बैरंग लौटे BMC फिर पहुंचे कैंपा कोला कंपाउंड, नहीं खुला सोसाइटी का दरवाजा

शुक्रवार को कैंपा कोला कंपाउंड परिसर में आए हुए बीएमसी के कर्मचारियों को जमकर विरोध का सामना करना पड़ा। इस विरोध के दौरान कंपाउंड के सभी लोगों ने मुख्य द्वार को बंद कर रखा था। किसी भी बीएमसी कर्मचारी को अंदर घ्ुासने का भी मौका नहीं दिया गया। इस घटना के बाद बीएमसी का कहना है कि वह हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
ज्ञातव्य है कि बीएमसी ने 12 जून की शाम 5 बजे तक उन फ्लैट्स को खाली करने की मोहलत दी थी। लेकिन सोसायटी में रहनेवालों ने फ्लैट की चाबी सौंपने और फ्लैट खाली करने से इनकार कर दिया था। उसके बाद बीएमसी की कार्रवाई 17 जून से शुरू होने वाली थी लेकिन 15 जून को यहां रहनेवाले एक बुजुर्ग की मौत को लेकर कार्रवाई टाल दी गई थी, जिसे आज से अंजाम दिया जाएगा।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 102 फ्लैट मालिकों को घर खाली करने होंगे। कुछ लोग किसी भी कीमत पर घर खाली करने को तैयार नहीं हैं तो बहुत से परिवारों ने घर छोड़ने के लिए पैकिंग कर ली है। कैंम्पा कोला कैंम्पस में कुछ ऐसे परिवार है जो कई सालों पहले पाकिस्तान से भारत रिफ्यूजी बन कर आए थे। इस विवाद के बाद एक बार फिर वो अपने आप को रिफ्यूजी समझ रहे हैं।
करें ऐसा ताकि न हो ऐसा:
मुंबई की कैंपा कोला सोसाइटी ही नहीं बल्कि दिल्ली, लखनऊ, पूणे, बेंगलूरु तैसे तमाम शहरों में बिल्डर्स की मनमानी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। शुरुआत में तो बिल्डर सरकारी विभागों को पैसा खिलाकर और जोड़-जुगाड़ के जरिए बिल्डिंग बना लेते हैं। इसके बाद वो ग्राहकों को सस्ते दामों का लालच देकर सभी फ्लैट आसानी से बेचकर निकल जाते हैं। दो-चार साल बाद पता चलता है कि यह बिल्डिंग तो गैर-कानूनी है।
1. किसी भी बिल्डिंग में फ्लैट से लेने पहले इस बात की पूरी जानकारी कर लें कि यह बिल्डिंग अधिकृत है या नहीं।
2. ग्राहकों को इस बात की भी जानकारी करनी चाहिए कि क्या यह बिल्डिंग कितने माले के लिए अधिकृत है।
3. बिल्डिंग में आने वाला पानी, गैस या फिर बिजली का कनेक्शन कितना अधिकृत है।












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