जानिए क्या है रजा अकादमी का इतिहास, जिसको बैन करने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में छिड़ी है बहस
जानिए क्या है रजा अकादमी का इतिहास, जिसको बैन करने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में छिड़ी है बहस
नई दिल्ली, 22 नवंबर: त्रिपुरा में मुसलमानों को कथित रूप से निशाना बनाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के हिसंक होने की घटना के बाद, महाराष्ट्र में भी 12 नवंबर से सांप्रदायिक हिंसा बढ़ गई है। महाराष्ट्र के अमरावती, नांदेड़ और मालेगांव से पिछले कुछ दिनों से हिंसा की खबरे सामने आ रही है। नांदेड़ में 2012 के आजाद मैदान दंगों के लिए जिम्मेदार एक इस्लामी संगठन रजा अकादमी का इन हिंसा के बीच नाम काफी चर्चाओं में हैं। दावा किया जा रहा है कि रजा अकादमी ने धरना-प्रदर्शन का महाराष्ट्र के हिंसा प्रभावित जिलों में आह्वान किया था। इस्लामवादी संगठन से जुड़े युवकों ने मिले-जुले रिहायशी इलाकों में घुसने की कोशिश की। हालांकि रजा अकादमी की इन योजनाओं को पुलिस ने विफल कर दिया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस पर हमला किया और उनपर पथराव किया। बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रजा अकादमी को बैन करने की मांग की है। बीजेपी विधायक नितेश राणे ने रजा अकादमी को एक आंतकवादी संगठन कहा है। बीजेपी और कांग्रेस रजा अकादमी संगठन के पीछे किसका हाथ है, इसको लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रही है। तो आइए जानें क्या है रजा अकादमी का इतिहास और कब रहा है चर्चाओं में।

रजा अकादमी का इतिहास
- टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक रजा अकादमी की स्थापना 1978 में हुई थी। रजा अकादमी की स्थापना अलहज मोहम्मद सईद नूरी ने की थी। अलहज मोहम्मद सईद नूरी 1986 से रजा अकादमी के अध्यक्ष रहे है।
-इस्लामवादी संगठन रजा अकादमी की स्थापना सुन्नी नेता इमाम-ए-अहमद रजा खान के काम को प्रकाशित करने और प्रचारित करने के लिए की गई थी। बता दें कि उर्दू, अरबी, हिंदी और अंग्रेजी समते कई भाषाओं में रजा अकादमी ने किताबें प्रकाशित की हैं।

2012 में पता चला रजा अकादमी का नहीं हुआ है रजिस्ट्रेशन
साल 2012 में पता चला कि रजा अकादमी संगठन का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं था। रजा अकादमी के बारे में सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि इसके संस्थापक और अध्यक्ष सईद नूरी ने औपचारिक इस्लामी शिक्षा भी कभी नहीं ली थी। जब उन्होंने सुन्नी इस्लाम का नेता बनने का फैसला किया तो वे सिलाई धागे के व्यवसाय में थे। जब रजा अकादमी को बनाया गया तो ये एक एजुकेशन सोसाइटी थी। लेकिन धीरे-धीरे एक सोशल संगठन बन गई। इस संस्था का दावा है कि ये मुस्लिम के हक के लिए आवाज उठाती है।

आजाद मैदान दंगा: जब रजा अकादमी ने तोड़ा अमर जवान ज्योति स्मारक
11 अगस्त 2012 को रजा अकादमी ने असम और म्यांमार में मुसलमानों पर कथित अत्याचारों के विरोध में आजाद मैदान में एक मोर्चा का आयोजन किया गया था। रजा अकादमी समूह द्वारा उस वक्त पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया था, उसके बाद विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इसके कारण पुलिस ने फायरिंग की और 2 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
रजा अकादमी ने पहले मुंबई पुलिस को आश्वासन दिया था कि विरोध के लिए केवल 1500 लोग ही आएंगे। लेकिन आजाद मैदान में 15,000 से अधिक लोग इकट्ठे हुए, जो बाद में बढ़कर 40000 हो गए। आजाद मैदान दंगों की सबसे चौंकाने वाली घटना मुस्लिम भीड़ द्वारा अमर जवान ज्योति स्मारक में तोड़फोड़ करने की थी।

आजाद मैदान दंगों में 2.72 करोड़ रुपये का हुआ था नुकसान
बाद में जब इस मामले का खुलासा हो तो पता चला कि पुलिस ने दंगों में शामिल 35 से 40 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार करने के लिए ईद तक एक हफ्ते का इंतजार किया। दंगों में विभिन्न सार्वजनिक संपत्तियों को लगभग 2.72 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। उस वक्त मुंबई के पुलिस कॉमिशनर अरूप पटनायक थे। दंगे के उनका तबादला हो गया था।

इन बातों को लेकर भी चर्चा में रही है रजा अकादमी
- रजा अकादमी ने सभी राज्य सरकारों से मुहम्मद पैगम्बर बिल पास करने की भी मांग कर चुकी है। इस बिल के मुताबिक इस्लाम धर्म और पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने पर सजा का प्रावधान हो।
- इतना ही नहीं तमिल वेब सीरीज नवरस को पवित्र कुरान का अपमान करने के लिए भी प्रतिबंध करने की मांग की थी।
-रजा अकादमी ने प्रो इजराइल रवैये के लिए सऊदी अरब का विरोध किया था।
- रजा अकादमी ने ईरानी फिल्म मोहम्मद द मैसेंजर पर रोक की मांग भी की थी।












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