Ram Mandir: सोनिया-खड़गे का प्राण-प्रतिष्ठा में जाने से इंकार, कांग्रेस के इन 7 नेताओं ने पकड़ी अलग राह!
हाइलाइट्स
- प्राण-प्रतिष्ठा के निमंत्रण अस्वीकार करने पर कांग्रेस के अपने खेमे में नाराजगी
- अर्धनिर्मित मंदिर का उद्घाटन केवल चुनावी लाभ के लिए- कांग्रेस
- सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी को भेजा गया था आमंत्रण
Ram Mandir Inauguration, Congress rejected the Invitation: कांग्रेस ने राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण 'ससम्मान' अस्वीकार कर दिया है। बीजेपी इसे लेकर कांग्रेस पर तो निशाना साध ही रही है लेकिन कांग्रेस के अपने खेमे में भी इसे लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। कांग्रेस के कई नेताओं ने निमंत्रण स्वीकार ना करने को लेकर निराशा जाहिर की है।

कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर कहा है कि जो भी इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहते हैं प्राण-प्रतिष्ठा में जा सकते हैं। हम किसी पर पाबंदी नहीं लगा रहे। कांग्रेस ने निमंत्रण अस्वीकार करते हुए कहा, "एक अर्धनिर्मित मंदिर का उद्घाटन केवल चुनावी लाभ उठाने के लिए किया जा रहा है।"
कांग्रेस के अलावा तृणमूल कांग्रेस और महाराष्ट्र की एनसीपी भी प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल नहीं होगी। एनसीपी ने कहा है कि किसी पार्टी का कार्यक्रम में शामिल होना उसका निजी फैसला है जबकि टीएमसी ने कहा कि इस मुद्दे पर "बीजेपी राजनीति कर रही है।"
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कांग्रेस के कुछ नेताओं में नाराजगी
कांग्रेस आलाकमान के निमंत्रण को अस्वीकार करने के बाद कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "राम मंदिर और भगवान राम सबके हैं, राम मंदिर को बीजेपी, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद या बजरंग दल का मान लेना दुर्भाग्य की बात है।"
गुजरात से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन मोढवाडिया ने भी इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "यह देशवासियों की आस्था और विश्वास का विषय है। कांग्रेस नेतृत्व में ऐसा राजनीतिक निर्णय लेने से दूर रहना चाहिए था।"
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कांग्रेस के पूर्व विधायक लक्ष्मण सिंह ने कहा, "जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन में लड़ाई लड़ी वही फैसला लेंगे। जहां तक निमंत्रण का सवाल है तो इसे अस्वीकार करने का क्या मतलब है? हम क्या संदेश भेज रहे हैं? जब राजीव गांधी ने अनलॉक किया तो आप कौन होते हैं इनकार करने वाले? अगर हमारा नेतृत्व ऐसे सलाहकार रखेगा तो नतीजे वही होंगे जो हमने अब तक देखे हैं...नुकसान हो चुका है, चुनाव में दिखेगा। ये जीत लंबी लड़ाई के बाद मिली है।" जबकि उनके भाई और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने पार्टी के फैसले का समर्थन किया है।
वहीं, पार्टी की हिमाचल प्रदेश इकाई की प्रमुख प्रतिभा सिंह ने मंदिर निर्माण की पहल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राम मंदिर निर्माण की पहल वाकई सराहनीय है। मेरे दिवंगत पति और हिमाचल प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की देवी-देवताओं में गहरी आस्था थी और उन्होंने राज्य में कई मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया।"
उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह को एक संयुक्त निमंत्रण मिला है और उन्होंने 22 जनवरी को अयोध्या में अभिषेक समारोह में भाग लेने के बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया है।
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हालांकि, कांग्रेस आलाकमान की ओर से निमंत्रण ठुकराने से पहले 8 जनवरी को प्रतिभा सिंह के बेटे और हिमाचल सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अपना रुख साफ करते हुए कहा था कि वह अयोध्या में राम मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होंगे। उन्होंने कहा था, "यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है और मैं हिमाचल प्रदेश से आमंत्रित कुछ लोगों में शामिल होने के लिए खुद को भाग्यशाली मानता हूं। मुझे और मेरे परिवार को यह सम्मान देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद को धन्यवाद देता हूं।"
उधर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे और छिंदवाड़ा से सांसद नकुलनाथ राम मय दिखे। वीडियो शेयर कर उन्होंने लिखा, "4 करोड़ 31 लाख राम नाम लिखकर छिंदवाड़ा इतिहास रचने जा रहा है। आज उसी क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय कमलनाथ जी के साथ सिमरिया हनुमान मंदिर पहुंचकर पत्रक में राम नाम लिखा। आप सभी से अपील करता हूं कि इस ऐतिहासिक कार्य में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करें। राम राम।
सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी को मिला था निमंत्रण
अयोध्या के राम मंदिर में 22 जनवरी को होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी को निमंत्रण भेजा गया था। 10 जनवरी को पत्र लिख कर कांग्रेस ने 'ससम्मान' इस निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को 'बीजेपी-आरएसएस' का कार्यक्रम कहकर अर्धनिर्मित मंदिर के उद्घाटन में जाने से इनकार कर दिया।
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