यूपी में सपा-बसपा को लेकर रामविलास पासवान ने की बड़ी भविष्यवाणी
नई दिल्ली। बिहार में एनडीए की सहयोगी पार्टी एलजेपी के प्रमुख रामविलास पासवान ने दावा किया है कि, उनका गठबंधन इस चुनाव में 2014 की अपेक्षा अधिक बेहतर प्रदर्शन करेगा। उन्होंने दावा है कि, उनका एनडीए गठबंधन बिहार में कम से कम 35 सीटें जीतेगा। उन्होंने महागठबंधन को लेकर भी एक बड़ा बयान दिया है। पासवान ने भविष्यवाणी की है कि, यूपी में महागठबंधन में लोकसभा चुनाव लड़ रही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी अगला चुनाव अलग-अलग लड़ेंगी।

दलित कार्ड खेलना मायावती जैसे व्यक्तियों की आदत है
इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में जब रामविलास पासवान से पूछा गया कि, मायावती ने चुनाव आय़ोग द्वारा उनके उपर लगाए गए प्रतिबंध की आलोचना की थी आपका इस पर क्या कहना है? इस सवाल के जवाब में पासवान ने कहा कि, चुनाव आयोग एक स्वायत्त निकाय है। ऐसे संस्थानों की आलोचना करना और दलित कार्ड खेलना मायावती जैसे व्यक्तियों की आदत है। मैं यह भी भविष्यवाणी करना चाहूंगा कि सपा और बसपा अगले विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ेंगे।

बिहार में महागठबंधन पूरी तरह से फेल है
बिहार के महागठबंधन के लेकर पासवान ने कहा कि, महागठबंधन पूरी तरह से फेल है। तेजस्वी यादव कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मंच साझा नहीं कर रहे हैं। तेजप्रताप यादव अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव प्रचार कर रहे हैं। दूसरी तरफ, नीतीश कुमार के फिर से एनडीए का हिस्सा बनना एक आदर्श संयोजन है और आपसी वोट ट्रांसफर होने के सभी संकेत हैं। अपने उपर लगे भाई-भतीजावाद की राजनीति पर बोलते हुए पासवान ने कहा कि, मेरे भाई रामचंद्र पासवान समस्तीपुर से और मेरा बेटे चिराग जमुई से मौजूदा सांसद हैं। वे लोगों द्वारा चुने गए थे।

लालू यादव की गैरमौजूदगी से एनडीए को फर्क नहीं पड़ता
मेरे उपर हाजीपुर सीट को लेकर प्रेशर था। मेरे बाद (2014 में रामविलास पासवान ने सीट जीती थी) यहां के लोग चाहते थे कि, इस सीट से मेरा बेटा या मेरी पत्नी रीना चुनाव लड़े। लेकिन हमने अपने छोटे भाई पशुपति कुमार पारस को टिकट देने का फैसला किया क्योंकि उनके जीतने की अधिक संभावना है। वहीं जब पासवान से यह पूछा गया किस लालू यादव की गैरमौजूदगी से क्या एनडीए को फायदा होगा? तो इसके जवाब में पासवान ने कहा कि, यह शायद ही मायने रखता है। 2014 के चुनाव के दौरान जब वह मौजूद थे, तो वह राबड़ी देवी को सारण से और मीसा भारती को पाटलिपुत्र से जीतने में मदद नहीं कर सके। 2009 में वे जद (यू) के रंजन यादव से खुद चुनाव हार गए थे।
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