Ram Mandir Ayodhya: 'शांति से एक साथ....', प्राण प्रतिष्ठा पर मुस्लिमों-ईसाइयों से हिमंत सरमा की खास अपील

अयोध्या में भगवान राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह से ठीक पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मुसलमानों और ईसाइयों से शांति के साथ एकजुटता बनाए रखने के लिए विशेष प्रार्थना आयोजित करने की अपील की है।

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर में हो रहा प्राण प्रतिष्ठा समारोह सिर्फ हिंदुओं की विजय नहीं है बल्कि, यह भारतीय सभ्यता की विजय है।

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असम के सीएम ने मुसलमानों और ईसाइयों से की अपील
असम के मुख्यमंत्री ने कहा है, 'मैं मुसलमानों और ईसाइयों से अपील करता हूं कि कल विशेष प्रार्थनाएं आयोजित करें, ताकि हम सभी, हर जाति और समुदाय के लोग शांति से एक साथ रह सकें। यह हिंदुओं की विजय नहीं है बल्कि, भारतीय सभ्यता की विजय है....।'

यह एक धर्म की विजय नहीं है- हिमंत बिस्वा सरमा
उन्होंने आगे कहा, 'यह एक धर्म की विजय नहीं है। एक आक्रमणकारी ने एक भारतीय पूजा स्थल को तोड़ दिया। बाबर एक आक्रमणकारी था। उसने सिर्फ हिंदुओं पर हमले नहीं किए। ब्रिटिश उपनिवेशवादियों और बाबर में कोई अंतर नहीं है। बाबर एक विदेश शक्ति था।'

असम में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए शिक्षण संस्थानों में छुट्टी
सीएम हिमंत ने रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान इस तरह की अपील की है। अयोध्या में होने जा रहे इस ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देखते हुए असम की बीजेपी सरकार ने सोमवार को राज्य के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छुट्टी घोषित कर दी है। इसमें निजी शिक्षण संस्थान भी शामिल किए गए हैं।

सरकारी दफ्तर भी दिन के 2.30 बजे तक बंद रहेंगे
यही नहीं हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए भी सरकारी दफ्तरों में 2.30 बजे दिन तक के लिए अवकाश घोषित कर दिया है।

यही नहीं असम सरकार ने सोमवार को ड्राई डे भी घोषित कर दिया है, जिस दौरान शराब की खरीद-बिक्री पर रोक रहेगी। यही नहीं शाम 4 बजे तक मछली और मीट की दुकानें भी बंद रहेंगी। रेस्टोरेंट और होटलों में दिन के 2 बजे तक मांसाहारी खाना परोसने पर भी रोक लगा दी गई है।

संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम
मुख्यमंत्री ने कहा है, 'हम व्यापारिक प्रतिष्ठानों से अपील करते हैं के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान अपनी दुकाने बंद रखें।' राज्य सरकार का कहना है कि उसकी ओर से किसी भी तरह की उपद्रव की घटनाओं को रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

अयोध्या के राम मंदिर में जहां सोमवार को भगवान राम लला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है, वहां 6, दिसंबर 1992 से पहले एक बाबरी मस्जिद हुआ करती थी। 16वीं शताब्दी के उस विवादित ढांचे को लेकर करीब 500 वर्षों तक हिंदुओं ने संघर्ष किया।

करीब 150 वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद 9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने वह जमीन हिंदुओं को सौंप दी, जिस स्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है।

हिंदुओं की सदा से यह मान्यता रही है कि वह स्थान भगवान श्रीराम की पवित्र जन्मभूमि है। लेकिन, मुस्लिम पक्ष उस स्थान पर मालिकाना हक जता रहा था। बताया जाता है कि बाबरी मस्जिद का निर्माण मुगल शासक बाबर के कमांडर मीर बाकी ने 1528-29 में करवाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही दूसरे स्थान पर जमीन उपलब्ध करवाने का यूपी सरकार को आदेश दिया था। वहां भी बाबरी ढांचे की जगह एक विशाल मस्जिद बनाई जा रही है।

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