2019 के बलात्कार मामले में आरोपों को लेकर समीर मोदी दिल्ली हवाई अड्डे पर गिरफ्तार
व्यवसायी और भगोड़े ललित मोदी के भाई समीर मोदी को 2019 के एक बलात्कार मामले में दिल्ली हवाई अड्डे पर गुरुवार को हिरासत में लिया गया, पुलिस रिपोर्टों के अनुसार। विदेशों से लौटने पर, समीर को नई फ्रेंड्स पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दर्ज एक प्राथमिकी के बाद हिरासत में लिया गया।

10 सितंबर को दर्ज प्राथमिकी में समीर पर 2019 से शिकायतकर्ता के साथ बार-बार बलात्कार करने और उसे धमकाने का आरोप लगाया गया है। महिला का आरोप है कि समीर फैशन और लाइफस्टाइल क्षेत्र में करियर के अवसर प्रदान करने के बहाने उसके पास आया था। उसने दावा किया कि उसने बाद में दिसंबर 2019 में नई फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित अपने आवास पर उस पर हमला किया।
शिकायतकर्ता ने आगे झूठे वादे करके लगातार उत्पीड़न और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है, जबकि समीर शादीशुदा है। उसने यह भी दावा किया है कि अगर उसने दुर्व्यवहार का खुलासा किया तो उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने पुष्टि की है कि जांच जारी है।
बचाव और प्रतिवाद
समीर के वकील, साकुरा एडवाइजरी के सिमरन सिंह का तर्क है कि आरोप झूठे हैं और पैसे ऐंठने के इरादे से लगाए गए हैं। सिंह के अनुसार, शिकायत दुर्भावनापूर्ण इरादों से गढ़े गए तथ्यों पर आधारित है। समीर की कानूनी टीम का दावा है कि उसे नई फ्रेंड्स कॉलोनी पुलिस द्वारा लुकआउट सर्कुलर के अनुरोध के कारण हिरासत में लिया गया था।
समीर को अदालत ने एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। उनके कानूनी प्रतिनिधियों का दावा है कि उन्होंने पहले 8 और 13 अगस्त को शिकायतकर्ता के खिलाफ जबरन वसूली और ब्लैकमेल करने की शिकायत दर्ज कराई थी। इन शिकायतों को कथित तौर पर व्हाट्सएप चैट द्वारा समर्थन दिया गया था, जहां शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये की मांग की थी।
पेशेवर पृष्ठभूमि
उनके {LinkedIn} प्रोफाइल के अनुसार, समीर मोदी मोदी एंटरप्राइजेज के प्रबंध निदेशक और मोदीकेयर फाउंडेशन और कलरबार कॉस्मेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक हैं। उनकी कानूनी टीम पुलिस द्वारा तथ्यों की पुष्टि किए बिना उन्हें गिरफ्तार करने में जल्दबाजी में की गई कार्रवाई की आलोचना करती है।
न्यायिक प्रक्रिया और गोपनीयता संबंधी चिंताएँ
समीर के वकील भारत की न्यायपालिका और जांच एजेंसियों में इस मामले को तुरंत सुलझाने का भरोसा व्यक्त करते हैं। वे न्यायिक कार्यवाही के निष्कर्ष तक इस संवेदनशील अवधि के दौरान परिवार की गोपनीयता का सम्मान करने का आग्रह करते हैं।
With inputs from PTI












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