'संसद की सुरक्षा पर मिलकर करते हैं चर्चा', खड़गे के पत्र का जगदीप धनखड़ ने दिया जवाब

राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पत्र का जवाब दिया है। धनखड़ ने पत्र में लिखा है कि अगर आप 25 दिसंबर को शाम 4 बजे या अपनी सुविधानुसार उप राष्ट्रपति निवास में बातचीत के लिए समय निकालेंगे तो, मैं आभारी रहूंगा।

आगे यह भी पत्र में लिखा कि एक राजनीतिक रणनीति के रूप में व्यवधान और गड़बड़ी को हथियार देना लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र करने से कम नहीं है। काउंसिल ऑफ स्टेट्स, उच्च सदन यानी एल्डर्स हाउस के सदस्यों के रूप में हमें अपने आचरण का दूसरों के लिए अनुकरणीय उदाहरण बनाना होगा। चैंबर में बातचीत के मेरे प्रस्ताव को अस्वीकार करने के आपके रुख से मुझे बहुत दुख हुआ।

Jagdeep Dhankhar Mallikarjun Kharge

राज्यसभा के सभापति ने यह भी कहा कि सांसदों को सदन से निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने नारेबाजी, तख्तियां लहराने, सदन के वेल में प्रवेश करने और आसन के प्रति इशारों के माध्यम से जानबूझकर अव्यवस्था पैदा की।विचार करने पर आप इस बात से सहमत होंगे कि सभापति के साथ बातचीत से बचना और विपक्ष के नेता द्वारा सदन के पटल पर ऐसे अनुरोध को अस्वीकार करना अवांछनीय रूप से अभूतपूर्व है और निश्चित रूप से अच्छी तरह से स्थापित संसदीय परंपरा के अनुरूप नहीं है, जिसके आप अनुभवी हैं।

क्या कहा था खड़गे ने पत्र में ?
दरअसल, मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को 22 दिसंबर को पत्र लिखा था। यह पत्र 13 दिसंबर को हुए संसद सुरक्षा उल्लंघन को लेकर था। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि वह चिंताओं को रचनात्मक ढंग से संबोधित करने के लिए उपराष्ट्रपति से मिलने को तैयार हैं।

पत्र में खड़गे ने कहा था कि मैं आपका ध्यान इस ओर दिलाना चाहूंगा कि संसद की सुरक्षा के उल्लंघन के गंभीर मुद्दे को संबोधित करने के लिए राज्यसभा के नियमों और प्रक्रिया के नियमों के तहत कई नोटिस दिए थे। विपक्षी दल इस मामले पर एक सार्थक चर्चा में शामिल होने के लिए तैयार थे। मैं खुली चर्चा और संवाद के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराना चाहता हूं। मैं निकट भविष्य में सुविधाजनक तारीख और समय पर आपके साथ बैठक में शामिल होना चाहता हूं। सूत्रों के मुताबिक, खड़गे ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि धनखड़ विपक्ष की चिंताओं को ध्यान में रखेंगे और संसदीय लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांत को बरकरार रखेंगे। सरकार का अपना रास्ता होगा, लेकिन विपक्ष को अक्षरशः अपनी बात कहनी होगी।

धनखड़ ने खड़गे को पहले भी पत्र लिखा था

इससे एक दिन पहले धनखड़ ने खड़गे को पत्र लिखा था, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया था कि राजनीतिक गतिरोध को हल करने के लिए खड़गे द्वारा उनसे मिलने से इनकार करना 'संसदीय प्रथाओं के अनुरूप नहीं' था और उनसे बातचीत की मांग की थी। धनखड़ ने उल्लेख किया था कि सभापति से मांग करके सदन को निष्क्रिय करना, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता था। दुर्भाग्यपूर्ण और सार्वजनिक हित के खिलाफ था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+