Ram Temple: प्राण-प्रतिष्ठा के बहिष्कार के बाद कांग्रेस पर मंडराया संकट, इस राज्य में 'विलुप्त' होने का खतरा?
Ram temple inauguration Ayodhya: अयोध्या के राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में नहीं शामिल होने का फैसला कांग्रेस को गुजरात में बहुत भारी पड़ता नजर आ रहा है। पार्टी ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार करके अपनी प्रदेश इकाई में खलबली मचा दी है। नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है और उनके पलायन का सिलसिला शुरू हो चुका है।
गुजरात बीजेपी ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की मायूसी को भुनाने के लिए राज्यव्यापी अभियान भी शुरू कर दिया है। मंगलवार को पार्टी ने दीवारों पर पेंटिंग के माध्यम से देशभर में इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत कर दी है।

कांग्रेस के नाराज नेताओं पर बीजेपी की नजर
इस दौरान भाजपा की नजर अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होने के पार्टी के फैसले से नाराज चल रहे कांग्रेस नेताओं पर पड़ चुकी है।
कांग्रेसी नेताओं-कार्यकर्ताओं का बीजेपी में शामिल होने का सिलसिला शुरू
मंगलवार को राजकोट जिला पंचायत में विपक्षी दल के नेता अर्जुन खटारिया अपने करीब एक हजार समर्थकों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए हैं।
गांधीनगर स्थित बीजेपी दफ्तर में कमल थामने वाले कांग्रेस नेताओं में पार्टी के कई पदाधिकारी और कोऑपरेटिव में पार्टी के सदस्य भी शामिल हैं।
लोकसभा चुनावों से पहले कुछ बड़े नेता और एमएलए भी छोड़ सकते हैं कांग्रेस
खटारिया ने मीडिया को स्पष्ट तौर पर बताया कि कांग्रेस नेतृत्व ने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन को लेकर जो स्टैंड लिया है, उन्होंने उसी की वजह से पार्टी छोड़ने का फैसला किया है।
ईटी ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से बताया है कि लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। जानकारी के मुताबिक कुछ कांग्रेसी विधायक भी भाजपा में शामिल होने का मन बना रहे हैं।
गुजरात में कांग्रेस के सियासी तौर पर 'विलुप्त' होने का खतरा?
सवाल है कि अगर अब गुजरात में कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी से मुंह फेरा तो प्रदेश में राजनीतिक तौर पर उसके अप्रसांगिक होने का खतरा मंडराने लगेगा। क्योंकि, गुजरात में पिछले कई चुनावों से एक विपक्षी दल के रूप में भी कांग्रेस की ताकत लगातार घटती चली गई है।
पिछले कई चुनावों से गुजरात में कांग्रेस का प्रदर्शन?
2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी 182 सीटों में से सिर्फ 17 सीटों पर सिमट कर रह गई है। तब उसे मात्र 27.28% वोट मिले थे। वहीं बीजेपी ने प्रदेश के सारे पुराने चुनावी रिकॉर्ड तोड़ते हुए इनमें से 156 सीटों पर कब्जा किया था और उसे 52.5% वोट मिले थे।
जबकि, पांच साल पहले ही यानी 2017 के गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने न सिर्फ 41.44% वोट हासिल किए थे, बल्कि उसे 77 सीटें भी मिली थीं।
अलबत्ता लोकसभा चुनावों में तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चेहरे की वजह से कांग्रेस समेत कोई भी विपक्षी पार्टी पिछले दो चुनावों से एक भी सीट नहीं ही जीत पाई है। लेकिन, कांग्रेस के लिए चिंता की बात ये है कि पार्टी का वोट शेयर भी गिरने से रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को जहां लगभग 32% वोट मिले थे, उससे पांच साल पहले यानी 2014 में उसका वोट शेयर करीब 33% रहा था। जबकि, 2014 में भाजपा को लगभग 60% वोट हासिल हुए थे, जो कि 2019 में बढ़कर 63% से भी ज्यादा पहुंच गए।
कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेताओं को भी किया नाराज
अयोध्या पर कांग्रेस आलाकमान के फैसले को लेकर गुजरात में पार्टी के नेताओं की चिंता और मायूसी के सबसे बड़े उदाहरण के तौर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पोरबंदर से पार्टी एमएलए अर्जुन मोठवाड़िया को लिया जा सकता है।
उन्हें अबतक पीएम मोदी का कट्टर विरोधी माना जाता रहा है, लेकिन अयोध्या पर कांग्रेस के फैसले का विरोध करने वाले गुजरात के पार्टी नेताओं में वे सबसे पहले थे। उन्होंने एक्स पर स्पष्ट लिखा, 'कांग्रेस को ऐसे राजनीतिक फैसले लेने से बचना चाहिए।'
गुजरात में कांग्रेस से और पलायन का खतरा
वैसे गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शक्तिसिंह गोहिल और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश जैसे नेता लगातार पार्टी के फैसले को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी पर इस मसले को लेकर राजनीति करने के आरोप लगा रहे हैं।
लेकिन, गुजरात में कांग्रेस की जमीनी हालात ये है कि कुछ नेता दबे-जुबान में मान रहे हैं कि इस मुद्दे पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के पलायन को रोक पाना उनके हाथ से बाहर होता जा रहा है।












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