अशोक गहलोत सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल कर सचिन पायलट किसका भला कर रहे हैं?
पहले अशोक गहलोत सरकार के ख़िलाफ़ अनशन और अब जन-संघर्ष यात्रा. अपनी सरकार पर 'वार' करने वाले सचिन पायलट आख़िर चाहते क्या हैं? राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.
राजस्थान में इसी साल विधानसभा के चुनाव होने हैं और राज्य के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ खुल कर उतर आए हैं.
पायलट बीते महीने ही राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के ख़िलाफ़ अनशन पर बैठे थे.
इसको एक महीना ही गुज़रा और उन्होंने 'जन-संघर्ष पद यात्रा' निकाल दी.
अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मतभेद की ख़बरें कोई पहली बार नहीं उठी हैं, लेकिन यह सवाल ज़रूर उठ रहा है कि इस यात्रा से आख़िर सचिन पायलट क्या हासिल करना चाहते हैं.
अजमेर से 11 मई को शुरू हुई जन-संघर्ष पद यात्रा का 15 मई को जयपुर में एक बड़ी सभा के रूप में समापन हुआ.
ख़ास बात ये थी कि अजमेर से जयपुर तक सवा सौ किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान सचिन पायलट और उनके समर्थक मंत्री, विधायकों ने सीएम अशोक गहलोत पर कोई निशाना नहीं साधा.
लेकिन, जयपुर में हुई सभा में सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायक और मंत्रियों ने सीधा अशोक गहलोत को अपने निशाने पर लिया.
गहलोत सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए और आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन की चुनौती भी पेश की गई.
जन-संघर्ष पद यात्रा की समापन सभा में अशोक गहलोत सरकार में मंत्री हेमाराम चौधरी और राजेंद्र सिंह गुढ़ा समेत 14 वर्तमान विधायक मौजूद रहे. जबकि 14 पूर्व विधायक भी सभा में शामिल हुए.
इस यात्रा में पांच बोर्ड के अध्यक्ष, सात प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारी, 10 ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष, 17 लोकसभा एवं विधानसभा कांग्रेस प्रत्याशियों समेत छात्रसंघ, युवा, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक विभाग के नेता भी शामिल हुए.
सचिन पायलट ने सीएम अशोक गहलोत को चुनौती देते हुए कहा, "अभी मैंने गांधीवादी तरीक़े से अनशन और जन-संघर्ष यात्रा की है. अब मांगे नहीं मानी गईं तो पूरे प्रदेश में मैं आंदोलन करूंगा. गांव, ढ़ाणीं में और शहरों में हम पैदल चलेंगे. न्याय मांगेंगे और न्याय लेकर रहेंगे."
बिना नाम लिए उन्होंने अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा, "हम तो बिना पद के गाली खा-खा कर, ख़ून के घूंट पी-पी कर जनता के बीच संगठन का काम कर रहे हैं. आप मलाई खा-खा कर, गाली दे-दे कर हमें बदनाम करने का काम कर रहे हैं. अब यह होने वाला नहीं है."
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सचिन पायलट की मांगें क्या हैं?
सचिन पायलट ने भ्रष्टाचार और पेपर लीक मामले में अशोक गहलोत सरकार से तीन मांगें रखी हैं.
इन तीन मांगों में राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) का पुनर्गठन कर नए मापदंड बनाना और पारदर्शिता से लोगों का चयन शामिल है.
इसके अलावा पेपर लीक से जिन बच्चों का आर्थिक नुक़सान हुआ है, उन्हें उचित मुआवज़ा देने की मांग के अलावा वसुंधरा राजे सरकार पर लगाए आरोपों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है.
आरपीएससी को बंद करने की मांग पर आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफ़ेसर बीएल शर्मा बीबीसी से कहते हैं, "किसी संस्था को बंद करना उसका समाधान नहीं है. समस्या के सुधार पर विचार करना चाहिए."
वहीं राजनीतिक पत्रकार राम गोपाल जाट इस पर कहते हैं, "सचिन पायलट अनशन के बाद दिल्ली गए थे. उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने यात्रा निकाली. भीषण गर्मी के बावजूद ढाई से तीन हज़ार लोगों के साथ चलने से पायलट गुट में उत्साह आया है. उन्होंने सीधे तौर पर आलाकमान को चुनौती दी है."
