APJ Abdul Kalam :जब अविवाहित कलाम ने कहा- 'वो तीन बच्चों के पिता हैं' , हैरान रह गए थे लोग
नई दिल्ली, 27 जुलाई। देश के युवाओं के दिलों पर राज करने वाले मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आज पुण्यतिथि है। इस खास मौके पर आज देश में हर कोई उन्हें याद कर रहा है। कलाम का व्यक्तित्व सिखाता है कि इंसान की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी विनम्रता है। सिर से पांव तक लोगों के लिए प्रेरणाश्रोत रहे कलाम साहब की हर एक बात निराली थी, कलाम के बारे में कहा जाता है कि वे कुरान और भगवद् गीता दोनों का अध्ययन करते थे।
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विचारों में गीता और अल्फाज में कुरान की मिठास
और शायद यही एक बड़ा कारण था कि उनके विचारों में गीता का असर और अल्फाज में कुरान की मिठास नजर आती थी। बच्चों से बेइंतहा प्यार करने वाले कलाम काफी हाजिर जवाब भी थे, अक्सर वो अपने मजेदार जवाबों से लोगों की वो बोलती बंद कर दिया करते थे। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा आज हम आपको बताते हैं।

अब्दुल कलाम आजीवन अविवाहित रहे
दरअसल एक बार राष्ट्रपति भवन में वो बहुत सारे बच्चों से घिरे बैठे थे, बच्चे उनसे सवाल पर सवाल पूछे जा रहे थे और वो बड़े प्यार से हर बच्चे की जिज्ञासाओं को शांत करने की कोशिश कर रहे थे कि इसी बीच एक विदेश पत्रकार उनका इंटरव्यू लेने के लिए प्रेसिंडेंट हाउस पहुंचा और वहां पर कलाम को इस तरह से बच्चों संग खेलते अचरज में पड़ गया था और उसने झट से कलाम से पूछा कि आप के खुद के बच्चे नहीं हैं, ऐसे में आप इतना बच्चों से प्रेम करते हैं। बता दें कि अब्दुल कलाम आजीवन अविवाहित रहे।

'पृथ्वी, अग्नि, और ब्रह्मोस हैं मेरे तीन बेटे'
इस पर कलाम ने उसकी और देखा फिर मुस्कुराकर बोले कि आपसे किसने बोला कि मेरे बच्चे नहीं हैं। इस पर रिपोर्टर ने कहा कि मुझे तो यही पता था कि आपकी शादी नहीं हुई। इस पर कलाम बोले कि ठीक है मेरी शादी नहीं हुई लेकिन मैं तीन बच्चों का पिता हूं। इस पर रिपोर्टर एकदम से चकरा गया। उसकी हालत देखकर कलाम बहुत तेज हंसे और बोले कि जी हां, मेरे तीन बेटे हैं, जिनका जनक मैं हूं और उन तीनों बेटों का नाम हैं-पृथ्वी, अग्नि, और ब्रह्मोस।

बच्चों का साथ मुझे ऊर्जा देता है: कलाम
जिसे सुनकर उस रिपोर्टर की बोलती ही बंद हो गई, दरअसल पृथ्वी, अग्नि, और ब्रह्मोस, तीनों मिसाइल के नाम हैं, जिनके जनक कलाम ही हैं। इसके बाद कलाम ने कहा कि प्रेम की कोई परिभाषा नहीं होती है। बच्चों से प्रेम करने के लिए किसी को पिता बनना जरूरी नहीं है। बच्चे तो ईश्वर के रूप में होते हैं। मुझे उनके साथ रहना अच्छा लगता है। वो मुझे नई-नई बात सोचने पर विवश करते हैं। उनसे मुझे ऊर्जा मिलती है। तो ऐसे थे कलाम।

27 जुलाई, 2015 को शिलांग में निधन
अब इसे आप संजोग ही कहिए कि अपने अंतिम वक्त में भी वो बच्चों के ही साथ थे। मालूम हो कि उनका 27 जुलाई, 2015 को शिलांग में निधन हो गया था वे आईआईएम में लेक्चर देने गए थे, इसी दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वो पंचतत्व में लीन हो गए थे।












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