38 मौतों के बावजूद सीएम खट्टर इसलिए बच गए पॉलिटिकल जेल जाने से

38 मौतों के बावजूद सीएम खट्टर इसलिए बच गए पॉलिटिकल जेल जाने से

नई दिल्ली। डेरा सच्‍चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को स्‍पेशल सीबीआई जज ने सोमवार को साध्‍वी रेप केस में 20 साल कैद की सजा सुनाई। सजा का ऐलान होने से कुछ देर पहले हिंसा की इक्‍का-दुक्‍का घटनाएं हुईं, लेकिन ज्‍यादातर जगह कानून का राज कायम दिखा। शुक्रवार से ही हरियाणा पुलिस कड़े इंतजाम करने में लगी थी, जिससे कि दोबारा वैसे हालात न बने, जैसे पंचकूला में राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के वक्‍त बन गए थे। उस दिन हिंसा में 38 लोगों की मौत हुई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए। बाबा समर्थकों ने करोड़ों की संपत्ति को आग लगा दी थी। हिंसा के बाद पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा विलेन बनकर अगर कोई उभरा, तो वह थे हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर। हालांकि, विपक्ष उतने बेहतर तरीके से पंचकूला हिंसा पर तीखे तेवर नहीं अपना सका, पर मीडिया ने उनकी तीखी आलोचना की, लेकिन खट्टर अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे। यह सच है कि मनोहर लाल खट्टर से स्थिति को भांपने में चूक हुई, यह भी सच है कि उन्‍हें वोट बैंक की चिंता सता रही है, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह की नजर में खट्टर को न हटाए जाने का कारण कुछ और है। आइए आपको बताते हैं कि हरियाणा में गृहयुद्ध जैसे हालात बनने के बाद खट्टर को जीवनदान कैसे मिला।

Ram Rahim sentenced Dera violence Options before Haryana CM were limited feels BJP

ये हैं वो कारण, जिनसे मनोहर लाल खट्टर को मिला जीवनदान

ये हैं वो कारण, जिनसे मनोहर लाल खट्टर को मिला जीवनदान

  • मनोहर लाल खट्टर ने राम रहीम को लेकर मची हिंसा में सबसे पहले और सबसे बेहतर काम यही किया, हर कदम की जानकारी पार्टी लीडरशिप को दी।
  • इसमें शक नहीं कि राम रहीम को पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट में दोषी करार दिए जाने से पहले जो भक्‍तों का जो जनसैलाब वहां उमड़ा उसे रोकने और कड़ी कार्रवाई न करने के निर्देश पार्टी लीडरशिप के ही थे।
  • मारे गए लोग दंगाई

    मारे गए लोग दंगाई

    • हिंसा में मारे गए सभी 38 लोग वे थे, जो हिंसा कर रहे थे। खट्टर सरकार के पक्ष में जो बात गई, वह यही थी कि हिंसा में कोई आम नागरिक न तो मारा गया और न ही घायल हुआ।
    • जिस वक्‍त पंचकूला कोर्ट ने राम रहीम को दोषी करार दिया उस वक्‍त राम रहीम के करीब 7 से 8 लाख समर्थक वहां मौजूद थे। इतने बड़े जनसैलाब को कंट्रोल कर लेना भी खट्टर के पक्ष में गया।
    • विपक्ष रहा नरम

      विपक्ष रहा नरम

      • कुछ लोग यह तर्क यह भी है कि उन्‍हें वहां पहुंचने क्‍यों दिया गया? लेकिन इतने लोगों को पंचकूला पहुंचने से रोकना इतना भी आसान काम नहीं था। वैसे भी पार्टी लीडरशिप के फैसले के हिसाब से खट्टर सरकार ने शुरू में नरम रुख दिखाया
      • हरियाणा की खट्टर सरकार को लेकर विपक्ष के तेवर उतने तीखे नहीं थे। यही कारण रहा कि मोदी-शाह ने भी खट्टर को न हटाने में ही भलाई समझी। ऐसा करने से पीएम मोदी की छवि पर असर पड़ता।

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