Rohingya Muslims: जानिए रोहिंग्‍या मुसलमानों को वापस म्‍यांमार क्‍यों भेजना चाहता है भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी म्‍यांमार दौरे पर हैं। उनकी इस यात्रा के दो मकसद हैं। पहला- म्‍यांमार से अवैध तौर पर भारत में घुसे rohingya muslims को वापस भेजना और दूसरा- म्‍यांमार में चीन के प्रभाव को रोकना। म्‍यांमार की विदेश मंत्री और स्‍टेट काउंसलर आंग सान सू की के साथ बाचतीत में पीएम मोदी ने भारत आने के इच्छुक म्यांमार के सभी नागरिकों को फ्री वीजा देने का फैसला किया है। इसके अलावा भारत ने अपने यहां बंद म्यांमार के 40 कैदियों को भी छोड़ने की घोषणा की है, लेकिन रोहिंग्‍या मुसलमानों के मुद्दे पर पीएम मोदी ने कड़ा रुख अपनाया हुआ है। भारत लंबे समय से शरणार्थियों के लिए बेहद नरम रुख अपनाने वाला देश रहा है, लेकिन रोहिंग्‍या मुसलमानों पर उसका रुख बेहद कड़ा है। जानिए आखिर ऐसे कौन से कारण हैं, जिनकी वजह से पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

Rohingya Muslims: जानिए रोहिंग्‍या मुसलमानों को वापस म्‍यांमार क्‍यों भेजना चाहता है भारत

 पीएम मोदी के म्‍यांमार दौरे के बीच किरण रिजिजू ने दिया बेहद सख्‍त बयान

पीएम मोदी के म्‍यांमार दौरे के बीच किरण रिजिजू ने दिया बेहद सख्‍त बयान

केंद्रीय गृहराज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत में नहीं रहने दिया जा सकता। भारत रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। रिजिजू ने कहा, 'मैं अंतरराष्ट्रीय संगठनों से कहना चाहता हूं कि चाहे ​रोहिंग्या संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के तहत पंजीकृत हों या नहीं, लेकिन वे भारत में अवैध अप्रवासी हैं। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार उन्हें देश से निकाला जाना है।

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    ये हैं वो कारण जिनके चलते मोदी सरकार अपना रही कड़ा रुख

    ये हैं वो कारण जिनके चलते मोदी सरकार अपना रही कड़ा रुख

    1- रोहिंग्‍या शरणार्थियों के टेरर लिंक से जुड़े इनपुट भारत सरकार के पास लगातार आ रहे हैं
    2- रोहिंग्‍या शरणार्थी भारतीय नागरिकों के अधिकार पर अतिक्रमण कर रहे हैं, जबकि वे वैध तौर पर भारत में नहीं आए।
    3- रोहिंग्या शरणार्थियों की वजह से सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
    4-रोहिंग्‍या मुसलमानों को वापस भेजने के पीछे एक तर्क यह भी है कि इनके रहने से भारत में डेमोग्राफिक पैटर्न खराब हो जाएगा।

    ये हैं वो कारण जिनके चलते मोदी सरकार अपना रही कड़ा रुख

    ये हैं वो कारण जिनके चलते मोदी सरकार अपना रही कड़ा रुख

    1- रोहिंग्‍या शरणार्थियों के टेरर लिंक से जुड़े इनपुट भारत सरकार के पास लगातार आ रहे हैं
    2- रोहिंग्‍या शरणार्थी भारतीय नागरिकों के अधिकार पर अतिक्रमण कर रहे हैं, जबकि वे वैध तौर पर भारत में नहीं आए।
    3- रोहिंग्या शरणार्थियों की वजह से सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
    4-रोहिंग्‍या मुसलमानों को वापस भेजने के पीछे एक तर्क यह भी है कि इनके रहने से भारत में डेमोग्राफिक पैटर्न खराब हो जाएगा।

    कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान

    कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान

    म्यांमार में बौद्ध आबादी बहुसंख्यक है वहीं करीब 11 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं। इनके बारे कहा जाता है कि इनमें मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं और ये कई सालों से वहां रह रहे हैं। म्यांमार की सरकार ने उन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। पिछले पांच-छह सालों से वहां सांप्रदायितक हिंसा देखने को मिल रही है। इसके अलावा लाखों लोग बांग्लादेश में आ गए हैं। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों को बड़े पैमाने पर भेदभाव और दुर्व्यवार का सामना करना पड़ रहा है।

    क्‍यों हो रही है म्‍यांमार में हिंसा

    क्‍यों हो रही है म्‍यांमार में हिंसा

    म्यांमार में बड़ी संख्या के रोहिंग्या मुसलमान जर्जर कैंपो में रह रहे हैं। उनकी हालत बहुत खराब है, उन्हें भेदभाव और दुर्व्यवार का सामना करना पड़ रहा है।

    कब शुरू हुई म्‍यांमार में हिंसा

    कब शुरू हुई म्‍यांमार में हिंसा

    म्यांमार में साल 2012 से हिंसा हो रही है,लेकिन 25 अगस्त को म्यांमार में मौंगडोव सीमा पर कुछ पुलिस वालों की मौत हो गई, जिसके बाद वहां की सरकार ने व्यापक ऑपरेशन शुरू किया। कहा जा रहा है कि अभी तक 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। म्यांमार की सेना पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप भी लग रहे हैं। म्यांमार में हुई इस हिंसा के लिए कई मुस्लिम देशों ने म्यांमार सरकार से बातचीत की है। इंडोनेशियाई विदेश मंत्री ने म्यांमार की सरकार से इस लड़ाई को रोकने के लिए बात की थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हिंसा 25 अगस्त को शुरू हुई थी, जिसमें रोहिंग्या मुस्लिमों ने दर्जनों पुलिस वालों पर हमला कर दिया। इस लड़ाई में कई पुलिस वाले घायल हुए, इस हिंसा से म्यांमार के हालात और भी खराब हो गए।

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