Repealing and Amending Bill 2025: शीतकालीन सत्र में पास हुआ निरसन और संशोधन विधेयक, 71 पुराने कानून खत्म
Repealing and Amending Bill 2025: संसद के शीतकालीन सत्र में हंगामे और विपक्ष के शोर-शराबे के बीच सरकार ने कई अहम बिल पास किए हैं। इसमें निरसन एवं संशोधन विधेयक, 2025 शामिल है। सरकार की ओर से बिल पेश करते हुए कहा गया था कि इसके जरिए देश के कानूनी ढांचे को सरल और आधुनिक बनाया जाएगा। 71 पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को निरस्त या संशोधित करने वाले निरसन एवं संशोधन विधेयक, 2025 को दोनों सदनों से मंजूरी बिल गई है और अब कानून बन गया है।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से आम नागरिकों को पुराने, बेकार और जटिल कानूनों से राहत मिलेगी और कानूनी प्रक्रियाएं आसान होंगी। वहीं विपक्ष ने इसके व्यावहारिक असर पर सवाल उठाते हुए जमीनी स्तर पर जांच की जरूरत बताई थी।

Repealing and Amending Bill 2025: कानून से क्या फायदा होगा?
- इसके अलावा चार अहम कानूनों में संशोधन किया गया है। जैसे कि सामान्य खंड अधिनियम, सिविल प्रक्रिया संहिता, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम।
- कानून मंत्री ने सदन में जानकारी दी थी कि 2014 के बाद से अब तक 1,577 पुराने कानूनों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें से 1,562 कानून पूरी तरह खत्म किए गए हैं, जबकि 15 कानूनों को नए स्वरूप में दोबारा लागू किया गया है।
Repealing and Amending Bill 2025: सरकार ने पक्ष में दिए थे ये तर्क
विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नहीं, बल्कि ईज ऑफ लिविंग भी है। पुराने और अप्रभावी कानूनों को खत्म करने के पीछे हमारा उद्देश्य आम लोगों का जीवन आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि समय के साथ कई कानून अप्रासंगिक हो चुके हैं या उनमें तकनीकी खामियां हैं, जिन्हें हटाना जरूरी था।
विपक्ष ने बिल की व्यावहारिकता पर उठाए थे सवाल
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद विवेक के. तन्खा ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह सुधार कागजों तक सीमित हो सकता है और इसके वास्तविक प्रभाव का सही आकलन नहीं किया गया है। विपक्ष ने बिल की व्यावहारिकता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जमीनी स्तर पर इसे लागू कैसे किया जाएगा, इसका ब्लूप्रिंट पेश नहीं किया गया है। बिल लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से पास हो चुका है। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून के तौर पर प्रभावी है।












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