OI Exclusive: कश्मीरी पत्रकार ने बताई रुबिया सईद के किडनैपिंग की कहानी, अपहरण के बाद आया था JKLF का फोन
OI Exclusive: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार, 1 दिसंबर 2025 को श्रीनगर से शाफत अहमद शांग्लू को गिरफ्तार कर लिया। शांग्लू, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के हाई-प्रोफाइल अपहरण मामले में 35 साल से फरार चल रहा था। CBI का कहना है कि उसे जल्द ही जम्मू की TADA अदालत में कानून के मुताबिक पेश किया जाएगा। इसी मामले पर कश्मीर के जाने-माने पत्रकार मेराजुद्दीन ने वनइंडिया से बातचीत की और बताया कि कैसे रुबिया सईद की किडनैपिंग हुई थी।
मुझे JKLF ने फोन किया था- पत्रकार
मेराजुद्दीन वनइंडिया को बताते हैं कि जब वह ऑफिस में थे उनके फोन की घंटी बजी। उन्होंने फोन उठाया तो दूसरी तरफ से एक शख्स बोला कि हमने रुबिया सईद को किडनैप कर लिया है। पत्रकार तब तक इस शब्द से उतने वाकिफ नहीं थे तो समझ नहीं सके। इसलिए उन्होंने दोबारा उस शख्स से पूछा- क्या कर लिया है?

वह शख्स बोला- हम JKLF की तरफ से बात कर रहे हैं। हमने इंडिया के गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी डॉ. रुबिया सईद को किडनैप कर लिया है। मेराजुद्दीन उन पहले पत्रकारों में से थे जिन्हें इस घटना की सबसे पहले जानकारी मिली थी। इसके बाद खबर बाहर आई तो दहशत फैल गई। बाद में किडनैपरों से डील कर रुबिया सईद को वापस लाया गया।
8 दिसंबर 1989: जब हुआ था रुबिया सईद का अपहरण
8 दिसंबर 1989 की शाम को रुबिया सईद का अपहरण किया गया था और वे 13 दिसंबर तक आतंकियों की कैद में रहीं। उनकी रिहाई के बदले JKLF के पांच आतंकियों को छोड़ा गया था-
• हामिद शेख
• अल्ताफ अहमद भट
• नूर मोहम्मद कलवाल
• जावेद अहमद जरगर
• शेर खान
यह मामला करीब तीन दशक तक ठंडे बस्ते में रहा, लेकिन जनवरी 2021 में इसे फिर से खोला गया।
यासीन मलिक ने कई आरोपियों के साथ रची थी साजिश
CBI के अनुसार, शांग्लू ने 1989 में Jammu & Kashmir Liberation Front (JKLF) के अध्यक्ष यासीन मलिक और दूसरों के साथ मिलकर अपहरण की प्लानिंग की थी। उस पर RPC (Ranbir Penal Code) और TADA (Terrorist and Disruptive Activities Act) की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है। सरकार ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा था।
2022 में रुबिया ने पहचाने अपने अपहरणकर्ता
2022 में डॉ. रुबिया सईद ने अदालत में यासीन मलिक (58 वर्ष) और तीन अन्य लोगों को पहचानते हुए कहा कि वही उनके अपहरणकर्ता थे। अदालत ने माना कि RPC और TADA की धाराओं के तहत आरोप तय करने के लिए काफी सबूत मौजूद हैं। CBI ने कई आरोपियों के इकबालिया बयान (confessions) भी पेश किए थे।
टेरर फंडिंग केस में पहले ही दोषी है मलिक
2022 में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने यासीन मलिक को टेरर फंडिंग केस में दोषी करार दिया था। उसे दो आजीवन कारावास (life sentences) और पांच अलग-अलग मामलों में 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। NIA ने इस मामले में उसके लिए फांसी की सजा (death penalty) की भी मांग की थी। मलिक 2019 में गिरफ्तार किया गया था और उसेके संगठन पर गृह मंत्रालय ने प्रतिबंध लगा दिया था। वो अभी भी अपने सभी मामलों में खुद अपनी पैरवी कर रहा है।
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