'हमारे घर का एक कमरा किसी ने हथिया लिया है उसे हमें वापस लेना है', RSS प्रमुख मोहन भागवत ने क्‍यों बोली ये बात

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मध्य प्रदेश के सतना में 'अखंड भारत' के अपने संकल्प को एक बार फिर दोहराया है। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "हम सभी एक हैं, सभी सनातनी और हिंदू हैं। भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि एक अंग्रेज ने आकर टूटे दर्पण का उदाहरण देकर हमें अलग कर दिया था।

सतना के बीटीआई ग्राउंड में आयोजित एक सभा में मोहन भागवत ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जब भी इतिहास ने हमें देखा, तो हमने हमेशा खुद को उन्नत स्वरूप में ही पाया। उन्होंने यह भी बताया कि हमारे ऋषि-मुनियों ने इस सत्य को बहुत पहले ही खोज लिया था और इसके आधार पर एक पूरे राष्ट्र का निर्माण किया था।

Mohan Bhagwat

आरएसएस प्रमुख ने सिंधियों का जिक्र करते हुए कहा कि वे अविभाजित भारत से आए थे, पाकिस्तान नहीं गए। उन्होंने कहा, "यह आदत नई पीढ़ी तक जानी चाहिए, क्योंकि हमारा एक घर है। परिस्थितिवश हमें उस घर से यहां आना पड़ा, क्योंकि वह घर और यह घर अलग नहीं है।"

हमारे घर का एक कमरा...

उन्होंने आगे कहा, "पूरा भारतवर्ष एक ही घर है, परंतु हमारे घर का एक कमरा, जिसमें मेरा टेबल, कुर्सी और कपड़े रहते थे, उसे किसी ने हथिया लिया। कल मुझे उसे वापस लेकर वहां फिर से अपना डेरा डालना है। इसलिए यह याद रखना होगा कि यह अविभाजित भारत है।"

भले ही कुछ लोग खुद को हिंदू न मानें, लेकिन...

मोहन भागवत ने कहा, "भाषा, वेशभूषा, भजन, भवन, भ्रमण और भोजन-ये सब हमें अपनी परंपरा के अनुसार ही चाहिए।" उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भले ही कुछ लोग खुद को हिंदू न मानें, लेकिन जब वे विदेश जाते हैं, तो दुनिया उन्हें हिंदी या हिंदवी कहकर ही पहचानती है।

उन्होंने बताया कि ऐसे लोग यह सुनकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं और पूरी कोशिश करते हैं कि उन्हें इस पहचान से न जोड़ा जाए। मोहन भागवत ने कहा, "लगातार ऐसा कहने के बावजूद, दुनिया आज भी हमें हिंदू कहती है। हमें इस सत्य को स्वीकार करना चाहिए और एक साथ रहना चाहिए।"

भाषा विवाद पर टिप्पणी करते हुए भागवत ने कहा कि भाषाएं अनेक हो सकती हैं, लेकिन उनका भाव एक ही होता है। उन्होंने बताया कि बहुत सारी भाषाएं मूल भाषा से ही निकली हैं और भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रभाषा हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि हर नागरिक को कम से कम तीन भाषाएं आनी चाहिए: घर की भाषा, राज्य की भाषा और राष्ट्र की भाषा।

गौरतलब है कि मोहन भागवत ने सतना में अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान रविवार को बाबा मेहर शाह दरबार की नवनिर्मित इमारत का उद्घाटन भी किया था।

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