जब शादी के रिसेप्शन में पहुंचे मेहमान परिजनों को दे रहे थे सांत्वना, देश के लिए शहीद हो गया एक और जवान

बागडोगरा। भारत और नेपाल के बीच भले ही रिश्‍तों में उतार-चढ़ाव लगा रहता हो लेकिन यहां भी युवाओं में सेवा का जज्‍बा उतना ही है जितना किसी दूसरे भारतीय सैनिक में। पिछले दिनों एलओसी पर शहीद हुए 25 साल के अर्जुन थापा मगर, इसकी एक और मिसाल हैं। इतनी सी उम्र में भारत के लिए शहीद होने वाले अर्जुन को पश्चिम बंगाल के बागडोगरा में श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर उनका पूरा परिवार मौजूद था। थापा अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और जिस समय उन्‍हें श्रद्धांजलि दी जा रही थी उनके पिता की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे। नेपाल की मीडिया ने शहीद थापा के बारे में विस्‍तार से जानकारी दी है।

भाई की शहादत के बाद से बेसुध बहन

भाई की शहादत के बाद से बेसुध बहन

नेपाली वेबसाइट माय रिपब्लिका ने लिखा है अर्जुन थापा अपने घर में इकलौते कमाने वाले शख्‍स थे। उनके पिता प्रेम बहादुर थापा को जैसे ही बेटे की शहदात की खबर मिली, अपनी बहू और कुछ रिश्‍तेदारों को लेकर बेटे का शव लेने के लिए घर से रवाना हो गए। घर पर अर्जुन की बहन प्रमिला अकेली रह गईं। भाई के न रहने की खबर ने उन्‍हें तोड़ कर रख दिया है। गांव में मातम बिखरा ही हुआ है तो घर पर दिनों से बर्तन गंदे पड़े हुए हैं। घर के बाहर बंधी गाय और दूसरे जानवरों को भी चारा नहीं दिया गया है लेकिन वे सब भी चुप हैं। एक जनवरी को जब पूरा देश नए साल के जश्‍न के हैंगओवर में डूबा था एलओसी पर सेना अपने दो जवानों की शहादत की खबर से दुखी थी।

बेटे की नौकरी से खुश पिता ने बेच दिए घर के बैल भी

बेटे की नौकरी से खुश पिता ने बेच दिए घर के बैल भी

अर्जुन थापा की शादी पिछले वर्ष जून में ही हुई थी। बेहद गरीब परिवार से आने वाले थापा ने जब इंडियन आर्मी ज्‍वॉइन की तो घर में लोगों के चेहरे से मुस्‍कुराहट जाने का नाम ही नहीं ले रही थी। सबको लगा कि अब मुश्किलों के दिन खत्‍म हो चुके हैं। किसान पिता बेटे की सेना में शामिल होने की खबर से इतने खुश थे कि खेती के लिए जो बैल खरीदे गए थे उन्‍हें बेच दिया गया था। वह सबको बता रहे थे कि बेटे के सेना में जाने के बाद अब उनके बुरे दिन खत्‍म हो चुके हैं।

रिसेप्‍शन में आए मेहमान पहुंचे सांत्‍वना देने

रिसेप्‍शन में आए मेहमान पहुंचे सांत्‍वना देने

एक नई बुरी खबर उनका इंतजार कर रही थी और सभी इस बात से अनजान थे। थापा की शहादत की खबर जैसे ही गांव में पहुंची घर के बाहर भीड़ जमा हो गई। जो पड़ोसी कुछ माह पहले अर्जुन के घर शादी के रिसेप्‍शन के लिए आए थे, अब वो उनके परिवार को सांत्‍वना देने के लिए पहुंच रहे थे। थापा शादी के बाद पहली बार नवंबर के अंत में छुट्टी पर अपने घर पहुंचे थे। 20 दिसंबर को छुट्टियां खत्‍म हो गईं और वह वापस कश्‍मीर में अपनी रेजीमेंट लौट आए।

आठ दिन पहले ही छुट्टी से लौटे थे वापस

आठ दिन पहले ही छुट्टी से लौटे थे वापस

आठ दिन बाद यानी 28 दिसंबर को एलओसी पर घुसपैठ की खबर आई और 31 दिसंबर की रात सेना ने कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन लॉन्च कर दिया। गोरखा राइफल्‍स के अर्जुन थापा और पुणे के रहने वाले नायक सावंत संदीप रघुनाथ दोनों तरफ से हो रही फायरिंग की चपेट में आ गए। कुछ ही घंटों बाद दोनों ने दम तोड़ दिया। जम्‍मू कश्‍मीर में रक्षा प्रवक्‍ता लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने बताया, 'नायक रघुनाथ और राफइलमैन बहादुर, संजीदा और उत्‍साहित सैनिक थे। देश हमेशा इन दोनों के सर्वोच्‍च बलिदान को याद रखेगा।'

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