Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Sanjay Kapur से अनिल अंबानी तक: भारत के कारोबारी 'कुबेरों' में सत्ता-संपत्ति और ताकत की जंग

Sanjay Kapur Anil Ambani Family Battle: भारत के बड़े कारोबारी घरानों में धन और सत्ता की जंग कोई नई कहानी नहीं है। जहां रिश्ते नाजुक धागों की तरह टूटते हैं, वहां करोड़ों की विरासत और बोर्डरूम की कुर्सी के लिए तिकड़म और तकरार का खेल चलता है।

हाल ही में संजय कपूर के परिवार में उभरा विवाद इसकी ताजा मिसाल है, लेकिन अंबानी, मोदी और अन्य कारोबारी परिवारों की कहानियां भी सत्ता और संपत्ति के लिए खींचतान की गाथा बयां करती हैं। ये झगड़े सिर्फ पैसे और नियंत्रण की लड़ाई नहीं, बल्कि विश्वासघात, महत्वाकांक्षा और टूटते रिश्तों की दास्तान हैं। आइए, इन चर्चित पारिवारिक विवादों की गहराई में उतरें....

Sanjay Kapur Anil Ambani Family Battle

Sanjay Kapur Family: सोना समूह पर सास-बहू की जंग

सोना कॉमस्टार, एक 30,000 करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य, जो कृषि, कपड़ा, निर्माण, आईटी, शिक्षा और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है, आज सत्ता की लड़ाई का अखाड़ा बना हुआ है। इसकी शुरुआत 1997 में सुरिंदर कपूर ने की थी, और 2015 में उनकी मृत्यु के बाद बेटे संजय कपूर ने प्रबंध निदेशक की कमान संभाली। लेकिन 12 जून 2025 को संजय की अचानक गोल्फ खेलते वक्त दिल का दौरा पड़ने से असामयिक मृत्यु के बाद परिवार में तूफान खड़ा हो गया।

संजय की मां रानी कपूर (Rani Kapur) ने 25 जुलाई 2025 को अपनी तीसरी बहू प्रिया सचदेव कपूर (Priya Sachdev Kapur) पर सनसनीखेज आरोप लगाए। रानी ने दावा किया कि प्रिया ने उन्हें एक कमरे में बंद कर कंपनी के दस्तावेजों पर जबरन हस्ताक्षर करवाए, ताकि सोना समूह और पारिवारिक विरासत पर कब्जा किया जा सके। रानी ने बहुसंख्यक शेयरधारक होने का दावा करते हुए कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) स्थगित करने की मांग की और कहा कि प्रिया की बोर्ड में गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में नियुक्ति में उनकी सहमति नहीं ली गई। जवाब में, कंपनी ने दावा किया कि रानी 2019 से शेयरधारक नहीं हैं। प्रिया ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया, लेकिन यह विवाद कपूर परिवार को सुर्खियों में ला चुका है। यह जंग न केवल संपत्ति की है, बल्कि परिवार के भीतर सत्ता और विश्वास की भी है।

अंबानी परिवार: धीरूभाई की विरासत और भाइयों का बवाल

रिलायंस साम्राज्य के संस्थापक धीरूभाई अंबानी की 2002 में बिना वसीयत मृत्यु ने भारत के सबसे चर्चित पारिवारिक विवाद को जन्म दिया। उनके बेटों-मुकेश और अनिल अंबानी-के बीच कंपनी के नियंत्रण और अरबों की संपत्ति को लेकर सालों तक खींचतान चली। आखिरकार, उनकी मां कोकिलाबेन ने 2005 में हस्तक्षेप कर रिलायंस को दो हिस्सों में बांट दिया- मुकेश को रिलायंस इंडस्ट्रीज और अनिल अंबानी (Anil Ambani) को रिलायंस कम्युनिकेशंस सहित अन्य कारोबार।

