मोदी राज में तिरंगे का 'लाल सलाम', क्या है माजरा?
यूं तो वाम दलों की देश में अब ये हालत हो गई है कि उन्हें आने वाले कुछ दिनों में दूरबीन से देखना होगा लेकिन सोमवार को दिल्ली, खासतौर से रायसीना हिल्स, इंडिया गेट लाल झंडे से पटा दिखा।
नई दिल्ली। इन दिनों दिल्ली का मौसम कुछ बदला हुआ है। बयार ही कुछ ऐसी है। पहाड़ों की सर्द हवाओं ने दिल्ली का मिजाज बदला है तो अचानक सियासी फिजां भी बदली हुई नजर आ रही है। तस्वीरें भी इसकी गवाह हैं।
बदला-बदला दिखा दिल्ली का नजारा
दिल्ली के पॉश इलाकों में तिरंगा लाल झंडे को सलाम करता नजर आ रहा है। हालांकि इसकी वजह ना तो सोमवार को 1 मई होने की है, ना ही इसका वामपंथ से कोई बहुत ज्यादा संबंध है।

टर्की के राष्ट्रपति का भारत दौरा
मोदी राज में इस तरह का नजारा देखना अपने आप में अप्रत्याशित है। दरअसल, सोमवार को टर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्डोगान भारत के दौरे पर राजधानी दिल्ली पहुंचे। जब भी किसी देश का राष्ट्राध्यक्ष, देश में आता है तो यह परंपरा है कि दूसरे देश के झंडे के साथ हमारा तिरंगा झंडा भी प्रमुख जगहों पर लगाया जाता है। लेकिन ये अंतरराष्ट्रीय सियासत की मजबूरी है भगवा सरकार में लाल झंडे के साथ तिरंगा फहराता नजर आ रहा है।

तिरंगे के साथ नजर आया टर्की का झंडा
बता दें कि जब भी राष्ट्रीय ध्वज अन्य देशों के ध्वज के साथ खुले में फहराया जा रहा हो तो उसके लिए भी तमाम नियमों का पालन करना होता है। जब भी किसी अन्य देश के साथ तिरंगा लगाया जाता है तो दोनों झंडे की लंबाई समान हो साथ ही दोनों देशों के ध्वज के लिए प्रयोग में लाए जा रहे स्तंभ बराबर होना चाहिए। साथ ही दोनों देशों में से किसी भी देश का ध्वज एक के ऊपर एक , एक ही स्तंभ पर नहीं फहराया जा सकता।

टर्की के राष्ट्रपति एर्डोगान भारत से पहले 7 बार किया है पाकिस्तान का दौरा
गौरतलब है कि टर्की के राष्ट्रपति एर्डोगान ने भारत आने से कुछ देर पहले एक साक्षात्कार के दौरान कश्मीर पर अपनी जो राय दी वह देश को पसंद नहीं आई। एर्डोगेन ने भारत की आकांक्षा के विपरीत साक्षात्कार में कहा कि कश्मीर की समस्या पर बहुपक्षीय बातचीत होनी चाहिए। जब कि भारत सिर्फ द्विपक्षीय वार्ता ही चाहता है। ऐसा माना जा रहा है कि राष्ट्रपति बनने के बाद 7 बार पाकिस्तान की यात्रा कर चुके एर्डोगान, कश्मीर के मसले पाक पीएम नवाज शरीफ का एजेंडा लेकर भारत आए हैं।

एर्डोगान की मंशा- पाकिस्तान को भी NSG का सदस्य बनाया जाए
एर्डोगान भारत की मंशा के विपरीत चाहते हैं कि पाकिस्तान को भी परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) का सदस्य बनाया जाए। इतना ही नहीं उन्होंने भारत से पाकिस्तान के प्रति अपना ईगो खत्म करने और रवैये में नरमी लाने की तक की सलाह दे डाली।

20 अक्टूबर 1923 को टर्की गणराज्य घोषित हुआ
बात अगर टर्की इतिहास की करें तो साल 1922 में वामपंथी नेता मुस्तफा कमाल अतातुर्क का शासन करना शुरू हुआ। इतिहास के पन्ने बताते हैं कि इसी दिन कमाल के नेतृत्व में हुए संघर्ष में ग्रीस हार गया था। इसके बाद 20 अक्टूबर 1923 को टर्की गणराज्य में घोषित हुआ। यूं तो टर्की मुस्लिम बहुत राष्ट्र है जिसमें सुन्नी ज्यादा हैं लेकिन यह लोकतांत्रिक देश है। मुस्तफा कमाल की मौत के पहले तक उसके नेतृत्व में रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी अत्यधिक प्रभावशाली और मुख्य राजनीतिक संगठन के रूप में रही।

एर्डोगान के भारत दौरे का मतलब...
एर्डोगान के दौरे के दौरान यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत, कश्मीर मसले पर उन्हें वक्त रहते कोई जवाब देगा या फिर भारत के साथ व्यवसाय करने और आतंकवाद से लड़ाई लड़ने के खिलाफ जो प्रण लेकर कर वो भारत आए हैं, उस पर वो भारतीय नजरिए से भी अपनी राय रखेंगे। बता दें कि बीते साल जब तख्तापलट की नाकाम कोशिश हुई थी एर्डोगान ने इसका जिम्मेदार भारत को ठहराया था। भारत के इस दौरे पर एर्डोगान इस मसले पर भी बात करेंगे।












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