Retail inflation में मामूली गिरावट, दिसंबर में 5.72 फीसद, औद्योगिक उत्पादन बढ़ा, क्या घटेगी महंगाई ?
खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर में 5.88 % दर्ज की गई थी। दिसंबर में रिटेल इन्फ्लेशन में मामूली गिरावट के बाद महंगाई 5.72 फीसद रही। जानिए किन उत्पादों की कीमतें घटी हैं।

Retail inflation यानी खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर के मुकाबले घटी है। इसके अलावा भारत में औद्योगिक उत्पादन बढ़ने के संकेत हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नवंबर 2022 में औद्योगिक उत्पादन 7.1% बढ़ा है।

महंगाई से बहुत राहत नहीं
सरकारी डेटा में कहा गया है कि खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर में 5.88 % रही थी। दिसंबर में रिटेल इन्फ्लेशन में मामलू गिरावट है, लेकिन महंगाई से बहुत अधिक राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ उपभोक्ता उत्पादों की कीमतें घटी हैं।

लगातार तीसरे महीने घटी सीपीआई मुद्रास्फीति
खुदरा मुद्रास्फीति पर मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक यह लगातार तीसरा महीना है जब सीपीआई मुद्रास्फीति में गिरावट आई है। यह लगातार दूसरा महीना भी है कि CPI भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दायरे- 2-6 प्रतिशत के बीच है।
सब्जियों की कीमत में गिरावट
मध्यम अवधि का लक्ष्य- 4 प्रतिशत रखा गया है, लेकिन सीपीआई मुद्रास्फीति लगातार 39 महीनों से इस सीमा से अधिक देखी जा रही है। दिसंबर में मुद्रास्फीति में गिरावट का प्रमुख कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट है। खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 4.19 प्रतिशत पर आ गई है। ये भी एक साल में सबसे कम है। नवंबर की तुलना में दिसंबर में सूचकांक में 12.7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। अलग-अलग खाद्य पदार्थों में सब्जियों की कीमतों में सबसे अधिक गिरावट आई है।
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हाउसिंग इंडेक्स में क्रमिक गिरावट
जिन अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में क्रमिक गिरावट देखी गई है उनमें मांस, मछली, अंडे, फल और चीनी शामिल हैं। दिसंबर 2022 में सूचकांक में महीने-दर-महीने 1.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अनाज की कीमतों में उछाल जारी रहा। भोजन के अलावा, हाउसिंग का सूचकांक महीने-दर-महीने 0.6 प्रतिशत घटा है। छह महीने में पहली बार हाउसिंग इंडेक्स में क्रमिक गिरावट आई है। हालांकि, कपड़े और जूते, ईंधन और प्रकाश, और सीपीआई के दूसरे घटकों में गिरावट नहीं आई है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)
दिसंबर की खुदरा मुद्रास्फीति एक साल में सबसे निचले स्तर पर है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से मापा जाता है। गुरुवार को Retail Inflation एक साल में सबसे कम- 5.72 प्रतिशत पर रही।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक
भारत में कारखानों का उत्पादन यानी Industrial Production को औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) से मापा जाता है। नवंबर 2022 में उत्पादन बढ़कर 7.1 प्रतिशत पर जा पहुंचा। अक्टूबर में माइनस 4.0 प्रतिशत IPP नेगेटिव संकेत दे रही थी। IPP में उतार चढ़ाव देखा गया है, क्योंकि अप्रैल से अक्टूबर की अवधि में IPP में 5.3 फीसद का उछाल देखा गया था।
CPI कैलेंडर वर्ष 2022 में पहली बार इतना नीचे
MoSPI ने जिस महीने के आंकड़ों की समीक्षा की यानी नवंबर के बाद दिसंबर में खनन उत्पादन में 9.7 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में 12.7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। पिछले महीने भी खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2021 के बाद सबसे निचले स्तर पर रही थी। CPI कैलेंडर वर्ष 2022 में पहली बार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 6 प्रतिशत के ऊपरी मार्जिन से नीचे आया है।
सरकार ने RBI से क्या कहा है ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने RBI को मार्च 2026 को समाप्त होने वाली पांच साल की अवधि में दोनों तरफ 2 प्रतिशत के मार्जिन के साथ खुदरा मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत पर बनाए रखने को कहा है। बता दें कि दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा। दास ने कहा था कि कमोडिटी और तेल की कीमतों में नरमी से दुनिया भर में महंगाई कम हो रही है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि महंगाई पर सकारात्मक खबरों के बावजूद हम "संतुष्ट" नहीं हो सकते।
महंगाई पर RBI ने क्या कहा ?
Inflation की चिंताओं पर आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा था कि आरबीआई के प्रयास पहले मुद्रास्फीति को 6% से कम के tolerance band में लाना है। उन्होंने कहा कि रेपो और रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी की मात्रा 50 बेसिस प्वाइंट के मुकाबले 35 होना चाहिए। इसे RBI से मिलने वाले संकेत के रूप में देखा जाता है।












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