Rajasthan local body election:नतीजे बता रहे हैं कि अभी विधानसभा चुनाव हुए तो क्या होगा ?

Rajasthan local body election results:31 जनवरी को आए राजस्थान के 20 जिलों की 90 नगरपालिकाओं (municipalities) के चुनाव नतीजों से जाहिर है कि कांग्रेस उन शहरी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, जिसे अभी तक भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Chief Minister Ashok Gehlot) की अगुवाई वाली कांग्रेस की सरकार है। इसने पिछले साल गहलोत और सचिन पायलट (Sachin Pilot) खेमे के बीच की सियासी लड़ाई भी देखी है और दो साल से ज्यादा सत्ता में रहने के चलते सरकार से थोड़ी-बहुत मायूसी भी स्वाभाविक है। इसके बावजूद अगर कांग्रेस ने शहरों में अपना प्रदर्शन बेहतर किया है तो इसका सेहरा गहलोत के सिर बांधा जा सकता है। लेकिन, असल कहानी ये नहीं है। भाजपा भी पीछे नहीं है और वह कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे रही है।

2018 के विधानसभा चुनाव जैसे ही नतीजे

2018 के विधानसभा चुनाव जैसे ही नतीजे

राजस्थान नगर निकाय चुनाव (Rajasthan local body election) में कांग्रेस को 35 फीसदी से थोड़ा ज्यादा वोट मिले हैं और बीजेपी उससे एक फीसदी से भी कम वोटों से पीछे है। यूं समझ लीजिए कि वोटरों ने 2018 में हुए विधानसभा चुनावों वाली ही कहानी अभी भी दोहराई है। तब कांग्रेस को 39.30% वोट मिले थे तो बीजेपी ने भी 38.77% वोट हासिल किए थे। लेकिन, वोटों में इतने कम अंतर के बावजूद कांग्रेस भाजपा से 27 सीटें ज्यादा जीत कर सरकार बना ली थी। अगर 90 नगरपालिकाओं की बात करें तो भाजपा को 24 में स्पष्ट बहुमत मिला है, जबकि कांग्रेस को 19 में पूर्ण कामयाबी मिली है। लेकिन, बाकी बचे 47 में से 45 नगरपालिकाओं में कांग्रेस को 31 में बढ़त हासिल हुई है और लगता है कि वह गवर्निंग बोर्ड गठित करने में सफल हो जाएगी।

वोट शेयर ही नहीं, वार्डों में भी कड़ा मुकाबला

वोट शेयर ही नहीं, वार्डों में भी कड़ा मुकाबला

अब नजरें 7 फरवरी को आने वाले नगरपालिका अध्यक्षों के चुनाव परिणामों पर टिकी हैं। वैसे कांग्रेस का दावा है कि वह 50 नगरपालिकाओं में अपना बोर्ड गठित करेगी। अगर नगरपालिका के कुल चुनाव नतीजों को देखें तो कांग्रेस 1,194 वार्ड में जीती है और बीजेपी को 1,146 वार्ड में सफलता मिली है। मतलब यहां भी कांटे का टक्कर है। इनके अलावा 631 निर्दलीय, 46 एनसीपी और 13 हनुमान बेनिवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के पार्षद जीते हैं, जो किसान आंदोलन के मुद्दे पर हाल ही में बीजेपी से अलग हो गई है। 2015 के नगरपालिका चुनावों के बाद बीजेपी ने 60 नगरपालिकाओं में और कांग्रेस ने 25 में अपना बोर्ड गठित किया था। वैसे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ( BJP state chief Satish Poonia) का आरोप है कि गहलोत ने वार्डों के परिसीमन में 'खेल' किया, नहीं तो बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर हो सकता था।

उपचुनाव वाली सीटों पर उलट रहे हैं नतीजे

उपचुनाव वाली सीटों पर उलट रहे हैं नतीजे

इन चुनाव परिणामों के बाद बहस ये हो रही है कि आने वाले दो महीनों में विधानसभा की चार सीटों पर जो उपचुनाव होने हैं, उसमें किसका पलड़ा भारी साबित हो सकता है। इसके लिए पांच नगरपालिकाओं के चुनाव परिणामों का विश्लेषण करें तो तस्वीर साफ हो सकती है। मसलन, राजसमंद (Rajsamand) नगरपालिका में कांग्रेस जीती है, जबकि यह विधानसभा क्षेत्र पिछले 25 वर्षों से बीजेपी के कब्जे में था। इसके ठीक उलट बीजेपी गंगापुर (Gangapur) में जीत गई है, जो सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र (Sahara constituency)में है और यह सीट कांग्रेस के पास थी। वहीं जनता सेना नाम की क्षेत्रीय पार्टी ने भिंडर नगरपालिका (Bhinder municipality ) पर कब्जा कर लिया है, जो कि वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र (Vallabhnagar constituency) के अंदर है और इसपर अभी कांग्रेस का कब्जा था। वहीं सुजानगढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा था, लेकिन इसके तहत आने वाले दो नगरपालिकाओं में से एक कांग्रेस और एक भाजपा के खाते में गई है। अगर हम इन उपचुनावों वाली सीटों के नगरपालिका चुनाव नतीजों के सैंपल के आधार पर राज्य की सभी 200 विधानसभा सीटों पर बात करें तो कहा जा सकता है कि नतीजा 2018 के विधानसभा चुनावों से ज्यादा इधर-उधर होने वाला नहीं है।

वोटों में थोड़ी सी उलटफेर से बदल सकती है विधानसभा की तस्वीर

वोटों में थोड़ी सी उलटफेर से बदल सकती है विधानसभा की तस्वीर

इन चारों विधानसभा उपचुनावों के अलावा राजस्थान के 12 जिलों में पंचायत (panchayat) और जिला परिषद ( zila parishad)के भी चुनाव होने हैं। पंचायती राज चुनाव के पहले चरण में भाजपा ने कांग्रेस के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया था और यह संकेत है कि ग्रामीण इलाकों बीजेपी का जनाधार मजबूत हुआ है। यही वजह है कि दोनों दल नगरपालिका चुनावों को अपने-अपने नजरिए से बताने की कोशिश कर रहे हैं। मसलन, मुख्यमंत्री अशोक गलोत ने कहा है, 'हमने ज्यादा वोट लाकर और ज्यादा वार्ड जीतकर बीजेपी को पीछे छोड़ दिया है।' वहीं सतीश पूनिया कहते हैं, 'परिणाम निश्चित तौर पर कांग्रेस की हार है, जो 90 नगरपालिकाओं में से 71 में हार गई है और बोर्ड गठित करने के लिए यह निर्दलीयों को अपने साथ लाने के लिए ताकत का इस्तेमाल कर सकती है।' मतलब, साफ है कि राजस्थान में अभी भी बीजेपी और कांग्रेस में कांटे का मुकाबला है। वोटों में थोड़ा भी अंतर होने से नतीजे इधर के उधर हो सकते हैं।

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