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वेंकैया नायडू बोले- जल्दबाजी में नहीं लिया महाभियोग प्रस्ताव खारिज करने का फैसला

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ, कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी दलों की ओर से लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने को लेकर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा चेयरमैन वेंकैया नायडू ने चुप्पी तोडी है। उपराष्ट्रपति ने कहा है कि 1968 के न्यायाधीश जांच अधिनियम और संविधान के अंतर्गत तमाम पहलुओं को देखने के बाद उन्होंने सीजेआई के खिलाप महाभियोग को खारिज किया है। सोमवार को एम.वेंकैया नायडू के महाभियोग प्रस्ताव खारिज करने पर विपक्ष ने उनके इस फैसले पर सवाल किए थे।

प्रस्ताव खारिज करते हुए बताई थी ये वजहें

प्रस्ताव खारिज करते हुए बताई थी ये वजहें

सोमवार को भी महाभियोग को खारिज करके हुए उपराष्ट्रपति की ओर से इस संबंध में 10 पन्ने का एक ऑर्डर जारी किया गया, इस आदेश में कहा कि उन्होंने नोटिस से उत्पन्न सभी पहलुओं पर विस्तृत व्यक्तिगत बातचीत की थी और व्यक्तिगत रूप से और सामूहिक रूप से किए गए प्रत्येक आरोपों पर विचार किया । उन्होंने कहा कि 'इन सब के आधार पर, मैं इस निष्कर्ष पर आया हूं कि यह महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार होने के लायक नहीं है ... सावधानीपूर्वक विश्लेषण पर, मुझे लगता है कि वस्तुतः कोई ठोस वजह नहीं है। हम हमारे शासन के किसी भी स्तंभ को अनुमति नहीं दे सकते कि वो किसी भी विचार, शब्द या कार्रवाई से कमजोर हो जाए।'

मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ दुर्वयव्हार की पुष्टि नहीं

मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ दुर्वयव्हार की पुष्टि नहीं

वेंकैया नायडू ने आदेश में कहा है कि 'मैंने प्रस्ताव में लगाए गए सभी 5 आरोपों पर अपना दिमाग लगाया। मैंने प्रस्ताव के संबंध में सभी संलग्न कागजातों का भी परीक्षण किया। मेरा स्पष्ट मत यह है कि प्रस्ताव में दिए गए सभी तथ्य, उनके साथ संलग्न कागजातों के परीक्षण से पता चलता है कि कोई ऐसा तथ्य नहीं था जो संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश के दुर्वयव्हार की पुष्टि करता हो।'

कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस ने उठाए सवाल

उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सूरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि महाभियोग प्रस्ताव के संवैधानिक प्रक्रिया में 50 सांसदों की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सभापति प्रस्ताव तय नहीं कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास महाभियोग प्रस्ताव तय करने का कोई अधिकार नहीं है। यह लोकतंत्र को खारिज करने और उसे बचाने वालों के बीच एक लड़ाई है। सूरजेवाला ने कहा कि 64 सांसदों की ओर से महाभियोग प्रस्ताव देने के कुछ घंटों के भीतर, राज्य सभा के नेता ने उस दिन कहा है कि यह बदले की याचिका है। क्या अब बदले की याचिका, बचाव का आदेश हो गया है?

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