राहुल गांधी बोले अरे भाई मेरा भाषण सुन लो और ताली तो बजाओ

इसे देश में परिवर्तन की लहर कहें, या फिर कांग्रेस का पतन। अब न तो कांग्रेस की रैलियों में कोई उत्‍साह रहता है और न हीं शहजादे राहुल गांधी को कोई सुनना चाहता है। आलम यह है कि रैली के बीच खुद राहुल गांधी को जनता से कहना पड़ता है, "अरे सुनो भइया सुन तो लो, मैं क्‍या बोल रहा हूं....।" यही नहीं जब जनता उनके भाषण को सुन बोर होने लगती है, तब मजबूरन तालियां बजवाने के लिये राहुल को खुद कहना पड़ता है, "अरे भाई ताली तो बजा दो, बिना तालियों के मजा नहीं आता...."

जी हां ऐसा ही आलम कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी की रामपुर में आयोजित रैली में था। अलीगढ़ में जनता को संबोधित करने के तुरंत बाद उत्‍तर प्रदेश के रामपुर जिले में पहुंचे। वहां तमाम कांग्रेसी कार्यकर्ता व समर्थक उनका इंतजार कर रहे थे। इंतजार तो बहुत हुआ, पर भाषण शायद ही किसी ने ध्‍यान से सुना हो। इस बात का प्रमाण और कोई नहीं बल्कि खुद राहुल गांधी हैं। राहुल गांधी को बार-बार अपने भाषण में जनता से अपील करनी पड़ रही थी कि वो उनकी बात सुनें और समझने के प्रयास करें।

यही नहीं राहुल अपने भाषण में कुछ इस तरह लड़खड़ा गये, कि अंत तक संभल नहीं पाये। राहुल गांधी ने कहा सूचना का अधिकार हमने आपको दिया। अब हम आपको 1 रुपए में भोजन देंगे। क्‍या आपने कभी सूचना का अधिकार का प्रयोग किया। अगर नहीं किया तो आज से ही करिये, क्‍योंकि किसी भी ब्‍यूरोक्रैट या नेता को चैन से मत बैठने दीजिये। हम आपको बता रहे हैं, हमारी लायी हुई स्‍कीम का लाभ उठाइये आप बहुत आगे बढ़ेंगे। फिर देश का गरीब भूखा नहीं रहेगा। अब सवाल यह उठता है कि सूचना का अधिकार को गरीबी दूर करने का हथियार कैसे बनाया जा सकता है।

भाषण के दौरान एक जगह पर राहुल ने कहा, "आर्थिक रूप से हिन्‍दुस्‍तान जितनी तेजी से यूपीए सरकार के नीचे गया है, उतना कभी नहीं गया।" शब्‍दों से साफ है कि यहां पर राहुल की जुबान लड़खड़ा गई है, लेकिन अगर विपक्ष इस लाइन को पकड़ ले तो अर्थ का अनर्थ हो सकता है। विपक्ष सीधे तौर पर कह सकती है, कि यूपीए सरकार ने भारत को नीचे धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

खैर राहुल का कहने का मतलब यह था कि यूपीए के राज में जितनी तेजी से हिन्‍दुस्‍तान आगे बढ़ा है, पिछले 10 सालों में पहले कभी नहीं बढ़ा। जितना आम आदमी को फायदा हुआ, पहले नहीं हुआ।

Rahul Gandhi

क्‍या बोले कुछ स्‍पष्‍ट नहीं

राहुल गांधी के आज के भाषण में कहीं न कहीं अनुभव की कमी स्‍पष्‍ट हो रही थी। जिसका अनुमान आप राहुल के इस वचन को पढ़कर लगा सकते हैं। उन्‍होंने कहा, "2004 में आये इंडिया शाइनिंग का नारा दिया, 2009 में ये आये और फिर नारे लगाये। सब प्रेस वालों ने कहा कांग्रेस पार्टी हारेगी, ओपीनियन पोल ने कहा कांग्रेस हारेगी। मई आया और कांग्रेस पार्टी की सरकार फिर आ गई।" यहां राहुल ने कोई ठोस आधार पेश नहीं किया।

राहुल ने कहा, "चुनाव जीतना है, तो गरीबों की मदद करो, गरीबों का विकास करो, चुनाव जीतोगे। ये लोग क्‍या करते हैं, गरीबों के पास नहीं जाते। गरीबों से बात नहीं करते। मीडिया में बड़े-बड़े बयान देते हैं। 2014 में फिर से आम आदमी की सरकार बनेगी। गरीबों की सरकार बनेगी। सुन लो, 2014 में ऐसी सरकार बनेगी, युवाओं की सरकार बनेगी, जो इस देश को बदल डालेगी। कैसे बनेगी, जो बिलकुल पीछे खड़ा है, उसको शक्ति देकर बदलेगी। आपको शक्ति देकर बदलेगी, आपको मजबूत करके बदलेगी। आप दूर-दूर से आये, दबाव था तब भी आये। आप डरने वाले नहीं, मैं भी डरने वाला नहीं हूं। भईया डराने वाला भी नहीं है कोई। आप घबराओ नहीं, कांग्रेस पार्टी जीतेगी आपका काम करेगी। बहुत बहुत धन्‍यवाद नमस्‍कार।"

कांग्रेस युवराज के भाषण की अंतिम लाइनों को पढ़ने के बाद कहीं भी ऐसा नहीं लगा कि उन्‍होंने कोई ठोस बात रखी हो और उसे एक कड़ी के रूप में पिरोकर आगे बढ़ाया हो। सच पूछिए तो राहुल के आज के दो भाषणों में महज खानापूर्ति दिखाई दे रही थी। और अगर राहुल ऐसे ही खानापूर्ति के लिये भाषण देते रहे, तो 2014 में निश्चित रूप से कांग्रेस का दीया बुझ जायेगा। और इस बार दीया बुझा तो सिर्फ राहुल गांधी नहीं, बल्कि देश भर में तमाम कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं का करियर अंधेरे में पड़ जायेगा।

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