रूस-यूक्रेन युद्ध: भारतीय सेना को मिला बड़ा सबक, भविष्य में इस बदलाव की तैयारी
नई दिल्ली, 8 अप्रैल: यूक्रेन पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आदेश पर हमला शुरू हुए करीब 46 दिन गुजर चुके हैं। लेकिन, दुनिया की दूसरी सबसे शक्तिशाली मानी जाने वाली रूसी सेना को फिर भी उम्मीदों के मुताबिक कामयाबी नहीं मिल पाई है। पुतिन सरकार खुद मान रही है कि उसकी सेना को बहुत ज्यादा नुकसान हो चुका है। लेकिन, अभी भी यह तय नहीं है कि पुतिन कब युद्ध जीतने की घोषणा करेंगे या फिर कब उन्हें युद्ध विराम का विकल्प चुनना होगा। यूक्रेन में रूस की ताकतवर सेना को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, उसने भारतीय सेना को भी नए सिरे से अपनी तैयारी के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध: भारतीय सेना को मिला बड़ा सबक
रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग में बख्तबंद वाहनों और टैंकों के खिलाफ एंटी-टैंक मिसाइलों को बड़ी सफलता मिली है। इससे सबक लेते हुए भारतीय सेना अपने भविष्य के मुख्य युद्धक टैंकों को नए सिरे से डिजाइन करेगी। दरअसल, यूक्रेन के वॉर जोन से जो सूचनाएं मिल रही हैं, उससे लग रहा है कि रूसी बख्तबंद वाहनों की कमजोरियों को पकड़कर यूक्रेन ने एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों का जबर्दस्त इस्तेमाल किया है और उसमें उसे अप्रत्याशित कामयाबी भी मिली है। भारतीय वायु सेना वहां चल रही इस लड़ाई पर नजदीकी नजर रख रही है, क्योंकि वहां टैंकों समेत जो हथियार और सैन्य उपकरणों का उपयोग हो रहा है, वे यहां इस्तेमाल होने वाले हथियारों की ही तरह हैं।

नए सिरे से डिजाइन की जाएगी युद्धक टैंक
सरकारी सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा है कि यूक्रेन की जंग के मैदान से जो इनपुट मिल रहे हैं, उसका विश्लेषण किया जा रहा है और उसका इस्तेमाल भविष्य के बैटल टैंकों को डिजाइन करते समय ध्यान में रखा जाएगा, जिसका भविष्य में उत्पादन किया जाएगा; और आने वाले वर्षों में भारतीय सेना उसका इस्तेमाल करेगी। इंडियन आर्मी रूसी बख्तरबंद सैन्य वाहनों की सबसे बड़ी उपयोगकर्ता है। इसमें टी-90, टी-72 और बीएमपी सीरीज की इंफेंट्री कॉम्बैट वाहन भी शामिल हैं, जो कि सेना के मुख्य आधार हैं। शुरू में भारतीय सेना इन टैंकों को पाकिस्तान से सटी सीमा पर रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में तैनात करती थी। लेकिन, अब यह लद्दाख से लेकर सिक्कम तक एलएसी पर बड़ी तादाद में देश की रक्षा करने के लिए डटे हुए हैं।

यूक्रेन में बड़े पैमाने पर दफन हुई हैं रूसी टैंक
यूक्रेन पर रूसी हमले के करीब 46 दिन गुजर चुके हैं। इस दौरान यूरोप और उत्तरी अमेरिका के सहयोगी देश यूक्रेन को एंटी-टैंक और एंटी-एयरक्राफ्ट उपकरणों की सप्लाई कर रहे हैं, जिनमें कार्ल गुस्ताफ एंटी-टैंक, रॉकेट लॉन्चर, एनएलएडब्ल्यू और एटी-4एस शामिल हैं; और यूक्रेन के शहरों में रूसी टैंकों की जो कब्रगाह दिख रहे हैं, उसमें इन सबका बड़ा रोल माना जा सकता है।

4 दशक पुरानी पड़ चुकी हैं टैंक की डिजाइन
सैन्य अभियानों से जुड़े रहे अफसरों ने बताया है कि टैंकों की डिजाइन कम से कम तीन से चार दशक पुरानी हो चुकी हैं, जबकि एंटी-टैंक मिसाइलें और रॉकेट नई जरूरतों के मुताबिक डिजाइन की गई हैं और मौजूदा परिस्थितियों में टैंकों पर भारी पड़ रही हैं। उन्होंने कहा है कि भारतीय डिजाइनर भविष्य में बनने वाले मुख्य युद्धक टैंकों में इस तरह के सुधार की कोशिश करेंगे, जो अब से कुछ साल बाद बनाए जाएंगे। (दूसरी और अंतिम तस्वीर-प्रतीकात्मक)












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