Republic Day 2025: यूपी और झारखंड की झांकियों में दिखी सांस्कृतिक विरासत और विकास की झलक, महाकुंभ का जलवा
Republic Day 2025: देश अपना 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस दौरान देशभक्ति और एकता की भावना हर कोने में झलक रही थी। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत प्रदर्शन हुआ।
उत्तर प्रदेश की झांकी, महाकुंभ की अद्भुत झलक
इस वर्ष की झांकियों में उत्तर प्रदेश की महाकुंभ झांकी ने सबका ध्यान खींचा। यह झांकी 2025 में प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ के आध्यात्मिक महत्व और ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित कर रही थी। झांकी में समुद्र मंथन की पौराणिक कथा को केंद्र में रखा गया। अमृत कलश की प्रतिकृति और ध्यान में मग्न साधु-संतों की आकृतियों ने महाकुंभ के आध्यात्मिक माहौल को जीवंत किया।

संगम में पवित्र स्नान की तैयारियों और श्रद्धालुओं के दृश्यों को एलईडी स्क्रीन और भित्तिचित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। 2025 महाकुंभ के लिए डिजिटल तैयारियों और तकनीकी प्रगति को भी झांकी में जगह दी गई। जिसमें एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र और कुशल भीड़ प्रबंधन को दिखाया गया।
गुजरात की झांकी, विरासत और विकास का संगम
गुजरात की झांकी ने अनार्तपुर से एकता नगर विरासत भी, विकास भी के विषय को प्रस्तुत किया। झांकी में कीर्ति तोरण और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समृद्धि को दिखाया गया। पिथोरा चित्रों ने गुजरात की आदिवासी संस्कृति की जीवंतता को उजागर किया।
इसके साथ ही एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर उत्पादन और पर्यटन में गुजरात की प्रगति को भी झांकी में दिखाया गया। झांकी ने भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती को समर्पित उनकी विरासत का जश्न मनाया।
राष्ट्र के लिए गर्व का दिन
76वें गणतंत्र दिवस का उत्सव सांस्कृतिक विविधता, तकनीकी प्रगति और लोकतंत्र की भावना का प्रतीक बना। कर्तव्य पथ पर देश के विभिन्न हिस्सों से आई झांकियों ने भारत की एकता और विविधता का उत्सव मनाया। तिरंगे की रोशनी, सांस्कृतिक गीतों और परेड ने माहौल को देशभक्ति से भर दिया।
गणतंत्र दिवस का संदेश
इस अवसर ने भारत की गहरी सांस्कृतिक जड़ों और भविष्य की प्रगतिशील दृष्टि को उजागर किया। उत्तर प्रदेश और गुजरात की झांकियों ने भारत की आध्यात्मिक विरासत और विकास की कहानी को बखूबी पेश किया। यह दिन लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक विविधता और एकजुटता का उत्सव था। जो भारत के आत्मविश्वास और गौरव का प्रतीक है।












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