Rohingya Crisis: 'मेरे सामने ही मेरी बेटी के साथ चार सैनिकों ने गैंगरेप किया'

नई दिल्ली। म्यांमार में सेना की ज्यादतियों से बचकर पड़ोसी देशों में शरण के लिए पहुंच रहे रोहिंग्या मुसलमान इस समय दुनियाभर में चर्चा में है। रोहिंग्या सबसे ज्यादा बांग्लादेश में शरण ले रहे हैं, वहीं भारत में भी काफी लोग पहुंचे हैं। ये लोग बेहद खराब हालत में किसी तरह से म्यांमार छोड़ रहे हैं। वहां से आने के बाद सेना की जिन करतूतों के बारे में ये शरणार्थी बता रहे हैं, वो सन्न करने वाली है।

rohingya crisis: 'मेरे आंखों से सामने मेरी बेटी के साथ चार सैनिकों ने रेप किया'

'रेप कया फिर मेरी बेटी की जांघ मे गर्म चाकू घुसा दिया'

'रेप कया फिर मेरी बेटी की जांघ मे गर्म चाकू घुसा दिया'

म्यांमार के रखाइन प्रांत से आ रहे रोहिंग्या शरणार्थी सेना के जुल्म की बात जब सुनाते हैं तो रोने लगते हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट में मोहम्मद कासिम नाम के शरणार्थी बताते हैं कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपनी बेटी से गैंगरेप होते देखा है। 40 साल के कासिम कहते हैं 'मेरी बेटी के साथ म्यामांर की सेना के चार जवानों ने रेप किया, ये सब मेरे सामने हुआ लेकिन कुछ ना कर सका। मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की तो बेटी की जांघ में गर्म चाकू घुसा दिया और उसकी हत्या कर दी।'

बीवी-बच्चों के बारे में पूछने पर रो दिए कासिम

बीवी-बच्चों के बारे में पूछने पर रो दिए कासिम

किसी तरह से बांग्लादेश पहुंचे कासिम से जब उनके परिवार के बारे में पूछा गया तो वो रोने लगे और कहा 'नहीं पता कौन कहां है, कोई जिंदा भी है या नहीं।' कासिम कहते हैं 'परिवार था, अपना घर था, बीवी-बच्चे थे, एक कार थी, लेकिन अब रोटी के लिए भी किसी की मदद का इंतजार है।' वो कहते हैं कि अब तो बस किसी तरह से जान बचाने की पड़ी है।

बांग्लादेश सरकार ने किया मदद का वादा

बांग्लादेश सरकार ने किया मदद का वादा

म्यांमार से आ रहे रोहिंग्याओं को बांग्लादेश सरकार ने शरण देने की बात कही है। बांग्लादेश में सात लाख से ज्यादा रोहिंग्या पहुंचे हैं। वहीं भारत में भी 40,000 से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमानों ने शरण ली है, हालांकि भारत सरकार ने इनको वापस भेजने की बात कही है। वहीं मानवाधिकार आयोग और भारत के कई संगठनों ने इनको शरण देने की गुहार लगाई है और वापस भेजने का विरोध किया है।
पढ़ें- राजनाथ सिंह ने कहा- भारत में रहने वाले Rohingya शरणार्थी नहीं, किसी ने कानून का पालन नहीं किया

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