यूक्रेन में घायल छात्र हरजोत के इलाज का खर्च उठाएगी सरकार, विदेश मंत्रालय ने कहा- वो युद्धक्षेत्र में फंसे हैं
नई दिल्ली, 04 मार्च: विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार यूक्रेन में फंसे अपने नागरिकों को लाने के लिए लगातार कोशिशें कर रही हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने शुक्रवार को बताया कि ऑपरेशन गंगा के तहत वो सारे लोग भारत पहुंच जाएंगे जो यूक्रेन से निकलकर पड़ोसी देशों में गए हैं। वहीं यूक्रेन में घायल छात्र हरजोत को लेकर उन्होंने कहा कि उनके इलाज का खर्च भारत सरकार उठाएगी, साथ ही उन्होंने बताया कि दूतावास के लोग अस्पताल में पहुंचकर उनसे मिलने की कोशिश कर रहे हैं।

यूक्रेन के कीव में गोली लगने के बाद एक अस्पताल में भर्ती भारतीय छात्र हरजोत सिंह पर बोलते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत सरकार हरजोत सिंह के इलाज का खर्च उठाएगी। हम उनकी मेडिकल स्थिति की जानकारी जुटाने में लगे हैं। हम उन तक पहुंचने की कोशिश में हैं लेकिन युद्ध प्रभावित क्षेत्र में होने के चलते उन तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हरजोत सिंह ने एक वीडियो के माध्यम से बताया है कि 27 तारीख को उनको गोली लगी थी। 27 फरवरी को हम तीन लोग कैब से जा रहे थे। एक चेक प्वांइट की तरफ बढ़े तो वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने हमें रोका और इसके बाद ये हादसा हुआ। अस्पताल से बोलते हुए हरजोत सिंह ने कहा, डॉक्टरों ने बताया कि आप 3-4 घंटे तक सड़क पर पड़े हुए थे। मेरा काफी खून बह गया था। इलाज के बाद अब मेरी तबीयत पहले से काफी अच्छी है लेकिन भारतीय दूतावास से अभी तक मुझे कोई सहायता नहीं मिली है।
अगले 24 घंटों में 16 फ्लाइट भारत पहुंचेंगी
विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने बताया है कि अगले 24 घंटों में 16 फ्लाइट भारत पहुंचेंगी। इसके बाद ऐसे सभी भारतीय भारत पहुंच जाएंगे जो यूक्रेन बॉर्डर पार करके पड़ोसी देशों में पहुंचे हैं। हालांकि कुछ लोग अभी भी यूक्रेन में हैं। जिनको देखते हुए हम आगे भी लगातार फ्लाइट शेड्यूल करते रहेंगे। हमारी पहली एडवाइजरी जारी होने के बाद 20,000 से अधिक भारतीय नागरिक यूक्रेन से भारत लौटे हैं। ऑपरेशन गंगा के तहत 48 उड़ानें अब तक यूक्रेन से लगभग 10,348 भारतीयों को लेकर भारत पहुंचीं हैं।
अरिंदम बागची ने बताया है कि पूर्वी यूक्रेन विशेष रूप से खार्किव और पिसोचिन पर उनका सबसे अधिक ध्यान है। हम वहां कुछ बसें लाने में कामयाब रहे हैं। हमने विशेष ट्रेनों के लिए यूक्रेन के अधिकारियों से अनुरोध किया था लेकिन उन्होंने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। इस बीच हम बसों की व्यवस्था कर रहे हैं। यूक्रेन से लोगों को निकालने में आ रही मुश्किलों पर उन्होंने कहा कि युद्धविराम के बिना यह आसान नहीं है। हम संबंधित पक्षों- यूक्रेन और रूस से आग्रह करते हैं कि कम से कम एक स्थानीय युद्धविराम हो, ताकि हम अपने लोगों को निकाल सकें।












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