राजस्थान में चुनाव की तारीख बदलने से पहले क्या हुआ, चुनाव आयोग को क्यों बदलना पड़ा फैसला?

राजस्थान में चुनाव की घोषणा करने के दो दिन बाद ही चुनाव आयोग को तारीख बदलनी पड़ गई। इसको लेकर आयोग पर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या आयोग ने पहले ठीक से होमवर्क नहीं किया था?

दरअसल, बुधवार को चुनाव आयोग ने 23 नवंबर को प्रदेश में बड़े पैमाने पर शादियों के आयोजन का हवाला देकर मतदान की तारीख बढ़ाकर 25 नवंबर को कर दिया है। आयोग ने कहा है कि कई पार्टियों और सामाजिक संगठनों ने शादियों और उससे जुड़े कार्यक्रमों का हवाला देकर तारीख बढ़ाने की मांग की थी।

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मतदान प्रतिशत घटने की थी आशंका
आयोग के मुताबिक 23 नवंबर को वोटिंग होने से बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी हो सकती थी, लॉजिस्टिक का मुद्दा भी था, जिससे मतदान में वोटरों की भागीदारी घट सकती थी। चुनाव आयोग ने इस बार राजस्थान के 51,756 मतदान केंद्रों पर 75% मतदान का लक्ष्य रखा है। 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनावों में 74.06 % वोटिंग हुई थी।

राज्य की 200 विधानसभा सीटों के लिए पांच साल पहले राजस्थान में 73.49 % पुरुष मतदाताओं ने वोट डाले थे। लेकिन, महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से ही नहीं कुल वोटिंग से भी अधिक रहा था और राज्य में 74.67% महिलाओं ने वोटिंग की थी।

देव उठनी एकादशी को 50 हजार से ज्यादा शादियों का अनुमान
दरअसल, 23 नवंबर को इस बार पवित्र पर्व देव उठनी एकादशी पड़ रही है। इस मौके पर राजस्थान में बड़े पैमाने पर शादियां होती हैं। इस बार भी राज्य में उस दिन 50,000 से ज्यादा शादियां होने का अनुमान है। चुनाव आयोग की घोषणा के बाद से ही बीजेपी को लेकर खबर आई कि उसने चुनाव आयोग से संपर्क करके तारीक बदलने की गुजारिश की है। दावा किया गया कि इससे मतदान का प्रतिशत गिर सकता है।

राज्य में पिछले चुनावों में जिस तरह से महिला मतदाताओं ने पुरुषों को पछाड़ा था, उससे भी लगता है कि चिंता बेवजह नहीं थी। क्योंकि, शादियों की वजह से महिला वोटरों का मतदान ज्यादा प्रभावित होने की संभावना बन सकती थी।

मुद्दा उठने के साथ ही चुनाव आयोग ने शुरू कर दिया मंथन
दरअसल टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रवीण गुप्ता के सामने जब 23 नवंबर को देव उठनी एकादशी को हजारों शादियों का मुद्दा उठाया गया था तो वे बोले थे कि आयोग को इस बात की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा था, 'राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि (इस बारे में) कुछ कर रहे हैं। हम (चुनाव) भी उन्हें बताएंगे।'

शादियों की वजह से लोगों का वोटिंग से हट सकता था ध्यान
ऑल इंडिया टेंट डेकोरेटेर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि जिंदल ने कहा था, 'शादियों के लिए देव उठनी एकादशी बहुत ही पवित्र अवसर है और इस दिन सारी हिंदू जातियां विवाह पसंद करते हैं। इस साल देव उठनी एकादशी को 50 हजार से ज्यादा शादियां होने वाली हैं।' उन्होंने कहा था कि इसके चलते मतदान प्रभावित होगा, क्योंकि बड़ी संख्या में आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक शादियों में व्यस्त रहेंगे।

कांग्रेस-बीजेपी ने किया तारीख बढ़ाने का समर्थन
इस तरह से चौतरफा अनुरोधों को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने जब मतदान की तारीख दो दिन बढ़ाने का फैसला किया तो भाजपा नेताओं समेत कांग्रेस ने भी इस फैसले की सराहना की ।
भाजपा सांसद और मौजूदा विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा है, 'बहुत अच्छी बात है। यह तो इलेक्शन कमीशन चाहता है मतदान प्रतिशत बढ़े और हर पॉलिटिकल पार्टी भी यही चाहेगी।'

राजस्थान सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि 'अच्छी बात है कि चुनाव आयोग को समझ आ गई....जनता के लिए चुनाव हो रहा है, वोटिंग ज्यादा हो ये भी हम चाहते हैं....कांग्रेस पार्टी ने भी इलेक्शन कमीशन को पत्र लिखे थे।'

लेकिन, चुनाव आयोग को जिस तरह से दो दिन में ही चुनाव तारीखें बदलनी पड़ी हैं, उससे उसके होमवर्क को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। नदीम नकवी नाम के एक वेरीफाइड हैंडल से एक्स (पहले ट्विटर) पर सवाल किया गया है कि, 'चुनाव आयोग के द्वारा यह किस तरह की रेकी की गई है....राजस्थान चुनाव तारीखें टालना बड़े पैमाने पर कुप्रबंधन की ओर इशारा करता है! मोदी के अमृतकाल मे सबकुछ संभव है...'

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