राम रहीम: इन 5 बातों पर दिया होता ध्यान, तो नहीं सुलगता हरियाणा
पांच चूक, जिनकी वजह से जल गया हरियाणा
नई दिल्ली। शुक्रवार को हरियाणा के पंचकुला में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत के जज जगदीप सिंह ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह पर साध्वी से बलात्कार के मामले में उसे दोषी करार दिया।अदालत का फैसला आते ही डेरा के समर्थकों ने ऐसा उपद्रव किया कि हरियाणा और पंजाब जल उठा। पड़ोस के राज्य दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान में भी दहशत पसर गई। अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है और 250 से ज्यादा घायल हैं। सैकड़ों वाहन जला दिए गए, दुकानें जला दी गई, लोगों के घर जल गए। जान-माल के इतने नुकसान के बाद इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा हरियाणा सरकार के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार इस बात की जांच की बात कह रही है कि चूक कहां हुई लेकिन ये पांच बातें यकीनन ऐसी हैं जहां चूक साफ दिख रही है और इन पर पुलिस और सरकार ने ध्यान दिया होता तो शायद हरियाणा इस तरह से ना जलता।


धारा 144 महज दिखावे के लिए
सीबीआई के फैसले आने से पहले ही हरियाणा के ज्यादातर शहरों में धाारा 144 लगा दी गई थी। इसके बावजूद डेरा समर्थक जुटते रहे। धारा 144 सिर्फ नाम के लिए लगाई हुई दिखी। यहां तक कि हरियाणा सरकार के मंत्री रामविलास शर्मा ने मीडिया में ये तक कहा कि श्रद्धालुओं पर धारा 144 नहीं होती और गुरमीत समर्थकों के खाने-पीने का इंतजाम सरकार करेगी। इससे भी पता चलता है कि सरकार ने गुरमीत समर्थकों को इकट्ठा होने से रोकने के बजाय अप्रत्यक्ष तौर पर उनका हौंसला ही बढ़ाया। ऐसे में एक तरफ धारा 144 लगी रही और दूसरी तरफ गुरमीत के समर्थक जगह-जगह जुटते रहे।
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सेना को बुलाया, तैनात नहीं किया
हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस और सरकार को चेताया था और अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सेना की तैनाती को कहा था। कोर्ट की फटकार के बाद भी सेना को सिर्फ कॉल किया गया, तैनाती नहीं की गई। ऐसे में जब हिंसा शुरु हुआ तो ना सिर्फ पुलिस बल्कि सेना भी बेबस दिखी। इतना ही नहीं खुफिया एंजेसियों ने भी इस बात की चेतावनी दी थी डेरा के समर्थक बवाल कर सकते हैं लेकिन सरकार ने इन इनपुट पर भी ध्यान देने की जहमत उठाना जरूरी नहीं समझा।

डेरा समर्थकों ने आराम से जुटाए हथियार
फैसला आने से तीन दिन पहले पंजाब पुलिस ने केंद्र को भेजी चिट्ठी में इस बात को लिखा है कि डेरा समर्थक पेट्रोल बम और हथियार इकट्ठा कर रहे हैं। ऐसे में केंद्र राज्य को अर्धसैनिक बलों की ज्यादा कंपनियां भेजे। हथियार हरियाणा में भी जुटाए जा रहे थे, लाठी-डंडे और हथियार लिए उपद्रवी सड़कों के किनारे थे, मीडिया में भी ये तस्वीरें थी लेकिन गुरुवार को हरियाणा के गृह सचिव ने डेरा समर्थकों के हथियार इकट्ठा करने की कोई जनकारी होने से इंकार कर दिया।
हिंसा हुई तो इन उपद्रवियों ने जमकर हथियार चलाए, इन्होंने पुलिस के साथ-साथ मीडियाकर्मियों को भी दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। अब सवाल ये है कि पंजाब पुलिस को पता था, मीडिया में लगातार तस्वीरें आ रही थीं तो हरियाणा पुलिस को सड़कों के किनारे हथियार लिए खड़े डेरा समर्थक क्यों नहीं दिखे।

खट्टर सरकार का रोल, गुरमीत का 300 गाड़ियों का काफिला
शुक्रवार को फैसला आने के बाद भी और उससे पहले भी हरियाणा सरकार पूरी तरह से फेल दिखी। लगातार तीन-तार दिन से राज्य में तनाव के बावजूद हरियाणा सरकार सोई दिखी। सरकार गुरमीत के आगे इतनी बेबस थी कि वो 300 से ज्यादा गाड़ियों के काफिले के साथ कोर्ट में पेशी के लिए निकला। जगह-जगह उसके समर्थक थे और इन 300 गाड़ियों में बाबा के शक्ति प्रदर्शन ने उनका हौंसला ही बढ़ाया।
फैसला आने के बाद डेरा उपद्रवियों ने हिंसा की तब भी पुलिस बिल्कुल असहाय दिखी। उपद्रवियों ने सीनियर अधिकारियों के साथ मारपीट की और कई जगह अधिकारी जान बचाकर दौड़े। ऐसे में सवाल ये है कि क्यों पुलिस इतना बेबस थी। शुक्रवार शाम को सीएम खट्टर ने भी माना कि सरकार से स्थिति से निपटने में चूक हुई।

हाईकोर्ट के आदेशों की भी अनदेखी
हाईकोर्ट ने लगातार इस बात के लिए हरियाणा सरकार को चेताया कि राज्य में हालात बिगड़ सकते हैं। कोर्ट ने हरियाणा पुलिस को जमकर फटकारते हुए 144 के बावजूद लोगों के इकट्ठा होने पर ये तक कहा कि डीजीपी को सस्पेंड क्यों ना किया जाए। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि फैसले से पहले पंचकूला का डेरा समर्थकों से खाली करवा लिया जाए। पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद डेरा को खाली कराना जरूरी नहीं समझा और इसका नतीजा ये हुआ कि गुरमीत के खिलाफ फैसला आते ही प्रदेश में भंयकर उपद्रव हुआ।












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