सभी राज्यों को नागरिकता संशोधन एक्ट लागू करना अनिवार्य: रविशंकर प्रसाद
नई दिल्ली। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को साफ किया है कि संसद द्वारा जो कानून पास किया जाता है उसे लागू करना राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। जिन राज्य सरकार ने यह ऐलान किया है कि वो अपने प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून को लागू नहीं करेंगे उन्हें एक बार फिर से संविधान के प्रावधानों की सही कानूनी जानकारी लेने की जरूरत है। प्रसाद ने कहा कि यह राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह ससंद द्वारा बनाए गए कानून का पालन करें।

केरल विधानसभा ने पास किया था प्रस्ताव
दरअसल केरल के मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पास करके कहा था कि केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन कानून को वापस ले। इसपर प्रसाद ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि जो लोग संविधान की शपथ लेकर सत्ता में आए हैं वो असंवैधानिक बयान दे रहे हैं। जो सरकारें यह दावा कर रही हैं कि वह अपने प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून को लागू नहीं करेंगी उन्हें एक बार फिर से इस बाबत कानूनी सलाह लेने की जरूरत है। बता दें कि कई प्रदेश जहां भाजपा की सरकार नहीं है उन्होंने नागरिकता कानून को लागू करने से इनकार कर दिया है। इसमे पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान शामिल हैं।
भाजपा ने दायर की थी याचिका
बता दें कि भाजपा नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन के खिलाफ याचिका दायर की है। दरअसल केरल विधानसभा ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है, इसी के चलते राव ने याचिका दायर की है। जिसपर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा पहली बार सुना जा रहा है कि राज्य सभा के सदस्य ने मुख्यमंत्री के खिलाफ याचिका दायर की है।
नागरिकता यूनियन लिस्ट में शामिल
इससे पहले रविशंकर प्रसाद ने कहा, नागरिकता यूनियन लिस्ट में शामिल है। ये यूनियन लिस्ट में 17 वें स्थान पर हैं। इस पर किसी भी कानून को पारित करने का अधिकार सिर्फ संसद के पास है। किसी राज्य विधानसभा को इस पर कानून बनाने या संशोधन का अधिकार नहीं। केरल की विधानसभा को भी नहीं। संविधान में संसद और राज्य विधानसभाओं को दिए अधिकार स्पष्ट हैं। मैं केरल के मुख्यमंत्री से आग्रह करना चाहूंगा कि वो बेहतर कानूनी सलाह लें। उन्हें जो अधिकार ही नहीं है, वो ना करें।












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