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यात्रा से क्या हासिल करना चाहते हैं पायलट
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 10 मई को वोटिंग होनी थी. उससे ठीक एक दिन पहले सचिन पायलट ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा था कि 'ऐसा लगता है कि पूर्व सीएम और बीजेपी नेता वसुंधरा राजे अशोक गहलोत की नेता हैं सोनिया गांधी नहीं.'
इसी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में उन्होंने जनसंघर्ष पद यात्रा निकालने का एलान भी किया था.
यात्रा से जुड़े सवाल पर सचिन पायलट ने बीबीसी से कहा, "मैंने एक अनशन किया और तमाम कोशिशों के बाद जब मुझे लगा कि कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. तब लोगों की भावनाओं को एकत्रित कर उनकी आवाज़ बनने के लिए हम सड़कों पर आए."
पहले दिन से जयपुर तक यात्रा में शामिल अजमेर के 26 वर्षीय शेरू गुर्जर कहते हैं, "सचिन पायलट ने सही मांग उठाई है. युवाओं को पेपर लीक से हताशा होती है. भ्रष्टाचार के कारण लोगों के काम नहीं होते हैं. मैं यात्रा में शामिल होने के लिए गांव से अकेला आया हूं."
अजमेर से जयपुर तक आठ विधानसभा सीटें हैं. क्या ये यात्रा इन सीटों पर प्रभाव डालेगी? बीबीसी के इस सवाल पर पायलट कहते हैं, "वो समय बताएगा. लेकिन पब्लिक में जगह बनती है."
राजनीतिक विश्लेषक मिलाप डांड़ी कहते हैं, "साफ़ है कि सचिन पायलट अशोक गहलोत के ख़िलाफ़ वातावरण बना रहे हैं. लेकिन लग नहीं रहा कि कांग्रेस आलाकमान किसी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे. ये तमाशा और सत्ता की लड़ाई है जो चलती रहेगी."
गहलोत और पायलट कब साथ नज़र आएंगे, इस सवाल पर सचिन पायलट बीबीसी से कहते हैं, "मैं 2018 में प्रदेश अध्यक्ष था. मैंने हाथ जोड़-जोड़ कर सबको एक किया और साथ लेकर काम किया. हम 21 सीट पर रह गए थे, हम बहुमत में आए. सबको साथ लेकर काम करना मुखिया का काम होता है."
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कितनी सफ़ल रही जनसंघर्ष यात्रा
अजमेर से जयपुर तक सचिन पायलट की यात्रा के दौरान कम से कम ढाई से तीन हज़ार लोग उनके साथ सड़क पर चले. धौलपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली, झालावाड़, भीलवाड़ा, कोटा, बीकानेर, नागौर समेत प्रदेश भर से लोग इस यात्रा में शामिल हुए.
अजमेर से शुरू हुई पद यात्रा में सुबह आठ से 11 और शाम चार से सात बजे तक दो बार में प्रतिदिन 25 किलोमीटर का सफ़र तय किया गया.
हालांकि, पायलट समर्थक विधायक और मंत्री इस यात्रा में साथ नहीं चले. यात्रा के दौरान सरपंच से लेकर कई पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री और कांग्रेस से चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी खुलकर सामने आए.
पत्रकार रामगोपाल जाट कहते हैं, "यात्रा ज़रूर पायलट ने अकेले की है. लेकिन अब सरकार के कई मंत्री ही अपनी सरकार से ख़ुश नहीं हैं. सरकार सही काम नहीं कर रही, यह साबित करना चाह रहे हैं. मंच से आलाकमान को संदेश दिया है कि हम एकजुट हैं और आगे एकजुटता से ही आंदोलन करेंगे."
पायलट समर्थक विधायक मुकेश भाकर ने मंच से कहा, "याचना नहीं अब रण होगा."
सचिन पायलट गुट के नेताओं ने जयपुर में जिस तरह से सीधा हमला और अशोक गहलोत को आंदोलन की चेतावनी दी है, उससे स्पष्ट है कि यात्रा से अपने समर्थकों का उत्साह बढ़ाना उनका उद्देश्य रहा है.
भ्रष्टाचार और युवाओं से जुड़े मुद्दे पर जन-समर्थन हासिल करने के अपने उद्देश्य में पायलट सफल होते नज़र भी आ रहे हैं.
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यात्रा पर गहलोत मौन, कांग्रेस का किनारा
सचिन पायलट की यात्रा के दौरान अशोक गहलोत ने उन पर कोई बयान नहीं दिया. वह सीधा पायलट को निशाना बनाने से भी बचते नज़र आए.
राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बीबीसी से कहा, "दोनों ही एक-दूसरे को देखना नहीं चाहते. यह मेरे लिए भी समस्या है."
"अनशन पर बैठना और अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ काम करना ग़लत है. जल्द निर्णय लेंगे. मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं है. हमने रिपोर्ट दे दी है और बता दिया है कि क्या करना चाहिए."
"यह यात्रा सचिन पायलट की बिल्कुल निजी है. कांग्रेस के साथ इसका कोई लेना-देना नहीं है. कांग्रेस की होती तो मैं जाता, निशान होता, झंडा होता."
इधर, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव राम सिंह कस्वां ने पायलट पर बीजेपी के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "जब सरकार बनी तो पायलट उप-मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे. तब तक तो कोई मुद्दा नहीं उठाया, फिर मानेसर चले गए. उनके आने के बाद विधानसभा के तीन सत्र में भी आवाज़ नहीं उठाई."
"कर्नाटक के चुनाव में 40 प्रतिशत कमीशन के उस नैरेटिव को तोड़ने के लिए बीजेपी ने पायलट का उपयोग किया है. 9 को प्रेस कॉन्फ़्रेंस की और 10 को कर्नाटक की वोटिंग थी. सब काम इसीलिए किए हैं और बीजेपी के इशारे पर किए गए हैं."
कस्वां मानते हैं कि इससे कांग्रेस कमज़ोर हो रही है.
वह कहते हैं, "बीजेपी पायलट के ज़रिए वसुंधरा को बाहर करना चाह रही है और कांग्रेस को कमज़ोर. सब काम बीजेपी के कहने पर ही हो रहा है."
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष डॉक्टर सतीश पूनिया इस मामले पर बीबीसी से कहते हैं, "इससे लग रहा है कि कांग्रेस बड़े विभाजन की ओर चली गई है. सचिन पायलट अपनी सरकार से मांग कर रहे हैं. कांग्रेस के आलाकमान की कमज़ोरी है, पांच साल से विग्रह को ठीक करने का काम कांग्रेस ने नहीं किया. राजस्थान की जनता भुगत रही है."
बीजेपी के चौमूं विधायक और प्रवक्ता राम लाल शर्मा कहते हैं, "राजस्थान सरकार भ्रष्टाचार में डूबी हुई है, यह उनके ही मंत्री और विधायक कह रहे हैं. कांग्रेस जिन वादों पर सत्ता में आए थी वो काम किए ही नहीं. सचिन पायलट ख़ुद बताएं कि वह किसके इशारे पर काम कर रहे हैं."
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एक मंच पर दिखे पायलट समर्थक विधायक, मंत्री
एक दिन के अनशन और पांच दिन की पद यात्रा से दूर रहे सचिन पायलट समर्थक विधायक और मंत्री जयपुर की सभा में एक मंच पर नज़र आए. एक साथ मिल कर सभी ने अशोक गहलोत सरकार और आलाकमान को सीधी चुनौती दी है.
गहलोत सरकार में मंत्री राजेंद्र गुढ़ा यात्रा के दौरान 12 मई की रात सचिन पायलट से मिलने पहुंचे थे. तब उन्होंने खुलकर पायलट के समर्थन में बयान दिया. गहलोत सरकार में ख़ुद मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने अपनी ही सरकार और मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए.
उन्होंने कहा, "अशोक गहलोत ने तो विपक्ष पायलट को ही मान रखा है. हमारी सरकार ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. हमारी सरकार भ्रष्टाचार के मामले में 40 परसेंट से ज़्यादा बाहर जा रही है."
पायलट समर्थक और गहलोत सरकार में मंत्री हेमाराम चौधरी ने कहा, "राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार है या अशोक गहलोत की सरकार है. मालूम नहीं राजस्थान में किसकी सरकार है."
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री की जय-जयकार नहीं करो तो हम भ्रष्ट हैं. हम भ्रष्ट हैं तो आप अपनी सरकार में हमें मंत्री क्यों बनाए हुए हैं. आज ही सरकार से बाहर कर दीजिए यदि लगता है कि हम भ्रष्ट हैं."
जयपुर के चाकसू से विधाय़क और पायलट समर्थक विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैसे लेने के बयान पर हमला किया.
सोलंकी ने कहा, "मैंने मुख्यमंत्री के कार्यालय में फ़ोन लगा कर पूछा कि पैसे का हिसाब हम दे रहे हैं. लेकिन उन्होंने बुलाया ही नहीं."
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