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Sajjan Kumar Caste: 1984 सिख दंगों में बरी हुए सज्जन कुमार किस जाति से हैं? असली सच आया सामने

Sajjan Kumar Caste: दिल्ली की राजनीति में कभी 'अजेय' माने जाने वाले पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) को आज राउज एवेन्यू कोर्ट ने जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा मामले में बरी कर दिया है। 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े इस मामले में अदालत ने सबूतों के अभाव को मुख्य आधार बनाया।

हालांकि, यह राहत उन्हें जेल की सलाखों से बाहर नहीं ला पाएगी, क्योंकि वे अन्य मामलों में पहले से ही उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। यह फैसला न केवल एक कानूनी मोड़ है, बल्कि उस दौर की याद दिलाता है जब दिल्ली की 'जाट राजनीति' में सज्जन कुमार का नाम सत्ता के शीर्ष पर हुआ करता था।

Sajjan Kumar Caste

सज्जन कुमार, जाट राजनीति का बड़ा चेहरा

सज्जन कुमार (Sajjan Kumar former Congress Leader) दिल्ली के जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और उन्हें कांग्रेस के सबसे कद्दावर जाट नेताओं में गिना जाता था। उनका जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली के एक जाट परिवार में हुआ था। दिल्ली की 'बाहरी दिल्ली' लोकसभा सीट, जहां जाट मतदाताओं का भारी प्रभाव है, वहां सज्जन कुमार का सिक्का चलता था।

ये भी पढ़ें: Sajjan Kumar: 1984 दंगों के जनकपुरी मामले में कोर्ट से राहत, पर क्या जेल से बाहर आ पाएंगे पूर्व कांग्रेस नेता?

उन्होंने न केवल इस समुदाय को कांग्रेस के पक्ष में एकजुट किया, बल्कि चौधरी साहिब सिंह वर्मा जैसे दिग्गज जाट नेताओं के सामने अपनी एक मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई। ग्रामीण दिल्ली और अनधिकृत कॉलोनियों में उनके जातीय प्रभाव के कारण ही कांग्रेस ने दंगों के गंभीर आरोपों के बावजूद दशकों तक उन्हें संरक्षण दिया।

Sajjan Kumar: चाय की दुकान से संसद तक का सफर

सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 70 के दशक में दिल्ली के आनंद पर्वत इलाके में एक साधारण चाय की दुकान चलाने वाले सज्जन कुमार ने अपनी संगठनात्मक क्षमता से संजय गांधी का दिल जीता था।

संजय गांधी के करीबी: उनकी जमीनी पकड़ ने उन्हें गांधी परिवार का वफादार बना दिया।

ऐतिहासिक जीत: 1980 में उन्होंने बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट पर दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश को हराकर सबको चौंका दिया। यहीं से सज्जन के 'पावर हाउस' बनने की शुरुआत हुई।

1984 का काला अध्याय और आज का फैसला

सज्जन कुमार का शानदार करियर 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पूरी तरह बदल गया। उन पर सुल्तानपुरी और राज नगर जैसे इलाकों में भीड़ को उकसाने और सिखों के नरसंहार की साजिश रचने के गंभीर आरोप लगे।

22 जनवरी 2026 को कोर्ट ने किया बरी: विशेष जज दिग विनय सिंह ने सज्जन कुमार को जनकपुरी और विकासपुरी में हुई हिंसा (जिसमें सोहन सिंह, अवतार सिंह और गुरचरण सिंह की मौत हुई थी) से जुड़े मामले में बरी किया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनकी संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त और पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सका।

1984 Delhi Riots: क्या है पूरा मामला?

2015 SIT जांच: इस मामले की जांच 2015 में केंद्र सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने नए सिरे से शुरू की थी।

2018 की ऐतिहासिक सजा: दिल्ली हाईकोर्ट ने राज नगर मामले में उन्हें 'मानवता के खिलाफ अपराध' का दोषी मानते हुए उम्रकैद सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें राजनीति छोड़नी पड़ी और वे जेल गए।

अन्य सजाएं: फरवरी 2024 में भी सरस्वती विहार मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसके कारण आज बरी होने के बावजूद वे जेल में ही रहेंगे।

Sajjan Kumar: जातीय प्रभाव और पतन की दास्तान

सज्जन कुमार की असली ताकत उनकी 'जाट नेता' की छवि थी, जिसके कारण कांग्रेस ने दशकों तक उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया। 2009 में भी उन्हें लोकसभा का टिकट दिया गया था, लेकिन सिख समुदाय के भारी विरोध और गृह मंत्री पर जूता फेंके जाने की घटना के बाद कांग्रेस को उनका टिकट काटना पड़ा।

आज भले ही वो एक केस में बरी हुए हों, लेकिन 1984 के दंगों का साया उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन पर हमेशा के लिए एक अमिट दाग बन चुका है। पीड़ित परिवारों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है।

ये भी पढ़ें: '10 अपनों को खोया, सज्जन को फांसी क्यों नहीं?',पूर्व कांग्रेस नेता के बरी होने पर फूट-फूट कर रोए पीड़ित परिवार

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