राजस्थान में मिला दुर्लभ खनिजों का विशाल भंडार, अब भारत दे सकेगा चीन की मोनोपोली को टक्कर
Rare Minerals Balotara Rajasthan: राजस्थान में बाड़मेर से अलग होकर नए बने जिले बालोतरा की सिवाना पहाड़ियों में दुर्लभ खनिजों का भंडार मिला है। भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग ने भी इस खोज की अब आधिकारिक पुष्टि कर दी है। बालोतरा में 1 लाख 11 हजार 845 टन दुर्लभ मृदा तत्व ऑक्साइड (Rare Earth Oxide - REO) मौजूद है। इस खोज के साथ ही सिवाना क्षेत्र को राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन में शामिल कर लिया गया है।
एक दशक पहले मिले थे संकेत, अब प्रमाणिकता सिद्ध
बालोतरा के सिवाना क्षेत्र में दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी के संकेत एक दशक पहले ही मिल चुके थे। इसके बाद परमाणु ऊर्जा विभाग ने 2021-22 में इस पर गहन शोध शुरू किया। इस दौरान खनिज भंडार की पुष्टि के लिए जी-4 (प्रारंभिक अन्वेषण) और जी-3 (अगले स्तर का संसाधन आकलन) के तहत कार्य किया गया। अब इस क्षेत्र को 35 दुर्लभ खनिज परियोजनाओं और 195 खोज परियोजनाओं में शामिल किया गया है।

संसद में हुआ खुलासा, देश में खनिज संपदा को लेकर बड़ा कदम
जयपुर ग्रामीण से सांसद राव राजेंद्र सिंह ने संसद में इस बारे में जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया कि राजस्थान के बालोतरा जिले में कठोर चट्टानों के भीतर एक विशाल दुर्लभ खनिज भंडार पाया गया है। इस क्षेत्र में अब परमाणु ऊर्जा विभाग की गहन जांच और अन्वेषण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
चीन से महंगे आयात पर मिलेगी राहत
चीन दुनिया में दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर मोनोपॉली रखता है। भारत हर साल करीब 700 टन दुर्लभ धातुएं चीन से आयात करता है। इसके अलावा, भारत हांगकांग, जापान, अमेरिका, इंग्लैंड, स्वीडन, सिंगापुर और मंगोलिया से भी इनकी सीमित मात्रा में खरीद करता है। कुल मिलाकर भारत का दुर्लभ खनिजों का वार्षिक आयात 1185 टन तक पहुंच चुका है।
बालोतरा के इन क्षेत्रों में हो रही है गहन खोज
परमाणु ऊर्जा विभाग और खनन विशेषज्ञों की टीम ने बालोतरा की कई पहाड़ियों और इलाकों में अन्वेषण कार्य तेज कर दिया है। प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं -
- सेंजी की बेरी मेली
- इंद्राणा सिवाना
- सुकलेश्वर मंदिर क्षेत्र
- निमाड़े की पहाड़ी (दंताला)
- कुंडल-धीरा, मवड़ी, सिलोर दंताला
- कालूड़ी, टापरा, गुड़ानाल, बाछड़ाऊ (धोरीमन्ना)
- गूंगरोट, रेलों की ढाणी, तेलवाड़ा
दुर्लभ खनिजों के उपयोग और रणनीतिक महत्व
रेअर अर्थ मेटल्स का उपयोग परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण, बैटरियों और सैटेलाइट तकनीक में किया जाता है। भारत इस खोज के बाद आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा सकता है। देश को चीन पर निर्भरता कम करने और वैश्विक स्तर पर खनिज आपूर्ति में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलेगा।
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