो गया, लेकिन हमारा आंदोलन शत-प्रतिशत जारी रहेगा। मैं संयुक्त किसान मोर्चे के साथ हूं।" हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चे के सामने अब कठिन चुनौती है। संगठन के निर्णय लेने वाले पैनल के एक सदस्य ने कहा कि किसानों के लक्ष्य केवल एक चुनाव के बारे में नहीं थे, हालांकि किसान मोर्चा ने यूपी में भाजपा को हराने के लिए व्यापक रूप से प्रचार किया। फिर भी भाजपा पूरे बहुमत से चुनाव जीती। अब इससे आंदोलन पर असर तो पड़ेगा। हालांकि, आपसी सहमति की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।'

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