'मैंने राम रहीम की फिल्म देखी और फिर लगातार डेरे में आने लगी'
राम रहीम के जेल जाने के बाद बदल गया है डेरा समर्थकों का रुख, अब छोड़ने लगे हैं लोग डेरा का साथ
चंडीगढ़। डेरा सच्चा सौदा के चीफ राम रहीम को रेप के आरोप में 20 साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनके समर्थकों और भक्तों की सोच में भी अब बदलाव होने लगा है। एक तरफ जहां बड़ी संख्या में लोग राम रहीम और डेरा से मुंह मोड़ चुके हैं तो दूसरी तरफ एक वर्ग ऐसा भी है जिसने डेरा और राम रहीम पर अटूट विश्वास करके उसका साथ देना शुरू किया था। राम रहीम के प्रति लोगों की आस्था का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उसकी फिल्म को देखने के बाद लोगों ने डेरा जाना शुरू कर दिया था।

राम रहीम की फिल्म से हुई थीं प्रेरित
21 वर्षीय अर्चना(बदला हुआ नाम) कहती हैं कि मैंने तब डेरा जाना शुरू किया था जब मैंने राम रहीम की फिल्म देखी थी, इस फिल्म में उन्होंने छत्तीसगढ़ के आदिवासी का रोल किया था, जिसके बाद मैं उनसे प्रेरित हो गई थी। 2015 में जब फिल्म रीलीज हुई थी तो पूजा अपनी मां के साथ इस फिल्म को देखने के लिए गई थीं। वह बताती हैं कि हमें काफी अच्छा लगा था फिल्म को देखकर, जिसके बाद हम डेरा गए और हमें वहा इंसान का उपनाम दिया गया। इसके बाद यहां सतसंग हुआ, बच्चों ने डांस किया। इसके बाद से ही मैं यहां अपनी मां के साथ आने लगी थी। पूजा कहती हैं मुझे आरोपों के बारे में कुछ भी नहीं पता था, हमने कभी भी डेरा में रात नहीं गुजारी थी, हम किसी भी विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं।
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डेरा में जाकर नशे की आदत छूटी
29 वर्षीय मंजीत सिंह जोकि डेरा समर्थक थे का कहना है कि वह एक बार फिर से सिख धर्म की ओर वापस जा रहे हैं। मंजीत गुरमीत राम रहीम के 15 वर्ष पुराने रेप के मामले में दोषी करार दिए जाने से काफी आहत हैं और अब वह डेरा से हमेशा के लिए दूर चले जाना चाहते हैं।डीएनए अखबार से बात करते हुए मंजीत सिंह ने डेरा के साथ अपने अनुभव को साझा किया है। मंजीत सिंह सलबपुत्र बस स्टैंड पर काम करते हैं, उन्होंने दो वर्ष पहले डेरा का दामन थामा था, डेरा के बारे में जो अच्छी बातें उन्होंने सुनी थी, उसके बाद ही उन्होंने डेरा में जाने का फैसला लिया था। मंजीत बताते हैं कि मैंने सुना था कि लोग यहां शराब पीना, मांस खाना छोड़ देते हैं, यहां गरीब लोगों का सामूहिक विवाह कराया जाता है। यह सब सुनने के बाद ही मैंने डेरा जाना शुरू किया था, मैंने बाबा को पसंद करना शुरू कर दिया था। मंजीत बताते हैं कि वह पहले खुद नशे के आदि थे, लेकिन यहां आने के बाद उन्होंने नशा करना छोड़ दिया था, यहां आने के बाद मुझे इंसान नाम दिया गया था।

विश्वास उठ गया है
मंजीत बताते हैं कि कुछ लोग मुझसे राम रहीम के बारे में आरोपों के बारे में बताते थे, लेकिन जब भी मैं बाबाजी को देखता था तो मुझे लगता था कि ये सारे आरोप झूठे हैं। लेकिन अब मंजीत का कहना है कि ये सच ही है। इस सुबह जब मैंने अखबार पढ़ा तो उसमे लिखा था कि 18 लड़कियों को डेरा के चंगुल से छुड़ाया गया, जिन्हें मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है। विश्वास उठ गया है, अब मैं फिर से भरोसा नहीं कर सकता हूं।

अभी भी कुछ लोगों को डेरा पर भरोसा है
आपको बता दें कि जिस दिन राम रहीम को कोर्ट ने दोषी करार दिया था उसके बाद राम रहीम के समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी, पंजाब और हरियाणा में कई जगह पर हिंसा की घटनाएं हुई। डेरा का दावा है कि उसके 60 लाख समर्थक हैं। एक तरफ जहां युवा डेरा समर्थकों का भरोसा टूटा है तो दूसरी तरफ एक वर्ग ऐसा भी है जो 70 वर्ष पुराने डेरा का अभी भी समर्थक है। इन लोगों को यकी नहीं होता है कि जिस तरह से समाज में डेरा की प्रतिष्ठा है और तमाम सामाजिक काम किए गए हैं वह उनका भरोसा अभी भी बनाए हुए है।

1946 से समर्थक हैं
रामजी इंसान जोकि 35 वर्ष के हैं और पेशे से इंजीनियर हैं, उनका कहना है कि वह अभी से डेरा के समर्थक नहीं है, वह 1946 से डेरा का समर्थन कर रहे हैं। डेरा हमारे गांव का एक बड़ा हिस्सा है। 25 अगस्त को जब कोर्ट ने राम रहीम को दोषी ठहराया उसके बाद से लोग अब डेरा से मुंह मोड़ने लगे हैं। रामजी कहते हैं कि हम अभी भी इंतजार कर रहे हैं और सबकुछ देख रहे हैं। डेरा फिर से जाने के सवाल पर वह कहते हैं कि अभी कुछ नहीं कह सकते हैं, आगे देखेंगे।












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