बंटवारे के बाद भी दोनों भाइयों की तल्खी खत्म नहीं हुई। दोनों ने कॉन्ट्रैक्ट्स, प्रोजेक्ट्स और बाजार में एक-दूसरे से टक्कर ली। 2018 में मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने अनिल की डूबती टेलीकॉम कंपनी को बचाने के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक की मदद दी, जिससे सुलह की उम्मीद जगी। लेकिन अनिल की मुश्किलें कम नहीं हुईं। 24 जुलाई 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़े 35 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई यस बैंक से 3,000 करोड़ रुपये के कथित लोन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत की गई। सीबीआई की दो FIR, सेबी, नेशनल हाउसिंग बैंक और नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) की जानकारियों के आधार पर यह रेड दिल्ली और मुंबई में हुई। अंबानी भाइयों की यह कहानी धन, सत्ता और टूटे रिश्तों की सबसे बड़ी मिसाल है, जो आज भी सुर्खियों में बनी हुई है।

मोदी परिवार: 11,000 करोड़ की विरासत पर कोर्टरूम ड्रामा

मोदी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन कृष्ण कुमार (केके) मोदी की 2 नवंबर 2019 को मृत्यु के बाद उनके परिवार में 11,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर जंग छिड़ गई। केके की वसीयत में उनकी पत्नी बीना, बेटों समीर और ललित, और बेटी चारु के बीच संपत्ति को बराबर बांटने की बात थी। लेकिन फरवरी 2024 में समीर ने अपनी मां बीना पर वसीयत की शर्तों का उल्लंघन और गॉडफ्रे फिलिप्स जैसे कारोबारों के गलत प्रबंधन का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया। उन्होंने पारिवारिक ट्रस्ट को भंग करने की मांग की।

शुरुआत में समीर और चारु ने बीना का साथ दिया, लेकिन इंडियन प्रीमियर लीग के संस्थापक ललित मोदी ने इसका विरोध किया। यह विवाद अब बीना बनाम समीर-ललित की शक्ल ले चुका है। गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरधारकों ने बीना का समर्थन किया और उन्हें बोर्ड से नहीं हटाया। लेकिन समीर और ललित ने अपनी मां को अपने शेयर सौंपने से इनकार कर दिया, जिससे यह जंग अभी भी कोर्ट में सुलग रही है।

क्यों भड़कती हैं ये जंगें?

  • उलझी वसीयत: धीरूभाई अंबानी जैसे कई कारोबारी बिना स्पष्ट वसीयत के दुनिया से चले गए, जिससे बंटवारे में उलझनें पैदा हुईं।
  • सत्ता की भूख: परिवार के सदस्य अक्सर कंपनी के बोर्ड और प्रभाव पर कब्जा जमाना चाहते हैं, जैसा कि कपूर और मोदी परिवारों में देखा गया।
  • सौतेले रिश्ते: दूसरी शादियां, सौतेले रिश्ते और ट्रस्टों की उलझनें, जैसे कपूर परिवार में सास-बहू का तनाव, विवाद को और हवा देती हैं।

सत्ता और संपत्ति का अनंत खेल

चाहे कपूर परिवार में सास-बहू की तनातनी हो, अंबानी भाइयों की सालों पुरानी दुश्मनी, या मोदी परिवार की कोर्टरूम जंग-ये कहानियां भारत के कारोबारी परिदृश्य में विरासत की जटिलताओं को उजागर करती हैं। ये विवाद सिर्फ धन और ताकत की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि विश्वास, महत्वाकांक्षा और टूटते पारिवारिक रिश्तों की कहानियां हैं। जैसे-जैसे ये जंगें बोर्डरूम, कोर्टरूम और सुर्खियों में सुलगती रहेंगी, यह साफ है कि भारत के 'कुबेरों' में सत्ता और संपत्ति का यह खेल अभी थमने वाला नहीं है।

ये भी पढ़ें- मौत के 21 दिन बाद भी बहन Mandhira को दिख रहे हैं Sunjay Kapur? क्यों कहा- 'वो मुझे देख रहे हैं?'

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+