Republic Day Chief Guest: कौन हैं इस बार के चीफ गेस्ट Antonio Costa? गोवा से है 'बाबुश' का गहरा रिश्ता
Antonio Costa: भारत अपने 77वें गणतंत्र दिवस (2026) के अवसर पर एक अभूतपूर्व कूटनीतिक मिसाल पेश करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर, इस वर्ष यूरोपीय संघ (EU) के दो सबसे शक्तिशाली नेता-यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा (António Costa) संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि होंगे। यह इतिहास में केवल दूसरी बार है जब भारत ने किसी व्यक्तिगत देश के बजाय एक पूरे समूह के नेतृत्व को आमंत्रित किया है। इससे पहले 2018 में आसियान नेताओं को बुलाया गया था।
25 से 27 जनवरी तक होने वाली इस आधिकारिक राजकीय यात्रा के दौरान ये नेता न केवल कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य और सांस्कृतिक शक्ति के साक्षी बनेंगे, बल्कि 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। यह दौरा भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने और रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा एवं तकनीक जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक डेडलाइन के रूप में देखा जा रहा है।

एंटोनियो कोस्टा (Republic Day Chief Guest António Costa)
भारत से गहरा 'गोवा' कनेक्शन यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा का भारत आगमन कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ एक भावुक जुड़ाव भी है। पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके कोस्टा के पिता, प्रसिद्ध लेखक ओरलैंडो दा कोस्टा, मूल रूप से गोवा से थे। यही कारण है कि कोस्टा को गोवा में आज भी प्रेम से "बाबुश" कहा जाता है। वे भारतीय मूल के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने यूरोपीय संघ के इतने बड़े पद की जिम्मेदारी संभाली है। उनका यह दौरा भारत और यूरोप के बीच सांस्कृतिक और 'पीपल-टू-पीपल' संबंधों को एक नई गर्मजोशी प्रदान करेगा।
यूरोप की आधुनिक नीति निर्माता यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के रूप में उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय संघ की कार्यकारी शक्ति का चेहरा हैं। वो भी इस कार्यक्रम की मुख्य अथिति होंगी।
इस दौरे का रणनीतिक और वैश्विक महत्व
FTA पर ऐतिहासिक मुहर: कयास लगाए जा रहे हैं कि इस दौरे के दौरान पिछले एक दशक से लंबित भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजार के द्वार खुलेंगे।
रक्षा और सुरक्षा साझेदारी: परेड के दौरान पहली बार एक यूरोपीय नौसैनिक दस्ता मार्च करेगा, जो हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में भारत और यूरोप के साझा सुरक्षा हितों को दर्शाता है।
तकनीकी सहयोग: ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच 'सूचना सुरक्षा समझौते' पर सहमति बनने की संभावना है।
समारोह के मुख्य आकर्षण
मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में कर्तव्य पथ पर 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष की थीम और 'आत्मनिर्भर भारत' का प्रदर्शन होगा। इस बार सेना का 'फेज्ड बैटल एरे' और पहली बार शामिल होने वाली भैरव लाइट कमांडो बटालियन मुख्य अतिथियों और दर्शकों को भारत की आधुनिक युद्ध क्षमता से परिचित कराएगी।












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