कौन हैं प्रशांत पांडे जो बना रहे हैं राम मंदिर के लिए एक और अनोखी मूर्ति? जानिए कहां होगी स्थापना
Ram Mandir Darbar Statue: अयोध्या का राम मंदिर न सिर्फ भव्यता का प्रतीक बन रहा है, बल्कि यह हमारी आस्था और परंपराओं का एक जीवंत उदाहरण भी है। अब इसी मंदिर की पहली मंजिल पर स्थापित होने वाला है राम दरबार, जिसमें भगवान राम के साथ माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और भक्त हनुमान की मूर्तियां होंगी।
यह राम दरबार सिर्फ पत्थरों की मूर्तियां नहीं होगा, बल्कि उन मूल्यों और भावनाओं का प्रतीक बनेगा, जो रामायण के पात्रों से जुड़ी हुई हैं। इन मूर्तियों को जयपुर में सफेद संगमरमर से तराशा जा रहा है, और इस पवित्र कार्य का नेतृत्व कर रहे हैं देश के प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रशांत पांडे, जो अपनी कला को ईश्वर की सेवा मानते हैं।

करीब 20 कारीगरों की टीम दिन-रात मेहनत कर रही है ताकि हर मूर्ति में वो जीवंतता और भक्ति नजर आए, जो राम दरबार को निहारने वालों के मन को भावविभोर कर दे। राम मंदिर की यह पहल न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और कलात्मक रूप से भी ऐतिहासिक मानी जा रही है।
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5 फीट की होगी भगवान राम की मूर्ति
जयपुर के सफेद संगमरमर से बनाई जा रही भगवान राम की मूर्ति लगभग 5 फीट ऊंची होगी। राम दरबार में सिर्फ भगवान राम ही नहीं, बल्कि माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और भगवान हनुमान की मूर्तियां भी शामिल होंगी। ये सभी मूर्तियां मिलकर राम दरबार को एक भव्य रूप देंगी।
'यह सिर्फ मूर्तिकला नहीं, आस्था का काम है'
प्रशांत पांडे ने बताया कि हर मूर्ति को बनाते समय हम सिर्फ हथौड़ा और छेनी नहीं चला रहे, बल्कि हर स्ट्रोक में भक्ति और श्रद्धा है। उन्होंने कहा, "हम भगवान राम की सिर्फ मूर्ति नहीं बना रहे, बल्कि उनके जीवन मूल्यों और आदर्शों की कहानी पत्थर में उकेर रहे हैं।"
मंदिर का निर्माण तेजी से जारी, अगले साल तक हो सकता है पूरा
राम मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उम्मीद है कि मंदिर का बाकी हिस्सा अगले साल तक पूरा हो जाएगा। मंदिर के परकोटे में भी खास मूर्तियां लगाई जाएंगी, जिनमें भगवान सूर्य, गणेश, हनुमान, माता दुर्गा और मां अन्नपूर्णा की मूर्तियां शामिल हैं।
अगले महीने होगा अभिषेक
राम दरबार को मंदिर के आध्यात्मिक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। अगले महीने एक खास अभिषेक समारोह होगा, जिसमें भगवान राम को राजा के रूप में प्रतीकात्मक रूप से स्थापित किया जाएगा। यह पल मंदिर की आध्यात्मिक यात्रा को उनके बाल रूप से राजगद्दी तक की कहानी में बदल देगा।
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