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OI Exclusive: Cybercrime के नए तरीके इजाद कर रहे अपराधी, लोन और फर्जी कॉल से लगा रहे करोड़ों का चूना

जिस तरह से लगातार तकनीक के क्षेत्र में विकास हो रहा है, साइबर ठगी करने वाले लोगों से ठगी के अलग-अलग तरीके ढूंढ निकालते हैं। लोगों के साथ फोन कॉल, व्हाट्सएप कॉल,वीडियो कॉल के जरिए ठगी कर रहे हैं। हद तो यहां तक हो गई जब एक व्यक्ति ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए वीडियो कॉल किया और करोड़ों की ठगी कर डाली।

अब आप सोच रहे होंगे कि यह फर्जी कहानी है, तो हम आपको बता दें कि ऐसी ही एक घटना देश के दिग्गज बिजनेसमैन के साथ हुई है। वर्धमान ग्रुप के चेयरमैन एसपी ओसवाल के साथ इसी तरह की घटना हुई और उनके साथ 7 करोड़ रुपए की ठगी की गई।

फोन कॉल से करोड़ों की चपत

एसपी ओसवाल को इसी तरह का कॉल आया था, जिसमे कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया था। यही नहीं इस अधिकारी ने फर्जी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई भी रच डाली, जिससे वह विश्वास दिला सके कि इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस चल रहा है।

यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लग रहा है, लेकिन ठगी करने वाले ने इतना जबरदस्त जाल बुना कि वह एसपी ओसवाल को यह यकीन दिलाने में सफल हो गया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर केस चल रहा है और इस मामले में उनकी गिरफ्तारी हो सकती।

इस डर के चलते उन्होंने ठगी करने वाले को 7 करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर कर दी। एसपी ओसवार को यह यकीन हो गया कि यह फर्जी सीबीआई अधिकारी उन्हें गिरफ्तारी से बचाने में मदद करेगा और उन्होंने अलग-अलग किश्तों में उसे करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिया।

लेकिन दो दिन के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े का सच सामने आया और एसपी ओसवाल इस बात को समझ गए कि फोन करने वाला कोई सीबीआई अधिकारी नहीं था, बल्कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।

लखनऊ में करोड़ों की चपत

इसी तरह का एक मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी सामने आया। यहां डॉक्टर रुचिका टंडन को भी इसी तरह का फोन आया, जिसमे फोन करने वाला रुचिका को यह यकीन दिलाने में सफल हो गया कि वह फर्जीवाड़े में शामिल हैं।

जिसके बाद उन्होंने 2.81 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिया। हालांकि बाद में उन्हें समझ आ गया कि उनके साथ फर्जीवाड़ा हुआ है।

बैंक लोन से फर्जीवाड़ा

ठगी करने वाले लोगों के बैंक खाते से पैसा उड़ाने के लिए एक और तरीके का इस्तेमाल करते हैं। सबसे पहले आपके पास एक मैसेज आता है कि आपके बैंक खाते में पैसे जमा हुए हैं।

इसके बाद आपके पास फोन आता है कि आपके बैंक खाते में गलती से पैसा ट्रांसफर हो गया है, उसे वापस कर दीजिए। जिसपर यकीन करके आप फोन करने वाले के निर्देश के अनुसार पैसा उसके बताए अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं।

लेकिन यह एक तरह का लोन फ्रॉड है, जिसमे आपको लोन के जरिए पैसा दिया जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कैसे आपकी बैंक डिटेल और केवाईसी हुई और आपको लोन जारी किया गया।

बैंकों पर भी सवाल

इस तरह के मामलों में बैंक पर भी सवाल खड़ा होता है कि आखिर बिना ग्राहक के कैसे केवाईसी की गई और कैसे ठगी करने वाले के पास आपकी निजी जानकारी पहुंची।

चौंकाने वाले आंकड़े

चौंकाने वाली बात यह है कि वित्त वर्ष 2023 में भारत में 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक का फर्जीवाड़ा साइबर क्राम के जरिए किया गया।

रिपोर्ट की मानें तो भारतीयों को 1750 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी का भारतीय शिकार हो चुके हैं। इस वर्ष की शुरुआत के चार महीनों में ही 740000 लोगों ने साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज कराई है।

साइबर ठगी के चलते हजारों लोगों का घर बर्बाद हो गया, लोगों की मेहनत की कमाई उड़ गई, बिजनेस बर्बाद हो गए। ऐसे में यह समस्या लोगों के लिए बड़ी आफत बनकर आई है।

साइबर क्राइम के नए तरीके

भारत में तेजी से साइबर क्राइम के मामले में बढ़ रहे हैं। ठगी करने वाले अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। वो एआई के जरिए लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं, जिसे आम लोगों को पहचान पाना थोड़ा मुश्किल हो रहा है। ठगी करने वाले अब साइबर अरेस्ट का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यह साइबर अरेस्ट क्या बला है।

साइबर अरेस्ट से डराते हैं

साइबर अरेस्ट की बात करें तो इसके तहत ठगी करने वाला खुद को सीबीआई, ईडी का या फिर पुलिस का अधिकारी बताता है और आपको यह यकीन दिलाता है कि आप फर्जीवाड़े में शामिल हैं और आपको इस मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है। ये लोग आपको धमकाते हैं कि आपके खिलाफ उनके पास वारंट है।

ये आपको डराते हैं कि आप दूसरे शहर या देश में हैं, ऐसे में उनके पास आपको डिजिटली अरेस्ट करने का अधिकार है। ये आपको कानूनी दांवपेंच में उलझाने की कोशिश करते हैं, जिससे आपको यकीन हो जाता है कि इस व्यक्ति के पास कानूनी जानकारी है और यह आपके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। ठगी करने वाले फर्जी कोर्ट की सुनवाई तक गढ़ लेते हैं ।

पूरी तैयारी से करते हैं ठगी

ठगी करने वाले आपके बारे में पहले अच्छे से पड़ताल करते हैं और पूरी रिसर्च के साथ वह आपको अपना शिकार बनाते हैं। ठगी करने वाले काफी पढ़े-लिखे होते हैं और उन्हें तकनीक की जानकारी होती है।

ये आपसे जुड़ी ऐसी जानकारी हासिल करते हैं जिससे आपको वो डरा सकें, ब्लैकमेल कर सकें। लेकिन ध्यान रखें इस तरह के किसी भी फर्जीवाड़े में फंसने से पहले यह पड़ताल जरूर करें क्या फोन करने वाला सच में असल अधिकारी है।

आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

साइबर क्राइम करने वालों के पास आधुनिक तकनीक होती है, ये किसी भी तस्वीर, वीडियो को एडिट करके आपको भ्रमित कर सकते हैं, किसी की भी आवाज तकनीक के जरिए निकाल सकते हैं।

ये लोग फेंके गए सिम कार्ड, क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन माध्यम से जानकारी हासिल करके लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। यही वजह है कि ऐसे फर्जीवाड़ा करने वालों को पकड़ना मुश्किल होता है।

साइबर क्राइम करने वाले लगातार अपने तरीकों को बदलते हैं, नई तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में आपको इस तरह की ठगी से बचने के लिए जानकार रहने की जरूरत है।

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